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म्युचुअल फंड बनाम एसआईएफ.. आखिर किसे चुनें कौन से निवेशक₹1 करोड़ से ज्यादा का स्वास्थ्य बीमा कवर, पहले दें ध्यान.. भविष्य में बोझ न बन जाए महंगा प्लानREITs निवेश गाइड: बढ़ते विकल्पों के बीच निवेशकों के लिए अवसर और जोखिम दोनों बढ़ेपश्चिम ए​​शिया संकट से छोटी-मझोली दवा कंपनियों के मुनाफे पर दबाव, लागत और सप्लाई बाधाओं से बढ़ी चिंता भू-राजनीतिक, आ​र्थिक जो​खिमों पर रिलायंस ने किया आगाह; जियो आईपीओ पर चुप्पीप्ला​स्टिक नोटों की ओर RBI का कदम, नोट छपाई लागत घटाने और टिकाऊ करेंसी पर जोरEditorial: IIP का नया रूप, 2022-23 आधार वर्ष के साथ औद्योगिक माप प्रणाली में बड़ा बदलावलोन लेने वाली महिलाओं की बढ़ी तादाद मगर नहीं बनेगी बात, दो-तिहाई अब भी फॉर्मल सिस्टम से बाहरबचाव, पुनरुद्धार और सुधार: IBC के पहले दशक ने भारत की क्रेडिट संस्कृति को बदलाउतार-चढ़ाव भरे बाजारों में हॉस्पिटल शेयरों को दम, हेल्थकेयर इंडेक्स में 7% की बढ़त

लेखक : देवाशिष बसु

आज का अखबार, लेख

अतार्किक विकल्प: क्या राह से भटक गए हैं FII, निफ्टी में तेजी के बीच कैसे DII और विदेशी निवेशकों के रुख में हुआ अंतर?

नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का मानक सूचकांक निफ्टी जून 2022 के मध्य से 69 प्रतिशत उछल चुका है। जून मध्य में निफ्टी 15,183 अंक पर था मगर अब यह 25,791 अंक तक पहुंच चुका है। पिछले 18 महीनों में इसमें 52 प्रतिशत उछाल आई है। ऐसा लग रहा है कि खुदरा निवेशकों, म्युचुअल फंड और […]

आज का अखबार, लेख

अतार्किक विकल्प: दरों में कटौती और शेयरों के भाव

दुनिया भर के निवेशक शेयर बाजारों में उछाल का इंतजार कर रहे हैं। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में जल्द ही कटौती के संकेत दिए हैं, जिनसे उनके भीतर उत्साह भर गया है। पारंपरिक मान्यता तो यही है कि फेड दरों में कटौती करता है तो शेयरों के भाव चढ़ने लगते हैं। […]

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अतार्किक विकल्प: बैंक एफडी सही है! ऐसे अभियान की जरूरत

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से साथ मिलकर विशेष अभियान चलाने को कहा ताकि जमा राशि जुटाई जा सके। इसकी वजह यह है कि जमा में वृद्धि की रफ्तार ऋण वृद्धि की तुलना में पीछे है। जुलाई के अंत में जमा राशि पिछले वर्ष जुलाई के मुकाबले […]

आज का अखबार, लेख

अतार्किक विकल्प: परियोजनाओं में देरी से बढ़ती लागत

पिछले दिनों सोशल मीडिया पुलों के ढहने, हवाईअड़्डों की छतों के गिरने, नए-नए बने एक्सप्रेसवे के बह जाने या उनमें बड़ी दरारें बनने, नवनिर्मित हवाईअड्डों या ट्रेन स्टेशनों की छतों से बारिश का पानी गिरने के संदेशों से भर गया। देशवासी निर्माणाधीन बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता को लेकर चिंतित हैं, खासतौर पर जब से सरकार […]

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अतार्किक विकल्प: वायदा एवं विकल्प में कैसे लगे कयास पर अंकुश

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की प्रमुख माधवी पुरी बुच ने पिछले दिनों एक संवाददाता सम्मेलन में डेरिवेटिव खंड में कयास आधारित कारोबार में बेतहाशा बढ़ोतरी पर चिंता जताई थी। पिछले कुछ वर्षों के दौरान डेरिवेटिव खंड में कारोबार में भारी इजाफा हुआ है। इससे कयास आधारित कारोबार और बढ़ने की चिंता सिर उठाने […]

आज का अखबार, लेख

अतार्किक विकल्प: भारत में फिर ‘राजनीतिक’ अर्थव्यवस्था हावी

ठीक 30 वर्ष पहले मैंने कहा था कि रिलायंस इंडस्ट्रीज एक कंपनी नहीं बल्कि यह दो कंपनियों का समूह है। एक कंपनी ने विनिर्माण संयंत्र एवं उत्पाद बेचने पर ध्यान केंद्रित किया तो दूसरी ने पूंजी जुटाने एवं अपने आंतरिक संसाधनों से ‘समूह’ के प्रबंधन पर ध्यान दिया। ये दोनों ही इकाइयां एक दूसरे का […]

आज का अखबार, ताजा खबरें, लेख

अतार्किक विकल्प: ट्रिकल डाउन सिद्धांत और ‘विकसित भारत’

उद्यमियों और शेयर बाजार में सक्रिय कारोबारियों को लग रहा है कि नरेंद्र मोदी अपने तीसरे कार्यकाल में देश को ‘विकसित भारत’ बना देंगे। परंतु, प्रश्न यह है कि हम इस बदलाव को किस दृष्टिकोण के साथ देख रहे हैं। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), कर राजस्व, शेयर बाजार सूचकांक, कंपनियों का मुनाफा बढ़ना, निवेश में […]

आज का अखबार, लेख

अतार्किक विकल्प: संरचनात्मक सुधारों से अर्थव्यवस्था को धार, अभी ‘मोदी 1.5’ में भारत

आम चुनाव अब अपने अंतिम चरणों की तरफ बढ़ रहा है और इसी बीच यह कहा जाने लगा है कि मोदी 3.0 (मोदी सरकार का तीसरा कार्यकाल) के लिए कार्य योजनाएं भी तैयार हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एवं उसके समर्थकों को लग रहा है कि नरेंद्र मोदी अपने तीसरे कार्यकाल में देश […]

आज का अखबार, लेख

अतार्किक विकल्प: भारत से क्यों गईं विदेशी वित्तीय कंपनियां?

सन 1992 के प्रतिभूति घोटाले के बाद कई विदेशी बैंकों ने जो अहंकार से भरी चुटकियां लीं और उत्तर दिए उनमें से एक यह भी था, ‘अगर आप घर का मुख्य द्वार खुला रखेंगे तो आपके घर में चोरी होने की आशंका है।’ यह टिप्पणी सिटी बैंक के एक काउबॉय बैंकर ने की थी। वह […]

आज का अखबार, लेख

अतार्किक विकल्प: म्युचुअल फंड की जोखिम जांच कितनी उपयोगी?

इस वर्ष के शुरू में बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने म्युचुअल फंडों को उनकी योजनाओं में रकम का अंधाधुंध प्रवाह नियंत्रित करने एवं पोर्टफोलियो में बदलाव करने के निर्देश दिए थे। नियामक ने यह निर्देश इसलिए दिया था कि बेरोक-टोक निवेश आने से बाजार में अनिश्चितता बढ़ जाती है। एक साल […]

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