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पश्चिम ए​​शिया संकट से छोटी-मझोली दवा कंपनियों के मुनाफे पर दबाव, लागत और सप्लाई बाधाओं से बढ़ी चिंता भू-राजनीतिक, आ​र्थिक जो​खिमों पर रिलायंस ने किया आगाह; जियो आईपीओ पर चुप्पीप्ला​स्टिक नोटों की ओर RBI का कदम, नोट छपाई लागत घटाने और टिकाऊ करेंसी पर जोरEditorial: IIP का नया रूप, 2022-23 आधार वर्ष के साथ औद्योगिक माप प्रणाली में बड़ा बदलावलोन लेने वाली महिलाओं की बढ़ी तादाद मगर नहीं बनेगी बात, दो-तिहाई अब भी फॉर्मल सिस्टम से बाहरबचाव, पुनरुद्धार और सुधार: IBC के पहले दशक ने भारत की क्रेडिट संस्कृति को बदलाउतार-चढ़ाव भरे बाजारों में हॉस्पिटल शेयरों को दम, हेल्थकेयर इंडेक्स में 7% की बढ़तबाजार में बढ़त के लिए पूंजीगत खर्च की बहाली, युद्धविराम अहम: निमेश चंदनईरान-अमेरिका के हमलों के बाद कच्चे तेल में उछाल,  ब्रेंट और WTI दोनों की कीमतें में तेज बढ़तQ4 में पूंजी बाजार की फर्मों का दमदार प्रदर्शन, AMC और ब्रोकर्स की ग्रोथ पर ब्रोकरेज का पॉजिटिव रुख

लेखक : देवाशिष बसु

आज का अखबार, बाजार, लेख, शेयर बाजार

क्या बाजार फिर हो पाएगा तेजी पर सवार?

पिछले साल सितंबर के अंत और दिसंबर की शुरुआत के दरम्यान तमाम बाजार सूचकांक अपने शिखर पर पहुंच गए थे। लेकिन वहां से वे ऐसे फिसले कि ठहरते नहीं दिख रहे। निफ्टी 50 सूचकांक 13 प्रतिशत गिर चुका है, निफ्टी 500 तथा निफ्टी मिडकैप 16 प्रतिशत लुढ़क चुके हैं और निफ्टी स्मॉलकैप एवं माइक्रोकैप तो […]

आज का अखबार, लेख

क्या है विकसित भारत की राह?

मौजूदा सरकार ने जब से ‘2047 तक विकसित भारत’ का नया नारा दिया है तभी से बहस-मुबाहिसे चल रहे हैं कि देश संपन्न कैसे हो। कोई देश कैसे धनवान बनता है इस पर भारत ही नहीं पूरी दुनिया में बहस चलती रहती है। इसकी वजह यह है कि दुनिया में कुछ ही संपन्न देश हैं […]

आज का अखबार, लेख

अतार्किक विकल्प: छोटे शेयरों की दुनिया में दिखेंगे बदलाव

पिछले पखवाड़े सीएनएक्स स्मॉलकैप 100 सूचकांक 7.3 प्रतिशत लुढ़क गया। इस सूचकांक में इससे ज्यादा गिरावट दिसंबर 2022 में आई थी, जब यह 8.33 प्रतिशत फिसला था। स्मॉलकैप 100 सूचकांक में शामिल शेयरों में पिछले कुछ महीनों से बदलाव की कवायद चल रही थी मगर यह उठ नहीं पाया और आखिरकार लुढ़क गया। सूचकांक के […]

आज का अखबार, लेख

अतार्किक विकल्प: हिचकोले खाती भारत की आर्थिक वृद्धि की गाड़ी

नवंबर के शुरू में मैंने अपने एक आलेख में जिक्र किया था कि भारतीय अर्थव्यवस्था अनुमान के मुताबिक ही बिना उत्साह आगे बढ़ रही है। भारत की अर्थव्यवस्था यदा-कदा ही मंदी के दलदल में पूरी तरफ फंसती है मगर यह भी सच है कि लगातार तेज रफ्तार दौड़ने में इसकी सांस फूलने लगती है। कुछ […]

आज का अखबार, लेख

अतार्किक विकल्प: निर्यात को प्राथमिकता से बनेगा ‘विकसित भारत’

बात 1990 के दशक के मध्य की है, जब भारतीय कंपनियां आर्थिक मंदी और ऊंची ब्याज दरों जैसी चुनौतियों से जूझ रही थीं। उस वक्त मैंने अच्छी यानी उच्च गुणवत्ता वाली कंपनियां छांटने के लिए आसान तरीका ढूंढा था। मैं देखता था कि कंपनी के राजस्व का बड़ा हिस्सा निर्यात से आता है या नहीं। […]

आज का अखबार, लेख

शेयर बाजार की चाल में उभरती छोटी कंपनियां

पिछले दो महीने में चार अलग-अलग स्तंभ लेखों में मैंने भारतीय अर्थव्यवस्था में देखी जा रही सुस्ती पर बात की थी जिसका अंदाजा अब कार, उपभोक्ता वस्तुओं, बैंक, वित्तीय सेवाएं और बुनियादी ढांचा जैसे प्रमुख क्षेत्रों के शेयरों की कीमतों से स्पष्ट रूप से हो रहा है। दो प्रमुख बाजार सूचकांक, निफ्टी और सेंसेक्स, 27 […]

आज का अखबार, लेख

अतार्किक विकल्प: शेयर बाजार में आशंका के गहराते घने बादल

पिछले चार वर्षों में भारत के शेयर बाजार में अच्छी तेजी देखी गई है और यह महामारी के निराशाजनक दौर की गिरावट से उबरता हुआ भी दिख रहा है। निफ्टी 50, मार्च 2020 के अंत में 8,598 के स्तर पर बंद हुआ और कोई भी इसमें दोबारा तेजी की भविष्यवाणी नहीं कर सकता था। इसकी […]

आज का अखबार, लेख

अतार्किक विकल्प: उम्मीद के अनुरूप चल रही देश की अर्थव्यवस्था

अगर आप भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार को लेकर हमेशा निराशावादी रहेंगे तब आप अच्छे मौके गंवा सकते हैं। हमने इसे 2022 के मध्य से अब तक देखा है, जब अर्थव्यवस्था में मजबूती देखी गई और शेयर बाजार में भी तेजी आई। लेकिन जब अर्थव्यवस्था में कमजोरी दिखने लगती है तब कुछ लोग सरकार की […]

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अतार्किक विकल्प: सामान्य दिशा में बढ़ती दिख रही अर्थव्यवस्था?

जो कभी एक बार की दिक्कत लग रही थी अब वह सिलसिला लगने लगा है। वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह में वृद्धि घटकर 6.5 फीसदी रह गई, जो 40 महीनों में सबसे सुस्त वृद्धि है। करीब 6.5 फीसदी के स्तर पर जीएसटी संग्रह शायद ही मुद्रास्फीति के अनुरूप है जिसका अर्थ यह है कि […]

आज का अखबार, लेख

अतार्किक विकल्प: विकसित राष्ट्र बनने के लिए सही प्रयास नहीं

कई लोग पूरी तरह आश्वस्त दिखते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में जा रहा है। सभी उत्साहित हैं और कहा जा रहा है कि वर्ष 2014 तक भारत जिन अनिश्चितताओं सामना कर रहा था वे अब खत्म हो चुकी हैं। इस सोच के अनुसार सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की 7 प्रतिशत […]

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