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फिनटेक के BC नेटवर्क पर RBI की बढ़ सकती है निगरानी, लाइसेंस व्यवस्था पर चल रही चर्चाRBI ने बैंकों को साल भर मजबूत परिचालन अनुशासन और डेटा गवर्नेंस बनाए रखने की सलाह दीवोडाफोन आइडिया को AGR बकाया पर 54,000 करोड़ रुपये से अधिक की राहत मिलने का अनुमानWindsor बनी 2025 की सबसे ज्यादा बिकने वाली इलेक्ट्रिक कार, बिक्री 46,735 वाहन तक पहुंचीगुजरात के खोरज में नया संयंत्र लगाएगी मारुति सुजूकी, 10 लाख कारों की होगी सालाना क्षमताक्लीनर टेक्नॉलजी का उभार: भारत में EV-CNG-हाइब्रिड की हिस्सेदारी तीन साल में हुई दोगुनीमारुति सुजूकी ने इंडियन ऑयल संग किया करार, अब पेट्रोल पंपों पर मिलेगी कार सर्विसिंग की सुविधानेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 11 जनवरी तक करीब 9%बढ़ा, रिफंड घटने से बढ़ा कलेक्शनTCS में कर्मचारियों की संख्या में लगातार गिरावट, तीसरी तिमाही में 11 हजार से ज्यादा कर्मचारी हुए कमकोटक महिंद्रा बैंक ने अनूप कुमार शाह को पूर्णकालिक निदेशक बनाया, नियुक्ति 12 जनवरी से प्रभावी

लेखक : देवाशिष बसु

आज का अखबार, लेख

अतार्किक विकल्प: विकसित राष्ट्र बनने के लिए सही प्रयास नहीं

कई लोग पूरी तरह आश्वस्त दिखते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में जा रहा है। सभी उत्साहित हैं और कहा जा रहा है कि वर्ष 2014 तक भारत जिन अनिश्चितताओं सामना कर रहा था वे अब खत्म हो चुकी हैं। इस सोच के अनुसार सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की 7 प्रतिशत […]

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अतार्किक विकल्प: क्या राह से भटक गए हैं FII, निफ्टी में तेजी के बीच कैसे DII और विदेशी निवेशकों के रुख में हुआ अंतर?

नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का मानक सूचकांक निफ्टी जून 2022 के मध्य से 69 प्रतिशत उछल चुका है। जून मध्य में निफ्टी 15,183 अंक पर था मगर अब यह 25,791 अंक तक पहुंच चुका है। पिछले 18 महीनों में इसमें 52 प्रतिशत उछाल आई है। ऐसा लग रहा है कि खुदरा निवेशकों, म्युचुअल फंड और […]

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अतार्किक विकल्प: दरों में कटौती और शेयरों के भाव

दुनिया भर के निवेशक शेयर बाजारों में उछाल का इंतजार कर रहे हैं। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में जल्द ही कटौती के संकेत दिए हैं, जिनसे उनके भीतर उत्साह भर गया है। पारंपरिक मान्यता तो यही है कि फेड दरों में कटौती करता है तो शेयरों के भाव चढ़ने लगते हैं। […]

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अतार्किक विकल्प: बैंक एफडी सही है! ऐसे अभियान की जरूरत

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से साथ मिलकर विशेष अभियान चलाने को कहा ताकि जमा राशि जुटाई जा सके। इसकी वजह यह है कि जमा में वृद्धि की रफ्तार ऋण वृद्धि की तुलना में पीछे है। जुलाई के अंत में जमा राशि पिछले वर्ष जुलाई के मुकाबले […]

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अतार्किक विकल्प: परियोजनाओं में देरी से बढ़ती लागत

पिछले दिनों सोशल मीडिया पुलों के ढहने, हवाईअड़्डों की छतों के गिरने, नए-नए बने एक्सप्रेसवे के बह जाने या उनमें बड़ी दरारें बनने, नवनिर्मित हवाईअड्डों या ट्रेन स्टेशनों की छतों से बारिश का पानी गिरने के संदेशों से भर गया। देशवासी निर्माणाधीन बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता को लेकर चिंतित हैं, खासतौर पर जब से सरकार […]

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अतार्किक विकल्प: वायदा एवं विकल्प में कैसे लगे कयास पर अंकुश

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की प्रमुख माधवी पुरी बुच ने पिछले दिनों एक संवाददाता सम्मेलन में डेरिवेटिव खंड में कयास आधारित कारोबार में बेतहाशा बढ़ोतरी पर चिंता जताई थी। पिछले कुछ वर्षों के दौरान डेरिवेटिव खंड में कारोबार में भारी इजाफा हुआ है। इससे कयास आधारित कारोबार और बढ़ने की चिंता सिर उठाने […]

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अतार्किक विकल्प: भारत में फिर ‘राजनीतिक’ अर्थव्यवस्था हावी

ठीक 30 वर्ष पहले मैंने कहा था कि रिलायंस इंडस्ट्रीज एक कंपनी नहीं बल्कि यह दो कंपनियों का समूह है। एक कंपनी ने विनिर्माण संयंत्र एवं उत्पाद बेचने पर ध्यान केंद्रित किया तो दूसरी ने पूंजी जुटाने एवं अपने आंतरिक संसाधनों से ‘समूह’ के प्रबंधन पर ध्यान दिया। ये दोनों ही इकाइयां एक दूसरे का […]

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अतार्किक विकल्प: ट्रिकल डाउन सिद्धांत और ‘विकसित भारत’

उद्यमियों और शेयर बाजार में सक्रिय कारोबारियों को लग रहा है कि नरेंद्र मोदी अपने तीसरे कार्यकाल में देश को ‘विकसित भारत’ बना देंगे। परंतु, प्रश्न यह है कि हम इस बदलाव को किस दृष्टिकोण के साथ देख रहे हैं। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), कर राजस्व, शेयर बाजार सूचकांक, कंपनियों का मुनाफा बढ़ना, निवेश में […]

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अतार्किक विकल्प: संरचनात्मक सुधारों से अर्थव्यवस्था को धार, अभी ‘मोदी 1.5’ में भारत

आम चुनाव अब अपने अंतिम चरणों की तरफ बढ़ रहा है और इसी बीच यह कहा जाने लगा है कि मोदी 3.0 (मोदी सरकार का तीसरा कार्यकाल) के लिए कार्य योजनाएं भी तैयार हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एवं उसके समर्थकों को लग रहा है कि नरेंद्र मोदी अपने तीसरे कार्यकाल में देश […]

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अतार्किक विकल्प: भारत से क्यों गईं विदेशी वित्तीय कंपनियां?

सन 1992 के प्रतिभूति घोटाले के बाद कई विदेशी बैंकों ने जो अहंकार से भरी चुटकियां लीं और उत्तर दिए उनमें से एक यह भी था, ‘अगर आप घर का मुख्य द्वार खुला रखेंगे तो आपके घर में चोरी होने की आशंका है।’ यह टिप्पणी सिटी बैंक के एक काउबॉय बैंकर ने की थी। वह […]

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