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65 मौतें, 2311 गिरफ्तारी के बाद एक फोन कॉल से सरकार विरोधी प्रदर्शन और तेज….आखिर ईरान में हो क्या रहा है?

अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी ने दावा किया है कि अब तक इस प्रदर्शन में कम से कम 65 लोग मारे जा चुके हैं और 2311 लोगों को गिरफ्तार किया गया है

Last Updated- January 10, 2026 | 3:09 PM IST
iran protests
ईरान में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते लोग | फोटो: PTI

ईरान में पिछले कई सालों की सबसे बड़ी सरकार विरोधी लहर ने शुक्रवार रात को और जोर पकड़ लिया। लोग सड़कों पर उतर आए हैं और अधिकारियों को इन्हें दबाने में मुश्किल हो रही है। इंटरनेट और फोन नेटवर्क पूरी तरह बंद होने के बावजूद, सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो बाहर आ रहे हैं। इनमें लाखों लोग मार्च करते दिख रहे हैं, जो सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। कुछ क्लिप्स में खून से सनी लाशें पड़ी हैं, और कई प्रदर्शनकारियों में बुजुर्ग भी शामिल हैं। ये दृश्य देखकर मौतों की संख्या और बढ़ने का डर सता रहा है।

प्रदर्शन 28 दिसंबर को तेहरान में व्यापारियों से शुरू हुए थे। वे मुद्रा संकट और रोजमर्रा की जिंदगी में आ रही दिक्कतों से परेशान थे। अब ये आंदोलन पूरे देश में फैल चुका है। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी ने दावा किया है कि अब तक इसमें कम से कम 65 लोग मारे जा चुके हैं और 2311 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से 38 मौतें मध्य और पश्चिमी इलाकों जैसे चहारमहाल और बख्तियारी, इलाम, केरमानशाह और फार्स प्रांतों में हुई हैं। टाइम मैगजीन ने तेहरान के एक डॉक्टर के हवाले से बताया कि 217 से ज्यादा प्रदर्शनकारी मारे गए हैं, ज्यादातर गोलियों से।

तेहरान से करीब 50 किलोमीटर पश्चिम में फर्दिस शहर से आई मोबाइल वीडियो में कम से कम सात लाशें एक इमारत के अंदर पड़ी दिख रही हैं, जो खून से लथपथ हैं। लोग एक शख्स के सिर पर पट्टी बांध रहे हैं और आंख पर पैच लगा रहे हैं। वीडियो में आवाज आ रही है कि गोलियों से कम से कम 10 लोग मारे गए। ब्लूमबर्ग इन वीडियो की पुष्टि नहीं कर सका।

प्रदर्शनकारियों के नारे और हिंसा के दृश्य

शुक्रवार और गुरुवार को प्रदर्शन और तेज हो गए, क्योंकि ईरान में ये दिन वीकेंड होते हैं। लोग “डेथ टू द डिक्टेटर” जैसे नारे लगा रहे हैं। कुछ क्लिप्स में “नो गाजा, नो लेबनान, माई लाइफ फॉर ईरान” सुनाई दे रहा है, जो ये दिखाता है कि लोग विदेशी मुद्दों से ऊब चुके हैं और अपना देश पहले चाहते हैं। एक और नारा है “दिस इज द ईयर ऑफ ब्लड; सैयद अली विल बी टॉपल्ड”, जो सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की तरफ इशारा करता है। खामेनेई ने शुक्रवार को कहा कि वे प्रदर्शन दबा देंगे।

कुछ वीडियो में लोग “दिस इज द लास्ट बैटल; द पहलवी रिटर्न्स” चिल्ला रहे हैं और लायन एंड सन वाला झंडा लहरा रहे हैं। ये झंडा 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले का पुराना राष्ट्रीय चिन्ह है, जब शाह को हटाया गया था। दक्षिण-पश्चिमी शहर जाहेदान में, जो सुन्नी बहुल है और पहले भी हिंसा का केंद्र रहा है, शुक्रवार की नमाज के बाद सुरक्षा बलों ने गोली चलाई। नॉर्वे स्थित हेंगाव ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स के अनुसार, कई लोग घायल हुए।

Also Read: Explainer: 50 शहरों में हिंसा, खामेनेई की धमकी और ट्रंप की चेतावनी…ईरान में आखिर हो क्या रहा है?

सरकारी टीवी ने शनिवार को प्रदर्शनों को हल्का बताते हुए कहा कि सुरक्षा बलों ने शुक्रवार को काबू पा लिया। उन्होंने इसे “हथियारबंद आतंकवादियों” की करतूत बताया, जो तेहरान और दूसरे शहरों में अशांति फैला रहे थे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों या सुरक्षा बलों की मौतों का कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं दिया। लेकिन सरकारी मीडिया ने बताया कि पुलिस और बासिज वॉलंटियर मिलिशिया में कम से कम 12 लोग मारे गए। सेमी-ऑफिशियल तस्नीम न्यूज एजेंसी ने कहा कि “हथियारबंद आतंकवादियों” ने गुरुवार को गोलियां चलाकर कई पुलिसवालों को मार डाला।

रेजा पहलवी का कॉल और दुनिया की प्रतिक्रिया

ये प्रदर्शन 65 साल के रेजा पहलवी के कॉल पर और तेज हुए हैं। वे पूर्व शाह के बेटे हैं और अमेरिका में निर्वासन में रहते हैं। खुद को विपक्षी नेता बता रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि शनिवार और रविवार को शाम 6 बजे के बाद फिर सड़कों पर आएं। उनके एक X पोस्ट में लिखा है, “हमारा लक्ष्य अब सिर्फ सड़कों पर उतरना नहीं है। अब शहर के केंद्रों पर कब्जा करके उन्हें अपने पास रखना है।”

अमेरिका ने अभी तक पहलवी को ईरानी सरकार के विकल्प के तौर पर नहीं अपनाया है। लेकिन राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कई बार चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों को मारना बंद करें। शुक्रवार को फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी के नेताओं ने भी ईरान से अपील की कि संयम बरतें, हिंसा न करें और नागरिकों के बुनियादी अधिकारों का सम्मान करें।

First Published - January 10, 2026 | 3:09 PM IST

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