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बजट पर शेयर बाजार की नजर: किन सेक्टरों पर बरसेगा सरकार का पैसा? जानें 5 ब्रोकरेज की राय

बजट 2026 से पहले बाजार को बड़े ऐलान की नहीं, बल्कि फिस्कल डिसिप्लिन, कैपेक्स और रक्षा–इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टरों पर फोकस की उम्मीद

Last Updated- January 19, 2026 | 8:16 AM IST
Budget 2026

भारतीय शेयर बाजार यह मानकर चल रहे हैं कि केंद्रीय Budget 2026 में कोई बड़े और चौंकाने वाले सुधार नहीं होंगे। यह बजट रविवार, 1 फरवरी 2026 को पेश किया जाएगा। विश्लेषकों के अनुसार, सरकार का फोकस लोकलुभावन घोषणाओं की बजाय राजकोषीय अनुशासन पर रहेगा। इसकी मुख्य वजह यह है कि प्रत्यक्ष करों से जुड़े अहम बदलाव पिछले साल के बजट में किए जा चुके हैं और जीएसटी से जुड़े सुधार सितंबर 2025 से लागू हो चुके हैं।

फिस्कल डिसिप्लिन और कैपेक्स पर जोर

बाजार को लगता है कि सरकार ज्यादा फालतू खर्च नहीं करेगी और देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने की कोशिश करेगी। लेकिन रक्षा और उससे जुड़े नए क्षेत्रों में सरकार ज्यादा पैसा खर्च कर सकती है। जानकारों का कहना है कि टैक्स से होने वाली आय में सीमित बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर पैसा जुटा सकती है। बजट में रक्षा, रेलवे और छोटे उद्योगों (एमएसएमई) को मजबूत करने के कदम लिए जा सकते हैं। कुल मिलाकर, सरकार की कोशिश होगी कि साल 2026-27 में सरकार का घाटा देश की कमाई (जीडीपी) का करीब 4.2 फीसदी ही रहे।

Nomura की राय

जापान की ब्रोकरेज कंपनी नोमुरा का कहना है कि सरकार का सबसे बड़ा ध्यान देश की आर्थिक हालत को मजबूत और स्थिर रखने पर रहेगा। बजट में सरकार ज्यादा पैसा बांटने या खर्च बढ़ाने के बजाय सुधारों पर जोर दे सकती है। इसके तहत PLI स्कीम को आगे बढ़ाया जा सकता है, छोटे कारोबारियों (एमएसएमई) और निर्यात करने वालों को मदद मिल सकती है और कुछ नियम आसान किए जा सकते हैं। कुछ खास सेक्टरों को टैक्स में राहत, रक्षा क्षेत्र में ज्यादा खर्च और कस्टम ड्यूटी को सरल बनाने जैसे कदम भी लिए जा सकते हैं। नोमुरा को यह भी उम्मीद है कि सरकार FY27 में घाटे की जगह कर्ज को कम करने पर ज्यादा ध्यान देगी और कोशिश करेगी कि सरकारी कर्ज जीडीपी का करीब 55 फीसदी रह जाए।

Morgan Stanley का आकलन

मॉर्गन स्टैनली के मुताबिक, बजट 2026 में सरकार सड़कों, रेल, रक्षा और सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कामों पर ज्यादा पैसा खर्च कर सकती है। कंपनी को उम्मीद है कि रक्षा क्षेत्र का खर्च 12 से 15 फीसदी तक बढ़ सकता है, जबकि कोर इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च में 8 से 10 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। बाजार यह भी देखेगा कि सरकार घाटा कितना काबू में रखती है और शेयर बाजार से जुड़े कौन से नए सुधार लाती है, जिससे विदेशी निवेशक फिर से भारत में पैसा लगाएं।

Bank of America (BofA) की उम्मीदें

बोफा सिक्योरिटीज के अनुसार, वित्त मंत्रालय घाटा कम करने के अपने लक्ष्य की ओर सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। FY27 से सरकार कर्ज को संभालकर रखने वाली नीति पर ज्यादा ध्यान दे सकती है। ब्रोकरेज का मानना है कि सरकार अपने कर्ज को देश की कमाई (जीडीपी) के करीब 55 फीसदी तक रखने का लक्ष्य तय कर सकती है।

कमाई के मामले में, इनकम टैक्स से ठीक-ठाक बढ़ोतरी, जीएसटी से थोड़ा ज्यादा पैसा, आरबीआई से मिलने वाला बड़ा डिविडेंड और सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने (डिसइन्वेस्टमेंट) से सरकार की आय बढ़ सकती है। खर्च की बात करें तो सरकार रक्षा, रेलवे के कुछ खास कामों और शिपबिल्डिंग जैसे जरूरी और रणनीतिक क्षेत्रों पर ज्यादा पैसा खर्च कर सकती है।

ICICI Securities की सोच

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज का कहना है कि बजट FY27 में सरकार खर्च को काबू में रखेगी और देश के विकास से जुड़े कामों पर ज्यादा ध्यान देगी। खासकर मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर को आगे बढ़ाने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं, जिससे सरकार पर कर्ज का बोझ धीरे-धीरे कम हो सके। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि PLI और दूसरी सरकारी योजनाओं के जरिए ऑटो, रक्षा, सेमीकंडक्टर, दवा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अहम क्षेत्रों में भारत में ही ज्यादा सामान बनाया जाएगा।

Motilal Oswal Financial Services का नजरिया

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज का कहना है कि बजट 2026 में सरकार को घाटा काबू में रखने और विकास के लिए खर्च बढ़ाने के बीच संतुलन बनाना होगा। ब्रोकरेज के मुताबिक, FY27 में सरकार का पूंजीगत खर्च देश की कमाई (जीडीपी) का करीब 3.1 फीसदी हो सकता है। यह खर्च मुख्य रूप से रक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े उद्योग, दवा, बिजली और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में जाएगा। हालांकि, सरकारी बॉन्ड पर ज्यादा ब्याज और विदेशों की स्थितियों की वजह से ब्याज दरों में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद कम है।

First Published - January 19, 2026 | 8:02 AM IST

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