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Budget 2026: सरकार की तिजोरी में पैसा आता है कहां से?

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Budget 2026: सरकार अपने बजट के लिए टैक्स, नॉन-टैक्स रेवेन्यू और उधारी सहित विभिन्न स्रोतों से फंड जुटाती है।

Last Updated- January 19, 2026 | 3:16 PM IST
Union Budget 2026
Representative Image

Budget 2026: हर साल भारत सरकार देश की विकास योजनाओं और जनकल्याण कार्यक्रमों के लिए बजट पेश करती है। इस साल केंद्र सरकार का यूनियन बजट 2025-26 संसद में 1 फरवरी 2026, रविवार को पेश किया जाएगा। बजट पेश होने से पहले आर्थिक स्थिति का विस्तृत विवरण आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) 29 जनवरी 2026 को मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा।

लेकिन सरकार के पास यह पैसा कहां से आता है, यह जानना भी जरूरी है। बजट सिर्फ खर्चों की सूची नहीं है, बल्कि यह यह भी दिखाता है कि सरकार को खर्च उठाने के लिए कितनी और कहां से आय होगी। सरकार अपने फंड्स मुख्य रूप से चार स्रोतों से जुटाती है। इनमें टैक्स, नॉन-टैक्स रेवेन्यू, उधारी और अन्य कैपिटल रिसीट्स शामिल हैं।

टैक्स की अहमियत

सरकार का सबसे बड़ा आय स्रोत टैक्स है। टैक्स दो प्रकार के होते हैं, डायरेक्ट और इनडायरेक्ट। डायरेक्ट टैक्स में इनकम टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स शामिल हैं, जो सीधे व्यक्ति या कंपनियों की आय पर लगाए जाते हैं।

इनडायरेक्ट टैक्स वस्तुओं और सेवाओं पर लगाए जाते हैं। इसमें जीएसटी सबसे प्रमुख है। इसके अलावा पेट्रोल, डीजल और शराब जैसे उत्पादों पर उत्पाद शुल्क भी सरकार को महत्वपूर्ण आय देता है।

टैक्स प्रणाली सरकार को सिर्फ पैसा ही नहीं देती बल्कि यह आर्थिक असमानताओं को कम करने में भी मदद करती है।

नॉन-टैक्स रेवेन्यू से भी होती है कमाई

टैक्स के अलावा सरकार को नॉन-टैक्स रेवेन्यू से भी आय होती है। इसमें सरकारी सेवाओं की फीस, लाइसेंस शुल्क, जुर्माने और सरकारी कंपनियों से मिलने वाला डिविडेंड शामिल है। रेलवे, डाक विभाग, बैंक और अन्य सार्वजनिक उपक्रम सरकार को नियमित आय प्रदान करते हैं।
इसके अलावा प्राकृतिक संसाधनों जैसे कोयला, खनिज और स्पेक्ट्रम की नीलामी से भी फंड मिलता है। हालांकि यह टैक्स की तुलना में कम होता है, फिर भी बजट में इसका योगदान महत्वपूर्ण रहता है।

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उधारी से भी जुटता है पैसा

अगर सरकार की आमदनी खर्चों को पूरा नहीं कर पाती, तो वह उधारी का सहारा लेती है। इसके तहत सरकार बैंक, बीमा कंपनियों और आम जनता से सरकारी बॉन्ड के माध्यम से कर्ज लेती है। छोटी बचत योजनाएं भी इसमें अहम भूमिका निभाती हैं।

सरकार अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और विदेशी सरकारों से भी कर्ज ले सकती है। कभी-कभी सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर भी फंड जुटाए जाते हैं। इसे विनिवेश कहा जाता है।

इस तरह टैक्स, नॉन-टैक्स रेवेन्यू और उधारी से सरकार बजट तैयार करती है और देश के विकास तथा जनकल्याण की योजनाओं को आगे बढ़ाती है।

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First Published - January 19, 2026 | 3:04 PM IST

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