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विनिर्माण क्षमता बढ़ाएगा बजट, नागरिकों को आत्मनिर्भर बनने में मदद करेगा: FM सीतारमण

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निर्मला सीतारमण ने बजट के बारे में विस्तार से समझाते हुए कहा, 'बजट का जोर घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है।

Last Updated- February 12, 2026 | 10:40 PM IST
FM Nirmala Sitharaman

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को जोर देकर कहा कि आत्मनिर्भरता सरकार की आर्थिक रणनीति का मूल सिद्धांत बना हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 का उद्देश्य अर्थव्यवस्था में तेज विकास और कम मुद्रास्फीति के दुर्लभ दौर का लाभ उठाते हुए घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना है।

राज्य सभा में वित्त मंत्री ने वर्तमान व्यापक आर्थिक वातावरण को ‘गोल्डीलॉक्स मोमेंट’ बताया यानी यह निवेशकों और नीति निर्माताओं के लिए अनुकूल और आर्थिक रूप से संतुलित स्थिति है। उन्होंने कहा कि यह माहौल अचानक नहीं बल्कि, निरंतर प्रयास, सावधानीपूर्वक योजना और समय पर नीतिगत कार्रवाई की वजह से बना है।

निर्मला सीतारमण ने बजट के बारे में विस्तार से समझाते हुए कहा, ‘बजट का जोर घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है। इसके अलावा यह बजट देश के नागरिकों को आत्मनिर्भर बनने में भी मदद करेगा। जीवन को आसान बनाने, रोजगार सृजित करने, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और घरों की क्रय शक्ति मजबूत करने के उद्देश्य से किए गए उपाय इस दृष्टिकोण का हिस्सा हैं।’ उनके अनुसार, यह रणनीतिक कदम ऐसे समय उठाए गए हैं जब प्रमुख आर्थिक संकेतक अनुकूल बने हुए हैं।

वित्त मंत्री ने कहा, ‘राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी पहले अग्रिम अनुमानों के अनुसार, 2025-26 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि नॉमिनल वृद्धि लगभग 8 प्रतिशत के स्तर पर बने रहने की उम्मीद है। जबकि इस दौरान उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति लगभग 2 प्रतिशत तक नरम हो गई है और लगातार अधिकतर समय नियंत्रण में रही है।’

कल्याणकारी योजनाओं में व्यय में कटौती के विपक्ष के आरोप को खारिज करते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि राज्यों को किसी भी योजना के तहत मिलने वाले धन से वंचित नहीं किया गया है और न ही उनका धन रोका गया है। वित्तीय अनुशासन का मतलब अत्यधिक उधार लेना या धन आवंटन में कंजूसी नहीं होता है।

केंद्रीय बजट 2026-27 पर बहस का जवाब देते हुए सीतारमण ने पिछले दशक में खर्च के पैटर्न की तुलना करते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों में 14 सामाज कल्याण योजनाओं में केवल 37,000 करोड़ रुपये बचे रह गए। शेष धन खर्च हो गया, जबकि संप्रग शासन के दौरान विभिन्न योजनाओं के तहत आवंटित राशि में से 94,000 करोड़ रुपये बचे रह गए थे।

उन्होंने इन आलोचनाओं को भी खारिज कर दिया कि सरकार धन आवंटित किए बिना योजनाओं की घोषणा करती है। उन्होंने पिछली संप्रग सरकार के कार्यकाल के दौरान इस तरह के कई उदाहरण दिए। बढ़ते कर्ज को लेकर चिंताओं पर पलटवार करते हुए मंत्री ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर मगरमच्छ के आंसू बहाती है। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार अत्यधिक उधार नहीं लेती है।

वित्त मंत्री ने रेखांकित किया कि केंद्र का धन मुफ्त नकदी का पूल नहीं है, बल्कि नागरिकों की गाढ़ी कमाई का हिस्सा है, इसलिए इसका उपयोग बुद्धिमानी से किया जाना चाहिए। व्यक्तिगत आयकर संग्रह पर चिंताओं को दूर करते हुए उन्होंने कहा, ‘उच्च व्यक्तिगत आयकर संग्रह का मतलब यह नहीं है कि देश में मध्यम वर्ग को दबाया या कुचला जा रहा है।’ उन्होंने कहा, ‘देश में मध्यम वर्ग के किसी भी दमन का कोई सबूत नहीं है। इसके उलट आज मध्यम वर्ग का विस्तार हो रहा है।’

उन्होंने कहा कि बजट में उठाए गए कदम एक लचीला और आत्मनिर्भर भारत बनाने के संकल्प को दर्शाते हैं। उन्होंने राज्य सभा के सदस्यों से आग्रह किया कि वे बजट में घोषित योजनाओं में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए अपनी-अपनी राज्य सरकारों को प्रोत्साहित करें।हर्ष कुमार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को जोर देकर कहा कि आत्मनिर्भरता सरकार की आर्थिक रणनीति का मूल सिद्धांत बना हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 का उद्देश्य अर्थव्यवस्था में तेज विकास और कम मुद्रास्फीति के दुर्लभ दौर का लाभ उठाते हुए घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना है।

राज्य सभा में वित्त मंत्री ने वर्तमान व्यापक आर्थिक वातावरण को ‘गोल्डीलॉक्स मोमेंट’ बताया यानी यह निवेशकों और नीति निर्माताओं के लिए अनुकूल और आर्थिक रूप से संतुलित स्थिति है। उन्होंने कहा कि यह माहौल अचानक नहीं बल्कि, निरंतर प्रयास, सावधानीपूर्वक योजना और समय पर नीतिगत कार्रवाई की वजह से बना है।

निर्मला सीतारमण ने बजट के बारे में विस्तार से समझाते हुए कहा, ‘बजट का जोर घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है। इसके अलावा यह बजट देश के नागरिकों को आत्मनिर्भर बनने में भी मदद करेगा। जीवन को आसान बनाने, रोजगार सृजित करने, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और घरों की क्रय शक्ति मजबूत करने के उद्देश्य से किए गए उपाय इस दृष्टिकोण का हिस्सा हैं।’ उनके अनुसार, यह रणनीतिक कदम ऐसे समय उठाए गए हैं जब प्रमुख आर्थिक संकेतक अनुकूल बने हुए हैं।

वित्त मंत्री ने कहा, ‘राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी पहले अग्रिम अनुमानों के अनुसार, 2025-26 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि नॉमिनल वृद्धि लगभग 8 प्रतिशत के स्तर पर बने रहने की उम्मीद है। जबकि इस दौरान उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति लगभग 2 प्रतिशत तक नरम हो गई है और लगातार अधिकतर समय नियंत्रण में रही है।’

कल्याणकारी योजनाओं में व्यय में कटौती के विपक्ष के आरोप को खारिज करते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि राज्यों को किसी भी योजना के तहत मिलने वाले धन से वंचित नहीं किया गया है और न ही उनका धन रोका गया है। वित्तीय अनुशासन का मतलब अत्यधिक उधार लेना या धन आवंटन में कंजूसी नहीं होता है।

केंद्रीय बजट 2026-27 पर बहस का जवाब देते हुए सीतारमण ने पिछले दशक में खर्च के पैटर्न की तुलना करते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों में 14 सामाज कल्याण योजनाओं में केवल 37,000 करोड़ रुपये बचे रह गए। शेष धन खर्च हो गया, जबकि संप्रग शासन के दौरान विभिन्न योजनाओं के तहत आवंटित राशि में से 94,000 करोड़ रुपये बचे रह गए थे।

उन्होंने इन आलोचनाओं को भी खारिज कर दिया कि सरकार धन आवंटित किए बिना योजनाओं की घोषणा करती है। उन्होंने पिछली संप्रग सरकार के कार्यकाल के दौरान इस तरह के कई उदाहरण दिए। बढ़ते कर्ज को लेकर चिंताओं पर पलटवार करते हुए मंत्री ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर मगरमच्छ के आंसू बहाती है। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार अत्यधिक उधार नहीं लेती है।

वित्त मंत्री ने रेखांकित किया कि केंद्र का धन मुफ्त नकदी का पूल नहीं है, बल्कि नागरिकों की गाढ़ी कमाई का हिस्सा है, इसलिए इसका उपयोग बुद्धिमानी से किया जाना चाहिए। व्यक्तिगत आयकर संग्रह पर चिंताओं को दूर करते हुए उन्होंने कहा, ‘उच्च व्यक्तिगत आयकर संग्रह का मतलब यह नहीं है कि देश में मध्यम वर्ग को दबाया या कुचला जा रहा है।’ उन्होंने कहा, ‘देश में मध्यम वर्ग के किसी भी दमन का कोई सबूत नहीं है। इसके उलट आज मध्यम वर्ग का विस्तार हो रहा है।’

उन्होंने कहा कि बजट में उठाए गए कदम एक लचीला और आत्मनिर्भर भारत बनाने के संकल्प को दर्शाते हैं। उन्होंने राज्य सभा के सदस्यों से आग्रह किया कि वे बजट में घोषित योजनाओं में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए अपनी-अपनी राज्य सरकारों को प्रोत्साहित करें।

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First Published - February 12, 2026 | 10:38 PM IST

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