भारत ने अपने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की आज नई श्रृंखला जारी की जो खुदरा महंगाई को मापने वाला पैमाना है। वर्ष 2024 के आधार वर्ष के साथ जारी अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की नई श्रृंखला के तहत जनवरी में खुदरा मुद्रास्फीति 2.75 फीसदी रही।
नई श्रृंखला में ज्यादा सामान और सेवाएं शामिल हैं और अलग-अलग चीजों का भार नए सिरे से तय किया गया है। इसके तहत ग्रामीण और शहरी बाजारों से ज्यादा आंकड़े जुटाए जाएंगे। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी नई श्रृंखला में मूल्य स्थिति की बेहतर तस्वीर पेश करने के लिए वस्तुओं की संख्या 259 से बढ़ाकर 308 तथा सेवाओं की संख्या 40 से बढ़ाकर 50 की गई है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मौद्रिक नीति तय करते समय खुदरा मुद्रास्फीति को ध्यान में रखता है। आरबीआई ने बीते हफ्ते अगले वित्त वर्ष के लिए महंगाई का अनुमान नहीं दिया था और नई श्रृंखला जारी होने का इंतजार करने का निर्णय किया था।
नई श्रृंखला जारी होने के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कहा कि नई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक श्रृंखला मौद्रिक और राजकोषीय नीतियों को तैयार करने में उपयोग किए जाने वाले आंकड़ों की गुणवत्ता में सुधार करेगी।
उन्होंने कहा कि खुदरा मुद्रास्फीति की नई श्रृंखला नीति निर्माताओं को वास्तविक आय, उपभोग के रुझान और खरीद क्षमता का आकलन करने के लिए अधिक सटीक और नया आधार प्रदान करती है। जनवरी में नई श्रृंखला पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति 2.75 फीसदी रही। इसमें खाद्य मुद्रास्फीति 2.13 फीसदी और आवासीय मुद्रास्फीति 2.05 फीसदी रही। 2012 आधार वर्ष वाली पुरानी श्रृंखला के तहत खुदरा मुद्रास्फीति जनवरी 2025 में 4.26 फीसदी और दिसंबर में 1.33 फीसदी थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक जनवरी के दौरान ग्रामीण इलाकों में हेडलाइन मुद्रास्फीति 2.73 फीसदी और शहरी क्षेत्र में 2.77 फीसदी रही। तेलंगाना में महंगाई सबसे ज्यादा 4.92 फीसदी थी, उसके बाद केरल और तमिलनाडु रहा।
परिवार का खपत व्यय सर्वेक्षण 2023-24 का इस्तेमाल करके आधार वर्ष को 2012 से बदलकर 2024 कर दिया गया है। नई श्रृंखला के तहत अब कीमतों के आंकड़े 1,465 ग्रामीण और 1,395 शहरी बाजारों के साथ-साथ 12 ऑनलाइन मार्केटप्लेस से जुटाए जाएंगे। नई श्रृंखला में 6 से बढ़ाकर 12 समूह कर दिए गए हैं।
नागेश्वरन ने कहा कि नई श्रृंखला में खाद्य समूह का भार 2012 की खुदरा मुद्रास्फीति में 45.86 फीसदी था जिसे अब घटाकर 36.75 फीसदी कर दिया गया है। हाउसिंग जिसमें अब यूटिलिटी भी शामिल हैं, का भार 17.67 फीसदी रखा गया है। पान, तंबाकू और नशीले पदार्थों का भार बढ़कर 2.99 फीसदी हो गया जबकि कपड़े और जूते-चप्पल का भार घटकर 2.38 फीसदी रह गया। नागेश्वरन ने कहा कि खाद्य और पेय पदार्थों के समूह का कम भार हेडलाइन मुद्रास्फीति दर में ज्यादा उतार-चढ़ाव को सीमित कर सकता है।