Bharat Bandh Today: देशभर में आज यानी 12 फरवरी को विभिन्न केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर ‘भारत बंद’ किया जा रहा है। 10 केंद्रीय श्रमिक संगठनों के संयुक्त मंच ने इस हड़ताल का ऐलान किया है। कई किसान संगठनों ने भी इस बंद को समर्थन दिया है। यह प्रदर्शन चार नए श्रम संहिताओं (New Labour Codes) और भारत-अमेरिका के प्रस्तावित व्यापार समझौते के विरोध में आयोजित किया जा रहा है।
क्यों हो रहा है विरोध?
श्रमिक संगठनों का कहना है कि सरकार द्वारा लागू किए गए चार नए श्रम संहिता कानूनों ने पुराने 29 श्रम कानूनों की जगह ली है, लेकिन इससे कर्मचारियों के अधिकार कमजोर हुए हैं। उनका आरोप है कि इन प्रावधानों से कंपनियों को कर्मचारियों की नियुक्ति और छंटनी में ज्यादा छूट मिल जाएगी, जिससे नौकरी की सुरक्षा पर असर पड़ेगा।
ट्रेड यूनियनों ने निजीकरण की बढ़ती प्रक्रिया, मजदूरी में धीमी बढ़ोतरी और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर भी गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इन नीतियों का असर श्रमिकों के अधिकारों और उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है।
इस आंदोलन में सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU), ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC), इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC), हिंद मजदूर सभा (HMS), ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (AICCTU), लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (LPF) और यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (UTUC) समेत कई प्रमुख संगठन शामिल हैं।
श्रम संहिताओं के विरोध के साथ-साथ यूनियनों ने केंद्र सरकार से ड्राफ्ट सीड बिल, बिजली संशोधन विधेयक और ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया’ यानी शांति अधिनियम को वापस लेने की भी मांग की है। उनका कहना है कि इन प्रस्तावित कानूनों का व्यापक प्रभाव किसानों, कर्मचारियों और आम नागरिकों पर पड़ सकता है।
यूनियनों की मांग है कि सरकार ड्राफ्ट सीड बिल, बिजली संशोधन विधेयक और शांति अधिनियम को वापस ले। साथ ही मनरेगा को पहले की तरह मजबूत करने और Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin), VB-G RAM G, Act, 2025 को रद्द करने की भी मांग की जा रही है।
किसानों का समर्थन
संयुक्त किसान मोर्चा और अखिल भारतीय किसान सभा जैसे संगठनों ने भी भारत बंद को समर्थन दिया है। किसानों का कहना है कि भारत-अमेरिका के अंतरिम व्यापार समझौते से देश की कृषि और किसानों के हित प्रभावित हो सकते हैं।
संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने आरोप लगाया है कि यह समझौता किसानों के हितों के खिलाफ है और सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।
किन सेवाओं पर पड़ सकता है असर?
सरकारी बैंकों की सेवाओं पर आंशिक असर पड़ सकता है क्योंकि कई बैंक कर्मचारी और अधिकारी संगठन भी हड़ताल में शामिल हो रहे हैं। भारतीय स्टेट बैंक सहित कुछ बैंकों ने ग्राहकों को पहले ही संभावित व्यवधान की सूचना दी है। हालांकि 12 फरवरी को आधिकारिक बैंक अवकाश घोषित नहीं किया गया है। शाखाएं खुली रह सकती हैं, लेकिन कामकाज धीमा हो सकता है।
कुछ राज्यों में सार्वजनिक परिवहन प्रभावित हो सकता है। प्रदर्शन और जाम की वजह से बस, टैक्सी और स्थानीय यातायात सेवाओं में बाधा आ सकती है। कुछ बाजार और दुकानें भी एहतियातन बंद रह सकती हैं।
सरकारी दफ्तरों में भी उपस्थिति कम रहने की संभावना है, जिससे कामकाज प्रभावित हो सकता है।
क्या रहेगा चालू?
अस्पताल, एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से चलने की उम्मीद है। हवाई अड्डों और आवश्यक सेवाओं के संचालन पर फिलहाल किसी बड़े व्यवधान की सूचना नहीं है।
हालांकि यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे घर से समय से पहले निकलें और संभावित ट्रैफिक जाम को ध्यान में रखते हुए अपनी यात्रा की योजना बनाएं।
कुल मिलाकर, भारत बंद का असर अलग-अलग राज्यों में स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है। लोगों को स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करने और जरूरी काम पहले से निपटाने की सलाह दी गई है।