वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि सरकार ने पूंजीगत व्यय के लिए जो 17 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया है उससे ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को पाने में तेजी आएगी और एक बार जब सरकार यह पैसा खर्च करेगी तो इससे कई और फायदे होंगे।
निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में बजट पर सामान्य चर्चा का जवाब देते हुए कहा, ‘सरकार की रणनीति यह है कि विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए अर्थव्यवस्था में ज्यादा से ज्यादा निवेश किया जाए। इसलिए सरकार ने 17.15 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया है। इससे कई फायदे होंगे और हम जल्द ही विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।’
हालांकि सरकार ने वित्त वर्ष 2027 में पूंजीगत व्यय के रूप में 12.22 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए हैं लेकिन राज्यों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को किए जाने वाले पूंजी हस्तांतरण सहित प्रभावी पूंजीगत व्यय 17.15 लाख करोड़ रुपये है, जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.4 प्रतिशत है।
बुनियादी ढांचा तैयार करने पर सरकार के लगातार ध्यान देने के बारे में निर्मला सीतारमण ने कहा कि केंद्र न केवल राष्ट्रीय राजमार्ग पर ध्यान दे रही है बल्कि जलमार्गों पर भी ध्यान दिया जा रहा है ताकि देश में लॉजिस्टिक्स की लागत कम हो सके। उन्होंने आगे कहा, ‘ऐसे राज्य जो सुदूर इलाकों में हैं और किसी भी समुद्री बंदरगाह से नहीं जुड़े हैं, उन्हें तेजी से कम लागत पर सामान ले जाने का फायदा मिलेगा।’
निर्मला सीतारमण ने कहा कि वित्त वर्ष 2027 का बजट 21वीं सदी के इस हिस्से का पहला बजट है, इसलिए सरकार ने कुछ ऐसे निवेश किए गए हैं जिनका फायदा लंबे समय बाद मिलेगा। उन्होंने कहा, ‘बायो-फार्मा शक्ति में हमने इस बात पर जोर दिया कि इसमें बीमारियों से लड़ने के लिए बायोसिमिलर दवाइयां समाधान हो सकती हैं। ये दवाइयां उन बीमारियों के लिए हैं जो बहुत धीरे-धीरे बढ़ती हैं और जानलेवा साबित हो सकती हैं। हम इन दवाइयों को बनाने में निवेश कर रहे हैं ताकि कुछ वर्षों बाद भारत इस मामले में सबसे आगे रहे। इसीलिए इस बजट में हमने बायोफार्मा में रिसर्च के लिए प्रावधान किया है और यह सुनिश्चित किया है कि हम बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर में सबसे आगे रहें।’
उन्होंने आगे कहा कि इसी सोच के साथ सरकार ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की शुरुआत की।
कार्बन कैप्चर उपयोगिता, भंडारण से जुड़ी तकनीक के लिए योजना पर जोर देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि ये 2070 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने का एक बहुत महत्वपूर्ण तरीका है। उन्होंने कहा, ‘एक रणनीति के तौर पर भी इससे जुड़ी तकनीक और इसे करने के तरीके अभी विकसित हो रहे हैं लेकिन हमने इसमें निवेश किया है ताकि हम इसमें अग्रणी बन सकें।’
श्रम आधारित क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए सरकार के प्रयासों पर निर्मला सीतारमण ने कहा कि इसका उद्देश्य न केवल उन्हें अधिक संसाधनों के साथ मजबूत करना है बल्कि विरासत वाले उद्योगों का भी पुनरुद्धार करना है जो लंबे समय से कायाकल्प का इंतजार कर रहे हैं और अब उन्हें फंड दिया जा रहा है। प्रमुख एमएसएमई से जुड़ी बजट घोषणाओं का हवाला देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार मध्यम आकार के उद्योगों का समर्थन करेगी जिनमें वृद्धि करने, निर्यात करने और अपने क्षेत्रों में अग्रणी बनने की क्षमता है। उन्होंने आगे कहा, ‘मैंने समान रूप से मदद देने, पेशेवर और यह सुनिश्चित करने के लिए कई कदमों की घोषणा की है कि उनके पास नकदी होगी और वे भारत की विकास यात्रा में हिस्सा लेंगे।’
भारत को मेडिकल टूरिज्म के केंद्र के रूप में बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाए जा रहे पांच क्षेत्रीय मेडिकल केंद्र के बारे में बात करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि उन्होंने इसके लिए किसी भी राज्य का नाम नहीं लिया है और राज्य पीएम गति शक्ति के मानदंडों को पूरा करके इन केंद्रों की मेजबानी करने की इच्छा रख सकते हैं। इन मेडिकल टूरिज्म केंद्र में मेडिकल शिक्षा और मरीजों के इलाज से जुड़े सभी पहलुओं को एक साथ जोड़ा जा सकता है।
सांसद एनके प्रेमचंद्रन द्वारा एफआरबीएम अधिनियम में संशोधन किए बिना केंद्र सरकार द्वारा ऋण- सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) अनुपात को राजकोषीय समर्थन के रूप में अपनाने के मुद्दे पर निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह कोई नया लक्ष्य नहीं है। उन्होंने आगे कहा, ‘राजकोषीय घाटे के साथ-साथ ऋण-जीडीपी अनुपात को 2018 में एफआरबीएम अधिनियम में संशोधन के माध्यम से पहले से ही एक लक्ष्य के रूप में शामिल किया गया है।’