स्थानीय मुद्रा में व्यापार का 16 साल पुराना सपना अब भी अधूरा, नई दिल्ली घोषणा पत्र में नहीं मिली जगह
ब्रिक्स देशों की भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने, जिसमें केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा यानी सीबीडीसी की संभावित इंटरऑपरेबिलिटी भी शामिल है, के भारत के प्रयास को समूह की नई दिल्ली घोषणा पत्र में जगह नहीं मिल पाई। इस वजह से स्थानीय मुद्रा में व्यापार करने की 16 साल पुरानी कोशिश के लिए अभी भी […]
‘टैरिफ व संरक्षणवाद वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा’, ब्रिक्स देशों ने कहा: ये WTO नियमों के खिलाफ
ब्रिक्स देशों के वित्त मंत्रियों ने अमेरिका पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए शुल्क और संरक्षणवाद से पैदा हुए जोखिमों पर गंभीर चिंता जताई। यह बयान अमेरिका द्वारा व्यापार और वित्त संबंधी एकतरफा उपायों के संदर्भ में आया है, जिसमें ऊंचे शुल्क और शुल्क के अलावा दूसरी बाधाएं शामिल हैं। […]
1991 के आर्थिक सुधार अचानक नहीं आए थे, 1970 के दशक में ही बन गई थी बदलाव की जमीन: नितिन देसाई
नितिन देसाई वर्ष 1988 से वर्ष 1989 तक मुख्य आर्थिक सलाहकार थे। यह वह दौर था जब आर्थिक सुधारों पर चर्चा जोर पकड़ने लगी थी। हालांकि, भारतीय अर्थव्यवस्था उदार बनाने की औपचारिक प्रक्रिया वर्ष 1991 में पी वी नरसिंह राव सरकार ने शुरू की। असित रंजन मिश्र ने देसाई से टेलीफोन पर लंबी बात की। […]
सम्मेलन से पहले ब्रिक्स देशों ने भारत की व्यापार नीति पर उठाए सवाल, चीन-इंडोनेशिया ने की पारदर्शिता की मांग
भारत इस सप्ताहांत नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की तैयारी कर रहा है। मगर इस बीच विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) द्वारा भारत की व्यापार नीतियों की हालिया समीक्षा में संभावित तनाव की बात सामने आई है। दरअसल ब्रिक्स में शामिल कुछ देश चाहते हैं कि भारत अपनी व्यापार व्यवस्था को ज्यादा अनुमानित […]
भारत की व्यापार नीतियों पर अमेरिका-EU ने जताई चिंता, टैरिफ और नियमों में बदलाव की मांग
भारत के दो सबसे बड़े व्यापार साझेदार अमेरिका और यूरोपीय संघ ने कई नियामकीय एवं गैर-शुल्क बाधाओं की ओर इशारा करते हुए चिंता जताई है। उनका कहना है कि ये बाधाएं भारत की अर्थव्यवस्था को खोलने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ जुड़ने के प्रयासों से होने वाले फायदों को कम कर रही हैं। विश्व […]
GDP वृद्धि को लेकर 7.8 और 2.6 फीसदी की तुलना बेतुकी : करंदीकर
फरवरी में वित्त वर्ष 2022-23 के लिए नई जीडीपी श्रृंखला जारी होने के समय राजीव लक्ष्मण करंदीकर राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) के अध्यक्ष थे, जिनका कार्यकाल जून में समाप्त हुआ। असित रंजन मिश्र के साथ टेलीफोन पर बातचीत में करंदीकर ने कहा कि पारदर्शिता और आंकड़ों पर भरोसा दोतरफा राह की तरह है। संपादित अंश: […]
उदारीकरण के 35 साल: 1991 संकट से बैंकिंग सुधार तक, आरबीआई के पूर्व डिप्टी गवर्नर ने सुनाई सुधारों की कहानी
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के पूर्व चेयरमैन सी. रंगराजन जुलाई 1991 में आर्थिक सुधारों की शुरुआत करने वाली टीम के प्रमुख सदस्यों में शामिल थे। उस समय आरबीआई के डिप्टी गवर्नर के रूप में उन्होंने 1 और 3 जुलाई को रुपये के दो चरणों में किए […]
व्यापार असंतुलन और वित्तीय साक्षरता पर भारत ने अमेरिका के रुख का किया समर्थन
भारत ने जी-20 फाइनैंस ट्रैक के एक प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें अतिरिक्त और लगातार बाहरी अधिशेष वाले देशों से घरेलू दबाव दूर करने का आह्वान किया गया है, जिसकी वजह से खपत बाधित होती है और निर्यात पर बहुत ज्यादा निर्भरता बढ़ जाती है। बहरहाल चीन की आपत्ति के कारण जी-20 देश इस […]
सभी अनुमानों को पीछे छोड़ 7.8% की तेजी से बढ़ी GDP, मजबूत मांग व निवेश से अर्थव्यवस्था को मिला सहारा
अधिकांश अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 7.8 फीसदी की मजबूत दर से बढ़ी। पिछले वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 8.6 फीसदी थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा आज जारी आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न भू-राजनीतिक चुनौतियों के […]
उदारीकरण के 35 साल: अधूरे सुधारों से औद्योगीकरण को नहीं मिला बढ़ावा, रणनीतिक नीति जरूरी
1991 के आर्थिक सुधार तत्कालीन सरकारों द्वारा संकट प्रबंधन के प्रयासों का परिणाम थे। यह कहना है दीपक नैयर का। नैयर वीपी सिंह, चंद्रशेखर और पी वी नरसिंह राव के नेतृत्व वाली सरकारों के दौरान वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार थे। उनका कहना है कि राव सरकार ने जरूरी राजकोषीय बदलाव कर लिए, उसके […]









