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नया सीपीआई ढांचागत रूप से कम अस्थिर: प्रणव सेन 

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प्रणव सेन ने कहा कि पीडीएस वस्तुओं को सीपीआई से बाहर रखना सही है क्योंकि मुफ्त चीजें आय नहीं, उपभोग बढ़ाती हैं।

Last Updated- February 12, 2026 | 10:30 PM IST
pranab sen

भारत के पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद प्रणव सेन ने असित रंजन मिश्र के साथ टेलीफोन पर हुई बातचीत में नई सीपीआई श्रृंखला पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि पीडीएस वस्तुओं को सीपीआई से बाहर रखना सही है क्योंकि मुफ्त चीजें आय नहीं, उपभोग बढ़ाती हैं। इनको शामिल करने से दोहरी गणना होगी। बातचीत के प्रमुख अंश..

नई सीपीआई श्रृंखला पर आपके क्या विचार हैं?

यह एक जरूरी और अपेक्षित कदम है। सीपीआई बनाना आसान नहीं है। सबसे पहले, उपभोक्ता व्यय सर्वे से वस्तुओं की सूची और उनका महत्व पता चलता है। फिर, बाजार सर्वेक्षण करके हर वस्तु की सबसे ज्यादा बिकने वाली किस्मों का पता लगाया जाता है जैसे कोलगेट का 100 ग्राम का पैकेट। इतनी बारीकी मुश्किल है, लेकिन जरूरी है। ऐसे में पुरानी सूची से कुछ वस्तुएं हट सकती हैं और नई वस्तुएं शामिल हो सकती हैं, क्योंकि लोगों की आमदनी बढ़ने से खर्च करने के तरीके बदल जाते हैं। इस बार सूची पहले से बड़ी है, क्योंकि यह 12 साल बाद अपडेट हो रहा है। यह काम हर पांच साल में होना चाहिए।

क्या सार्वजनिक वितरण प्रणाली की मुफ्त वस्तुओं को सीपीआई से बाहर रखना सही है?

मुफ्त पीडीएस वस्तुओं को बाहर रखना सही है, क्योंकि मुफ्त चीजें आय नहीं, उपभोग बढ़ाती हैं। इन्हें शामिल करने से दोहरी गिनती होगी।

भोजन व पेय पदार्थों का भार कम है, इसका क्या अर्थ है?

हमारे पास खाद्य कीमतों में अधिक अस्थिरता रही है। इसलिए संरचनात्मक रूप से, इस नई श्रृंखला को इस अर्थ में संभालना बहुत आसान होगा कि अस्थिरता कम है। ऐसे में अनुमान लगाना आसान है।

महंगाई और मौद्रिक नीति के संदर्भ में इसके क्या मायने हैं?

महंगाई दर में थोड़ी वृद्धि हुई है। लेकिन यह आरबीआई की लक्षित सीमा से ऊपर नहीं गया है। अब आरबीआई एक साल आगे का अनुमान लगा सकता है, जिसके बाद ही कोई फैसला होगा। अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

महंगाई लक्ष्य को लेकर रिजर्व बैंक को क्या करने की जरूरत है?

पहले इस पर बड़ी बहस हुई थी। मेरा मानना था कि मुख्य सीपीआई पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि भोजन और ईंधन की कीमतें आपूर्ति पक्ष के कारकों से प्रभावित होती रही हैं न कि मांग पक्ष के कारकों से। अब मैं इसको लेकर आश्वस्त नहीं हूं।

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First Published - February 12, 2026 | 10:24 PM IST

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