रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) ने गुरुवार को विभिन्न युद्धक उपकरणों की खरीद को सैद्धांतिक मंजूरी दी। इसमें फ्रांस निर्मित राफेल लड़ाकू विमान और अमेरिकी निर्मित समुद्री विमान शामिल हैं।
रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि परिषद ने तीनों सेनाओं से आए विभिन्न प्रस्तावों को ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (तकनीकी शब्दावली) की मंजूरी दी है, जिनकी अनुमानित कीमत 3.60 लाख करोड़ रुपये है।
हालांकि बयान में विमानों और अन्य उपकरणों की संख्या का उल्लेख नहीं किया गया लेकिन सूत्रों ने बताया कि भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने अपने स्क्वाड्रन की ताकत बढ़ाने के लिए 114 राफेल जेट खरीदने का प्रस्ताव रखा है, और भारतीय नौसेना ने अपने मौजूदा 12 विमानों के बेड़े में छह अतिरिक्त पी-8आई समुद्री विमान शामिल करने की मांग की है। मुख्य रक्षा खरीद पर अंतिम निर्णय कैबिनेट सुरक्षा समिति (सीसीएस) लेती है।
डीएसी ने आईएएफ को फ्रांसीसी कंपनी दसॉ से बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान (एमआरएफए) खरीदने की मंजूरी दी। सूत्रों के मुताबिक 114 विमानों की लागत लगभग 30 अरब यूरो (2.70 लाख करोड़ रुपये) होगी। यह स्पष्ट नहीं है कि अनुबंध पर हस्ताक्षर कब होंगे, लेकिन 17-19 फरवरी तक फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान इसके संकेत मिलने की उम्मीद है।
बयान में कहा गया कि इन विमानों की खरीद से हवाई वर्चस्व वाली भूमिकाओं को निभाने की क्षमता बढ़ेगी और लंबी दूरी के आक्रामक हमलों के साथ वायु सेना की प्रतिरोधक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। अधिकांश एमआरएफए भारत में ही निर्मित किए जाएंगे।
इससे पहले सूत्रों ने कहा था कि भविष्य में फ्रांस से भारत को प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण और भारत में संयुक्त सुविधाओं की स्थापना हो सकती है। यह भी कहा गया था कि राफेल जेट्स में स्वदेशी हथियार लगाए जाएंगे।
डीएसी गुरुवार को युद्धक मिसाइलों और एयर-शिप आधारित हाई-एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट्स (एएस – एचएपीएस), यानी उच्च ऊंचाई वाले सैटेलाइट्स के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी। भारतीय वायुसेना को फ्रांस निर्मित लंबी दूरी की हवा से सतह में मार करने वाली स्कैल्प मिसाइलों का भंडार प्राप्त करने की अनुमति मिली। स्वदेशी मिसाइलों के अलावा, भारत ने पिछले वर्ष पाकिस्तान के साथ संघर्ष के दौरान स्कैल्प का उपयोग किया था।
बयान में कहा गया कि कॉम्बैट मिसाइलें स्टैंड-ऑफ ग्राउंड अटैक क्षमता को गहराई तक मारक शक्ति और अत्यधिक सटीकता के साथ बढ़ा देंगी। यह भी कहा गया कि एएस-एचएपीएस का उपयोग लगातार खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही, इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस, दूरसंचार और सैन्य उद्देश्यों के लिए रिमोट-सेंसिंग में किया जाएगा। डीएसी ने भारतीय नौसेना के अमेरिकी निर्मित पी-8आई लंबी दूरी के समुद्री टोही विमान के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। यद्यपि अमेरिका की सरकार पहले ही भारत को छह पी-8आई विमान बेचने की अनुमति दे चुकी थी, लेकिन यह लंबित व्यापार वार्ता पर निर्भर होगा कि भारत-अमेरिका संबंध किस दिशा में जाते हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने पिछले वर्ष की शुरुआत में कहा था कि वे चाहते हैं कि भारत अरबों डॉलर मूल्य की अमेरिकी रक्षा सामग्री खरीदे। बयान में कहा गया कि पी – 8 आई विमान की खरीद से नौसेना की लंबी दूरी की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता, समुद्री निगरानी और समुद्री हमले की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। परिषद ने नौसेना के लिए 04 मेगावाट समुद्री गैस टरबाइन-आधारित विद्युत शक्ति जनरेटरों के खरीद को मंजूरी दी है। इन्हें रक्षा खरीद प्रक्रिया 2020 की मेक-आई श्रेणी के अंतर्गत स्वीकृत किया गया है, ताकि विदेशी निर्माताओं पर निर्भरता कम की जा सके।
भारतीय सेना के जिन प्रस्तावों को परिषद ने गुरुवार को मंजूरी दी, उनमें ऐंटी-टैंक माइंस (विभव) की खरीद और आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल्स (एआरवी), टी-72 टैंक और इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स (बीएमपी-2) का उन्नयन शामिल है।
बयान में कहा गया कि विभव माइंस को ऐंटी-टैंक बाधा प्रणाली के रूप में बिछाया जाएगा, ताकि शत्रु की प्रगति को रोका जा सके। साथ ही, एआरवी, टी-72 टैंकों और बीएमपी-2 वाहन प्लेटफॉर्मों की ओवरहॉलिंग से उपकरणों की सेवा आयु बढ़ेगी, जिससे सेना की तत्परता और परिचालन क्षमता सुनिश्चित होगी। परिषद ने भारतीय तटरक्षक बल के वास्ते डॉर्नियर विमान के लिए हेतु प्रणालियों की खरीद को भी मंजूरी दी है, जिनका उद्देश्य समुद्री निगरानी को सुदृढ़ करना है।