आईटी शेयरों में बिकवाली का दबाव बना हुआ है और निफ्टी आईटी सूचकांक आज कारोबार के दौरान 6 फीसदी टूटकर 33,058.20 पर आ गया। आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) में तेजी से विकास के बीच पारंपरिक आईटी कंपनियों के कारोबारी मॉडल पर असर पड़ने की चिंता से आईटी शेयरों में गिरावट देखी जा रही है।
निफ्टी आईटी सूचकांक 9 महीने के निचले स्तर पर आ गया। इस बीच सेंसेक्स में 559 अंक और निफ्टी में 147 अंक की गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 558.72 अंक टूटकर 83,675 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 716.97 अंक तक लुढ़क गया था। निफ्टी भी 146.65 अंक के नुकसान साथ 25,807 पर बंद हुआ।
कारोबार की समाप्ति पर निफ्टी आईटी 5.5 फीसदी नुकसान के साथ 33,160.20 पर बंद हुआ। इस महीने दो बार सूचकांक 5 फीसदी से ज्यादा टूटा है। 4 फरवरी को इसमें 5.9 फीसदी की गिरावट आई थी।
उद्योग के विशेषज्ञों ने कहा कि यह बिकवाली कारोबार की संभावनाओं में किसी बुनियादी बदलाव के बजाय बढ़े हुए मूल्यांकन में गिरावट को दिखाती है।
अनअर्थइनसाइट्स के संस्थापक और सीईओ गौरव वासु ने कहा कि भारत में बिकवाली अमेरिकी बाजार के रुझान को दिखाती है। उन्होंने कहा, ‘एंथ्रोपिक असर के अलावा अमेरिका में फेडरल रिजर्व का नया प्रमुख आने की उम्मीद है। रोजगार के मोर्चे पर अनुमान है कि प्रौद्योगिकी क्षेत्र में ज्यादा नौकरियां नहीं आएंगी।’
सूचकांक में शामिल टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, कोफोर्ज, ऑरेकल फाइनैंशियल और एलटीमाइंडट्री के शेयर में 6 से 7 फीसदी की गिरावट आई। टीसीएस, विप्रो, साएंट और हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज अपने-अपने 52 हफ्ते के निचले स्तर पर आ गए।
सूचकांक से इतर आईटी क्षेत्र की कंपनियों सोनाटा सॉफ्टवेयर, केवीआईटी टेक, बिड़ला सॉफ्ट और जेनसर टेक में भी 6 से 8 फीसदी की गिरावट देखी गई। पिछले दो दिनों में निफ्टी आईटी सूचकांक में 7 फीसदी की गिरावट आई और बीते सात सत्रों में यह 14 फीसदी लुढ़क गया।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘ आज आईटी शेयरों में गिरावट अमेरिका में उम्मीद से बेहतर रोजगार के आंकड़ों की वजह से आई है। बेहतर रोजगार के आंकड़ों को देखते हुए फेडरल रिजर्व द्वारा दर में जल्द कटौती की उम्मीद कम हो गई है। इसके साथ ही एआई की वजह से होने वाली दिक्कतों को लेकर चल रही चिंताओं से भी आईटी क्षेत्र पर दबाव बढ़ा है।’
एवरेस्ट समूह के पार्टनर युगल जोशी ने कहा कि एआई को लेकर शोर-शराबा काफी ज्यादा है। ऐसे में वृद्धिशील बदलाव और वास्तविक बदलाव के बीच अंतर करना कठिन हो गया है। उन्होंने कहा, ‘क्लाउड कोवर्क व्यापक बदलाव लगता है। हालांकि एंटरप्राइज डेटा पर प्लगइन बनाना कोई नई बात नहीं है लेकिन आउटपुट की गुणवत्त अंतर पैदा कर सकती है। हालांकि प्रौद्योगिकी की दुनिया से जो निकलता है और उद्यम असल में जिसे अपनाते हैं, वह काफी अलग हो सकता है।’
कॉग्निजेंट के मुख्य कार्याधिकारी रवि कुमार ने पिछले हफ्ते कहा कि यह मानना गलत है कि नए एआई टूल को आसानी से कंपनियों में लगाया जा सकता है जिससे वे आईटी सेवाओं के काम के बड़े हिस्से को तुरंत बदल सकें।