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US में भारतीय टेक्सटाइल को मिल सकता है जीरो-ड्यूटी एक्सेस, बांग्लादेश पर बढ़त की तैयारी!

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वाणिज्य मंत्री ने संकेत दिया कि सेक्टर को बांग्लादेश जैसी जीरो-ड्यूटी अमेरिकी बाजार पहुंच मिल सकती है; उद्योग का कहना- कॉटन निर्यात और किसानों पर असर की आशंका कम

Last Updated- February 12, 2026 | 1:42 PM IST
textile
Representational Image

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिया है कि भारत को अमेरिका में टेक्सटाइल के लिए जीरो-ड्यूटी (शून्य शुल्क) एक्सेस मिल सकता है। यह उसी तरह की राहत होगी जैसी बांग्लादेश को मिली है, जिससे भारतीय निर्यातकों पर दबाव बढ़ गया था।

उम्मीद है कि यह समझौता मार्च के अंत तक साइन हो जाएगा। इंडस्ट्री के चार सूत्रों के मुताबिक, गोयल ने बुधवार शाम नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में हुई बैठक में इंडस्ट्री लीडर्स से कहा कि भारत अमेरिका के साथ बांग्लादेश जैसी व्यवस्था पर विचार कर रहा है।

एक बैठक में मौजूद सूत्र ने कहा, “ट्रंप प्रशासन की ओर से जारी शुरुआती टैरिफ दिशानिर्देशों के अनुसार, कोई भी देश अगर अमेरिका से आने वाले कच्चे माल का कम से कम 20 फीसदी (आयात मूल्य के हिसाब से) इस्तेमाल करता है और उसे तैयार उत्पाद में बदल देता है, तो वह तैयार माल अमेरिका को जीरो ड्यूटी पर निर्यात कर सकता है। इसलिए अमेरिका में जीरो-ड्यूटी एक्सेस सिर्फ बांग्लादेश तक सीमित नहीं है। मंत्री ने हमें भरोसा दिलाया कि भारत भी ऐसे ही समझौते पर विचार करेगा।”

एक अन्य सूत्र ने कहा, “इसका मतलब यह है कि अमेरिका में बांग्लादेश के मुकाबले हमारा बाजार लाभ (मार्केट एडवांटेज) खोने की चिंता नहीं होगी और न ही बांग्लादेश को कॉटन निर्यात घटने की चिंता रहेगी।”

कॉटन निर्यात पर होगा असर!

यह भी अटकलें लगाई जा रही थीं कि अमेरिका के साथ इस तरह की व्यवस्था भारत के बांग्लादेश को कॉटन निर्यात पर असर डाल सकती है। बांग्लादेश हर साल करीब 85 लाख गांठ (बेल) कपास अपने स्पिनिंग मिलों के लिए आयात करता है। वह कपास ब्राजील, भारत और अफ्रीका से मंगाता है, जबकि हाल के वर्षों में अमेरिका से उसकी आयात हिस्सेदारी खास नहीं रही है।

बांग्लादेश का कॉटन यार्न उत्पादन उसकी गारमेंट इंडस्ट्री की जरूरतें पूरी करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए वह यार्न और फैब्रिक का भारी मात्रा में आयात करता रहता है। साथ ही मैन-मेड फाइबर उत्पादन में भी उसकी मजबूत और बढ़ती मौजूदगी बनी हुई है। भारत औसतन हर साल बांग्लादेश को करीब 12 लाख गांठ कपास निर्यात करता है।

भारत हर साल लगभग 3.7 करोड़ गांठ कपास का उत्पादन करता है। इसके बावजूद भारत को सप्लाई-डिमांड गैप पूरा करने के लिए करीब 50 लाख गांठ कपास का आयात भी करना पड़ता है।

भारत नुकसान में नहीं

एक इंडस्ट्री सूत्र ने कहा कि यह साफ है कि मौजूदा उत्पादन स्तर पर भी भारत के पास कपास की अतिरिक्त उपलब्धता नहीं है। मौजूदा और अनुमानित आधारभूत स्थितियों के हिसाब से भारत नुकसान में नहीं है। उल्टा, यूनाइटेड किंगडम और यूरोपीय यूनियन के साथ साइन हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और आने वाले अमेरिका-भारत ट्रेड एग्रीमेंट के चलते भारत के टेक्सटाइल और अपैरल निर्यात में बड़ा उछाल आने की संभावना है।

जैसे-जैसे ये FTAs लागू होंगे, स्पिनिंग, वीविंग और प्रोसेसिंग में क्षमता विस्तार तेज होने की उम्मीद है। इससे देश में कपास की घरेलू खपत बढ़ेगी और सप्लाई और ज्यादा टाइट हो सकती है।

सूत्र ने कहा कि कपास की उत्पादकता या खेती के क्षेत्रफल में निकट भविष्य में समान अनुपात में बढ़ोतरी नहीं होने की स्थिति में भारत को कपास आयात बढ़ाना पड़ सकता है, घटाना नहीं। इसलिए भारतीय कपास किसानों पर कोई खतरा नहीं है। बल्कि बदलते व्यापार माहौल में कपास की खेती का क्षेत्र बढ़ाने और किसानों को बेहतर कीमत दिलाने का बड़ा मौका है।

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First Published - February 12, 2026 | 1:14 PM IST

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