16वें वित्त आयोग की नई अंतरण व्यवस्था: राज्यों के लिए फायदे-नुकसान और उठते सवाल
राजकोषीय अंतरण की किसी भी योजना के दो मुख्य पहलू होते हैं। उनका ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज आयाम। अंतरण का मुख्य ऊर्ध्वाधर निर्धारक यानी केंद्रीय करों के साझा पूल में राज्यों का हिस्सा समय के साथ लगभग अपरिवर्तित रहा है। वास्तव में, चौदहवें वित्त आयोग ने इस हिस्से को बढ़ाकर 32 फीसदी (जैसा कि तेरहवें वित्त […]
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एंथ्रोपिक के ‘कोवर्क’ से आईटी उद्योग में भूचाल, साधारण भूमिकाओं के लिए जोखिम
अपनी शुरुआत के चंद रोज बाद ही एंथ्रोपिक के क्लाउड कोवर्क ने सूचना प्रौद्योगिकी सेवा उद्योग में बड़े पैमाने पर उथलपुथल मचा दी है। इस नए आर्टिफिशल इंटेलिजेंस असिस्टेंट और इसके अनेक प्लगइन लोगों को यह इजाजत देते हैं कि वे एआई के साथ साझा वर्कप्लेस में सहयोग कायम कर सकें। इसके निहितार्थ सामने आने […]
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विकास का इंजन बदला: ‘पीपल इंडिया’ और मिडिल इंडिया को मिली ज्यादा ताकत
भारत की महाशक्ति यहां के लोग हैं। यह सच है कि हम सभी में कमियां हैं। यहां बड़ी-बड़ी बातें करने वाले, नियम तोड़ने वाले, व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले, पदानुक्रम की धौंस जमाने वाले लोगों की कोई कमी नहीं हैं। मगर इन बातों के बावजूद भारतीय बहुत मेहनती हैं। बेशक, छुपी हुई बेरोजगारी मौजूद है […]
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Editorial: व्यापार समझौते के बाद भारत-अमेरिका रिश्तों में नई गर्माहट
भारत और अमेरिका द्वारा जारी किया गया संयुक्त बयान जिसमें एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पेश की गई है, वह दोनों देशों के बीच संबंधों में महत्त्वपूर्ण नरमी का संकेत हो सकता है। हालांकि अभी यह तय नहीं है कि इसे कितनी तेजी से लागू किया जाएगा, लेकिन उम्मीद है कि उन निर्यातकों को […]
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