facebookmetapixel
Advertisement
ईरानी तेल खरीद का दावा गलत, रिलायंस ने रिपोर्टों को बताया बेबुनियादरनवे से रियल्टी तक: जेवर एयरपोर्ट ने बदली नोएडा की प्रोपर्टी की कहानी, 2027 तक आ सकती है 28% और तेजी‘हेडलाइन्स’ से कहीं आप भी तो नहीं हो रहे गुमराह? SIP पर जारी रखें ये स्ट्रैटेजीAM/NS India में बड़ा बदलाव: दिलीप ओम्मन होंगे रिटायर, अमित हरलका बनेंगे नए सीईओभारत में पेट्रोल, डीजल या LPG की कोई कमी नहीं, 60 दिन का स्टॉक मौजूद: सरकारभारत की तेल जरूरतें क्यों पूरी नहीं कर पा रहा ईरानी क्रूड ऑयल? चीन की ओर मुड़े जहाजलाइन लगाने की जरूरत नहीं, घर पहुंचेगा गैस सिलेंडर: सीएम योगी आदित्यनाथऑल टाइम हाई के करीब Oil Stock पर ब्रोकरेज सुपर बुलिश, कहा- खरीद लें, 65% और चढ़ने का रखता है दमBharat PET IPO: ₹760 करोड़ जुटाने की तैयारी, सेबी में DRHP फाइल; जुटाई रकम का क्या करेगी कंपनीतेल, रुपये और यील्ड का दबाव: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी अस्थिरता, लंबी अनिश्चितता के संकेत

ऑफिस का किराया आसमान पर! REITs के लिए खुला कमाई का सुपर साइकिल

Advertisement

Q3 FY26 में मजबूत ऑफिस मांग से ऑक्यूपेंसी 90% के पार पहुंची, किराए और DPU बढ़े, नुवामा ने REITs पर BUY बरकरार रखा

Last Updated- February 11, 2026 | 11:28 AM IST
office realty

भारतीय कमर्शियल रियल एस्टेट में एक बार फिर रफ्तार लौट आई है। नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट बताती है कि Q3 FY26 में ऑफिस स्पेस की मांग ने ऐसा जोर पकड़ा है कि REITs अब खाली जगह की कमी से जूझने लगे हैं। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स यानी GCCs और भारतीय कंपनियों के लगातार विस्तार ने ऑफिस लीजिंग को मजबूत बनाए रखा। हालात यह हैं कि अब ज्यादातर REITs की इमारतों में 90 प्रतिशत से ज्यादा जगह भर चुकी है, और यही कमी अब किराए को ऊपर धकेल रही है।

तीसरी तिमाही में ऑफिस लीजिंग की कहानी सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि जमीन पर हलचल साफ दिखी। कुल मांग का करीब एक-तिहाई हिस्सा GCCs से आया, जबकि बैंकिंग, IT कंपनियों और फ्लेक्स ऑफिस स्पेस ने भी बाजार में जान फूंकी। हालांकि, ऊंची ऑक्यूपेंसी के कारण नई लीजिंग के आंकड़े हर REIT में एक जैसे नहीं रहे, लेकिन नेट लीजिंग मजबूत बनी रही। REIT कंपनियों को भरोसा है कि SEZ ऑफिस स्पेस को नॉन-SEZ में बदलने से आने वाले महीनों में नई जगह खुलेगी और ऑक्यूपेंसी और ऊपर जाएगी।

खाली जगह कम, किराए ऊपर- यहीं से बदली तस्वीर

ऑफिस में जगह की कमी अब REITs के लिए परेशानी नहीं, बल्कि ताकत बन गई है। नुवामा की रिपोर्ट के मुताबिक, सभी ऑफिस REITs में किराए लगातार बढ़ रहे हैं। Q3 FY26 में किराए सालाना आधार पर 4 से 5 प्रतिशत तक बढ़े। बेहतर किराए और ऊंची ऑक्यूपेंसी का असर निवेशकों को मिलने वाली कमाई पर भी साफ दिखा, जहां DPU में करीब 10 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। ब्याज दरों में कमी ने इस तेजी को और रफ्तार दी है।

विस्तार की दौड़ में उतरे REITs

मजबूत मांग ने REITs को सिर्फ आत्मविश्वास ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें आक्रामक विस्तार के रास्ते पर भी डाल दिया है। Embassy REIT वित्त वर्ष 2030 तक अपने पोर्टफोलियो में 7.6 मिलियन स्क्वायर फीट जोड़ने की तैयारी में है, जिस पर करीब 40,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। Mindspace REIT के कई प्रोजेक्ट्स निर्माण के दौर से गुजर रहे हैं। Brookfield REIT ने बेंगलुरु में एक विशाल ग्रेड-A ऑफिस कैंपस खरीदकर बाजार में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। वहीं Nexus REIT नए मॉल्स की तलाश में है और जल्द ही बड़े अधिग्रहण की उम्मीद जताई जा रही है।

कर्ज नियंत्रण में, भरोसा मजबूत

तेजी के इस दौर में भी REITs ने संतुलन नहीं खोया है। नुवामा की रिपोर्ट बताती है कि सभी REITs का कर्ज स्तर नियामकीय सीमा से काफी नीचे है और उनकी उधारी पर ब्याज दरें 7.5 प्रतिशत से कम बनी हुई हैं। इसका मतलब साफ है- तेजी के साथ-साथ वित्तीय मजबूती भी कायम है।

आगे क्या? नुवामा का साफ संदेश

नुवामा का मानना है कि ऑफिस सेक्टर का यह उछाल अभी थमने वाला नहीं है। GCCs की मांग आगे और तेज हो सकती है और SEZ से जुड़ी अड़चनें अब पीछे छूट चुकी हैं। साथ ही, भारत में मॉल और रिटेल खपत लंबे समय में लगातार बढ़ने की मजबूत कहानी पेश कर रही है। इन्हीं संकेतों के दम पर नुवामा ने सभी REITs पर BUY की सलाह दोहराई है और Embassy REIT को अपनी सबसे पसंदीदा निवेश विकल्प बताया है।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।

Advertisement
First Published - February 11, 2026 | 11:14 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement