इनकम टैक्स को लेकर अक्सर लोगों के मन में एक प्रकार का डर और कन्फ्यूजन रहता है। कौन-सा फायदा टैक्सेबल है, कौन-सा नहीं, किस साल की कमाई पर कब रिटर्न भरना है, ये तमाम सवाल टैक्सपेयर्स के मन में रहते हैं। अब सरकार इसी कन्फ्यूजन को कम करने की तैयारी में है। सरकार जल्द ही नए इनकम टैक्स नियमों को नोटिफाई करने वाली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये नियम मार्च के पहले हफ्ते में जारी हो सकते हैं। साथ ही नया नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू हो जाएगा।
गौरतलब है कि नया इनकम टैक्स एक्ट पहले ही पास तो हो चुका है, लेकिन आम लोगों के लिए असली तस्वीर इन नियमों से ही साफ होगी। सैलरी पाने वाले कर्मचारियों से लेकर निवेशकों और विदेश से कमाई करने कमाने वालों तक, सभी को इन्हीं नियमों के आधार पर अपने टैक्स की प्लानिंग करनी होगी।
सरकार का दावा है कि बदलाव अचानक नहीं होंगे। धीरे-धीरे नए सिस्टम की तरफ बढ़ा जाएगा, ताकि टैक्सपेयर्स पर बेवजह का दबाव न पड़े। आने वाले नियम तय करेंगे कि टैक्स सिस्टम कितना आसान और पारदर्शी बनता है।
नए नियमों के साथ टैक्स सिस्टम में बड़ा बदलाव आ वाला है। पुराना फाइनेंशियल ईयर और असेसमेंट ईयर वाला सिस्टम अब खत्म हो जाएगा। अब ‘टैक्स ईयर’ की बात होगी, जो आमतौर पर 1 अप्रैल से 31 मार्च तक रहेगा। ये बदलाव धीरे-धीरे आएगा, मतलब पहले कमाए हुए इनकम पर रिटर्न फाइलिंग में कोई बड़ा झटका नहीं लगेगा।
सरकार का मकसद साफ-सुथरा और आसान सिस्टम बनाना है। नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे, लेकिन पहले साल के रिटर्न बाद में जुलाई 2027 में फाइल होंगे। इससे टैक्सपेयर्स को अचानक बदलाव का बोझ नहीं पड़ेगा।
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सैलरी वाले लोगों के लिए सबसे बड़ी अच्छी खबर ये है कि नए नियमों में पर्क्स यानी नौकरी के साथ मिलने वाले फायदों पर साफ नियम बन रहे हैं। जैसे कि कंपनी की तरफ से फ्री या सस्ता घर, कंपनी कार और ड्राइवर, बिजली-पानी-गैस के बिल, क्लब मेंबरशिप, गिफ्ट्स और वाउचर्स आदि पर टैक्स कैसे लगेगा, ये सब स्पष्ट होगा।
खास तौर पर गिफ्ट्स और वाउचर्स पर नियम साफ हैं। अगर एम्प्लॉयर की तरफ से साल भर में गिफ्ट, वाउचर या टोकन 15,000 रुपये तक हैं, तो टैक्स नहीं लगेगा। इससे ज्यादा हुआ तो टैक्स लगेगा। पहले ये लिमिट कम थी और काफी कन्फ्यूजन रहता था। अब ये यूनिफॉर्म हो जाएगा, जिससे छोटे-मोटे फायदों पर टैक्स के झगड़े कम होंगे।
कंपनी अगर ट्रैवल, होटल या क्रेडिट कार्ड के खर्चे रिम्बर्स करती है, तो वो टैक्स फ्री रहेंगे बशर्ते वो ऑफिशियल काम के हों। लेकिन रिकॉर्ड्स जरूरी हैं। अगर पर्सनल खर्चे साबित हुए या कागजात नहीं तो टैक्स लग सकता है।
मेडिकल बेनिफिट्स पर राहत बरकरार रहेगी। गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, हार्ट डिजीज के इलाज पर अप्रूव्ड हॉस्पिटल में खर्च होने पर टैक्स राहत मिलेगी। इससे सैलरीड लोगों और उनके परिवारों को बड़ी मदद मिलेगी।
शेयर बाजार या प्रॉपर्टी में निवेश करने वालों के लिए भी अच्छी बात है। नए नियमों में एसेट्स की होल्डिंग पीरियड कैसे कैलकुलेट होगी, खासकर स्पेशल केस में, और अनलिस्टेड शेयर्स की फेयर मार्केट वैल्यू कैसे तय होगी, ये सब क्लियर होगा। इससे कोर्ट-कचहरी के केस कम होंगे और निवेशकों को ज्यादा यकीन आएगा।
नॉन-रेजिडेंट्स और विदेशी कंपनियों के लिए भी नियम साफ हैं। डिजिटल बिजनेस या ऑनलाइन इनकम पर टैक्स कैसे लगेगा, ये तय होगा। ज्यादातर भारतीय टैक्सपेयर्स पर सीधा असर नहीं, लेकिन क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजेक्शन में पारदर्शिता बढ़ेगी।
टैक्स एक्सपर्ट्स कहते हैं कि मार्च में नियम आने से सैलरी स्ट्रक्चरिंग, टैक्स प्लानिंग और कंप्लायंस आसान हो जाएगा। लोग पहले से समझ सकेंगे कि क्या बदल रहा है।
टैक्स एक्सपर्ट के मुताबिक, अभी फाइनल नोटिफिकेशन का इंतजार करें, लेकिन पर्क्स पर नजर रखें, रिम्बर्समेंट के कागजात संभालकर रखें, निवेश के डॉक्यूमेंट्स चेक करें और मार्च में आने वाली ऑफिशियल खबरों पर नजर बनाए रखें।