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मियाद बढ़ने से विदेशी आय और देर से रिटर्न भरने वालों को लाभ

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बजट प्रस्ताव के तहत संशोधित रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा 9 महीने से बढ़कर 12 महीने होगी; 1 अप्रैल 2026 से लागू

Last Updated- February 09, 2026 | 9:11 AM IST
ITR
Representational Image

संशोधित आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए समय-सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव केंद्रीय बजट में रखा गया है। इसमें रिटर्न दाखिल करने की मियाद कर निर्धारण वर्ष खत्म होने के बाद 12 महीने में या अगला कर निर्धारण वर्ष पूरा होने से पहले तक हो सकती है। फिलहाल इसके लिए नौ महीने का समय मिलता है। नए प्रस्ताव के बाद करदाताओं को वास्तविक चूक ठीक करने और जानकारी अपडेट करने के लिए अधिक समय मिल जाएगा।

किंग स्टब ऐंड कासिवा एडवोकेट्स ऐंड अटॉर्नीज के पार्टनर अभिषेक पालीवाल ने कहा, ‘यह भरोसे वाली कर व्यवस्था दिखाता है और करदाताओं को सामने मौजूद व्यावहारिक चुनौतियों को स्वीकारता है।’

बढ़ी मियाद 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगी। इसलिए यह कर निर्धारण वर्ष 2026-27 से यानी वित्त वर्ष 2025-26 के रिटर्न से चलेगी। इसके मुताबिक 31 दिसंबर के बाद लेकिन 31 मार्च से पहले संशोधित रिटर्न दाखिल करने वाले करदाता पर शुल्क लगेगा। मुंबई के चार्टर्ड अकाउंटेंट सुरेश सुराणा कहते हैं, ‘आय 5 लाख रुपये तक है तो शुल्क 1,000 रुपये होगा और उससे ज्यादा होने पर 5,000 रुपये होगा।’

संशोधित रिटर्न क्या है?

मूल रिटर्न में गलती, चूक या गलत जानकारी को ठीक करने के लिए करदाता आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 139(5) के तहत संशोधित रिटर्न दाखिल करता है। एक्विलॉ के कार्यकारी निदेशक (कर) राजर्षि दासगुप्ता कहते हैं, ‘स्वीकार होने के बाद यह कर निर्धारण के लिए मूल रिटर्न की जगह ले लेता है।’

करदाता आय की गलत जानकारी देने, कोई आय भूल जाने या कटौती अथवा छूट का दावा नहीं कर पाने पर संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकता है। साथ ही कटौती या छूट, कर की गणना, बैंक खाते के विवरण में गलती होने अथवा दूसरी प्रशासनिक त्रुटि होने पर भी संशोधित रिटर्न दे सकता है। अरीट कंसल्टेंट्स की पार्टनर रूपाली सिंघानिया कहती हैं, ‘करदाता इसे तब भी दाखिल कर सकते हैं, जब विदेशी संपत्ति या आय का खुलासा करने में चूक हो गई हो अथवा बताई गई आय वार्षिक सूचना विवरण (एआईएस) से मेल नहीं खाती हो।’

कर निर्धारण पूरा होने के बाद संशोधित रिटर्न जमा नहीं हो सकता। रूपाली बताती हैं, ‘आयकर विभाग ने धारा 143(1) के तहत सूचना या धारा 143(2) के तहत जांच नोटिस दिया है तब भी करदाता रिटर्न में संशोधन कर सकता है बशर्ते इसकी मियाद खत्म नहीं हुई हो।’
कोई भी करदाता संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकता है, भले ही उसने मूल रिटर्न देर से जमा किया हो। नांगिया ऐंड कंपनी के निदेशक इतेश डोढी बताते हैं, ‘कर निर्धारण वर्ष 2017-18 से बदले कानून में देर से रिटर्न भरने वालों को भी संशोधित रिटर्न देने की अनुमति मिल गई।’

बढ़ी मियाद से फायदा

करदाताओं को अक्सर संशोधित फॉर्म 16, टीडीएस प्रमाण पत्र या विदेशी आय का प्रमाण जैसे जरूरी दस्तावेज मूल रिटर्न की मियाद बीतने के बाद मिलते हैं। दासगुप्ता ने कहा, ‘मियाद लंबी हो तो करदाताओं को जरूरी दस्तावेजों की जानकारी संशोधित रिटर्न में भरने का भरपूर समय मिल
जाता है।’

अंतरराष्ट्रीय कर वालों को भी इसका फायदा मिल सकता है। दासगुप्ता ने कहा, ‘मार्च अंत तक की मियाद कई देशों के कर कैलेंडर से मेल खाती है और इससे जानकारी में गड़बड़ी होने की आशंका भी कम हो जाती है।’ देर से रिटर्न दाखिल करने वालों को भी ज्यादा समय मिल जाएगा। इससे करदाता नोटिस की फिक्र किए बगैर असली त्रुटियों को खुद ही ठीक कर पाएंगे और स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे इससे आयकर विभाग का बोझ भी घटेगा।

सुराणा का मुताबिक इससे अनजानी त्रुटियों पर कर निर्धारण, जुर्माना और मुकदमेबाजी भी कम होगी। मगर संशोधित रिटर्न के कुछ नुकसान भी हैं। पालीवाल के अनुसार ज्यादा बदलाव होने पर कर अधिकारी संशोधित रिटर्न की बारीक जांच कर सकते हैं। साथ ही इसका शुल्क खर्च बढ़ाएगा।

संभालकर रखें सभी दस्तावेज

संशोधित रिटर्न भरने से पहले करदाताओं के पास आय, कटौती, विदेशी संपत्ति, बैंक खाते, एआईएस/टीआईएस और टीडीएस प्रमाण पत्र का ब्योरा होना चाहिए। रूपाली बताती हैं कि संशोधित रिटर्न भरते समय मूल रिटर्न जमा करने की तारीख और पावती क्रमांक भी भरने पड़ते हैं। डोढी की राय में करदाताओं को रिटर्न में संशोधन सही साबित करने के लिए कागज संभालकर रखने चाहिए ताकि बाद में आयकर विभाग को जवाब दिया जा सके। संशोधन के कारण और कर एवं ब्याज भरना पड़े तो चालान की प्रति रखनी चाहिए।

मगर रहे ध्यान

संशोधित रिटर्न के लिए आकलन या पुनराकलन नोटिस का इंतजार न करें। डोढी कहते हैं, ‘चूक या गलत जानकारी दिखे तो मुकदमे या जुर्माने से बचने के लिए फौरन संशोधन करें।’ संशोधन की मियाद निकलने पर भी कुछ परिस्थितियों में अपडेटेड रिटर्न भर सकते हैं। डोढी की सलाह है कि संशोधन में अतिरिक्त कर और ब्याज बने तो रिटर्न दाखिल करने से पहले उसे चुका दें।

मगर संशोधित रिटर्न केवल सुधार करने के लिए है नए दावे के लिए नहीं। विशेषज्ञों के मुताबिक इसका इस्तेमाल पुराने रिटर्न में आमूलचूल बदलाव के लिए नहीं होना चाहिए। अंत में रिटर्न संशोधित करने से पहले अपनी आय को फॉर्म 26एएस और एआईएस से मिलाना न भूलें।

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First Published - February 9, 2026 | 9:11 AM IST

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