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रीपो रेट स्थिर रहने के बीच विशेषज्ञों का कहना है कि होम लोन धारकों के लिए यह समय EMI घटाने के बजाय अतिरिक्त भुगतान कर अवधि और कुल ब्याज बोझ कम करने का बेहतर मौका है।

Last Updated- February 07, 2026 | 11:35 AM IST
home loan rates
Representative Image

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया और इसे 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा। इस फैसले के बाद रेपो से जुड़े होम लोन की EMI फिलहाल स्थिर रहने की संभावना है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति ब्याज दरों में कटौती का इंतज़ार करने से ज़्यादा, अपने लोन को स्मार्ट तरीके से कम करने का अच्छा मौका है।

वित्तीय जानकारों के अनुसार, यदि कोई होम लोन ग्राहक साल में सिर्फ एक अतिरिक्त EMI का भुगतान करता है, तो वह अपने लोन की अवधि को करीब पांच साल तक कम कर सकता है। इतना ही नहीं, इससे ब्याज के रूप में 15 लाख रुपये से अधिक की बचत भी संभव है।

BankBazaar के सीईओ अधिल शेट्टी का कहना है कि मौजूदा समय में दरों के स्थिर रहने का फायदा उठाकर लोनधारकों को अपने मौजूदा होम लोन को बेहतर तरीके से मैनेज करना चाहिए। केवल दरों में कटौती की उम्मीद में बैठे रहने के बजाय, अभी से लोन को ऑप्टिमाइज करना ज़्यादा फायदेमंद हो सकता है।

वहीं, Newstone के सीईओ रजत बोकोलिया ने सलाह दी कि होम लोन लेने वालों को अपने लोन की शर्तों की दोबारा समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्राहकों को अपनी प्रभावी ब्याज दर जांचनी चाहिए और यदि बैंक का स्प्रेड बढ़ गया हो तो रीसेट के लिए बातचीत करनी चाहिए। साथ ही, लोन की अवधि घटाने पर ध्यान देना और समय से पहले आंशिक भुगतान (प्रीपेमेंट) करना भविष्य में बड़ा लाभ दे सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि EMI को मौजूदा स्तर पर बनाए रखते हुए अतिरिक्त भुगतान करने से घर का मालिक बनने की राह तेज़ हो जाती है और लोन को लंबे समय तक ढोने की जरूरत नहीं पड़ती। कुल मिलाकर, RBI का यह रेट पॉज होम लोन ग्राहकों के लिए एक समझदारी भरा वित्तीय अवसर बन सकता है।

रेट पॉज के दौरान होम लोन धारकों के लिए क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट्स

ब्याज दरों में फिलहाल किसी तरह का बदलाव न होने यानी रेट पॉज की स्थिति में होम लोन लेने वालों के लिए यह समय अपने लोन को दोबारा समझने और बेहतर ढंग से मैनेज करने का है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौर में सिर्फ EMI कम करने की सोच से आगे बढ़कर कुल ब्याज बोझ घटाने पर ध्यान देना ज्यादा फायदेमंद होगा।

सबसे पहले लोन की बनावट जांचें

फाइनेंशियल एक्सपर्ट शेट्टी के मुताबिक, उधारकर्ताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका होम लोन किसी बाहरी बेंचमार्क, जैसे रीपो रेट, से जुड़ा हो। इससे ब्याज दरों में बदलाव का लाभ जल्दी मिल पाता है।

इसके अलावा, बैंक या लेंडर द्वारा जो अतिरिक्त स्प्रेड लगाया गया है, उसकी समीक्षा भी जरूरी है। अगर बीते समय में आय बढ़ी है या क्रेडिट स्कोर बेहतर हुआ है, तो ब्याज दर कम कराने के लिए बातचीत की जा सकती है।

EMI नहीं, अवधि घटाने पर दें जोर

शेट्टी का कहना है कि स्थिर ब्याज दरों के माहौल में EMI और लोन अवधि के संयोजन को दोबारा परखना चाहिए। बजट के बाद आय को लेकर स्पष्टता होने से लंबी अवधि की प्लानिंग आसान हो जाती है।

वे यह भी सलाह देते हैं कि अगर अतिरिक्त बचत उपलब्ध हो, तो छोटी-छोटी पार्ट-प्रीपेमेंट करने से लंबे समय में ब्याज का बोझ काफी कम किया जा सकता है।

नोएडा के उदाहरण से समझें

रियल एस्टेट विशेषज्ञ जितेंद्र यादव, डायरेक्टर, Roots Developers, बताते हैं कि मान लीजिए 35 वर्षीय नोएडा निवासी ने 8.5% ब्याज दर पर 25 साल के लिए 60 लाख रुपये का होम लोन लिया है।

उनके अनुसार, ऐसे लोन को “झेलने” की बजाय “मैनेज” करना जरूरी है। EMI घटाने की जगह अगर उधारकर्ता लोन अवधि कम करने पर ध्यान दे, तो बेहतर नतीजे मिलते हैं। साल में सिर्फ एक अतिरिक्त EMI चुकाने से करीब पांच साल की अवधि कम हो सकती है और ब्याज में 15 लाख रुपये से ज्यादा की बचत संभव है।

जितेंद्र यादव का यह भी कहना है कि बोनस या वैरिएबल सैलरी का इस्तेमाल समय-समय पर प्रीपेमेंट में करना समझदारी है। हालांकि, लोन रीफाइनेंस तभी करना चाहिए जब सभी खर्चों को जोड़ने के बाद कम से कम 50–75 बेसिस प्वाइंट की वास्तविक बचत दिखे।

कुल ब्याज घटाना है असली लक्ष्य

शेट्टी के मुताबिक, उधारकर्ताओं को सिर्फ मासिक किस्त कम करने के पीछे नहीं भागना चाहिए। असली फोकस इस बात पर होना चाहिए कि पूरे लोन काल में कुल कितना ब्याज दिया जा रहा है।

रेट पॉज के समय वही EMI जारी रखने से मूलधन तेजी से घटता है, जिससे लोन अवधि अपने आप कम हो जाती है। साथ ही, उपलब्ध टैक्स छूट का सही उपयोग करके भी होम लोन को ज्यादा किफायती बनाया जा सकता है।

जानिए सरकारी, निजी बैंकों और HFCs की मौजूदा ब्याज दरें

अगर आप घर खरीदने या निर्माण के लिए होम लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए अहम है। विभिन्न बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की मौजूदा होम लोन ब्याज दरें सामने आई हैं। PaisaBazaar द्वारा संकलित इन आंकड़ों के मुताबिक, कई सरकारी बैंकों में होम लोन की शुरुआती दरें 7.10 फीसदी से शुरू हो रही हैं।

सरकारी बैंकों में होम लोन की दरें

पब्लिक सेक्टर बैंकों में आमतौर पर निजी बैंकों की तुलना में कम ब्याज दरों पर लोन उपलब्ध होता है।

  • स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) सभी लोन स्लैब पर करीब 7.25% से 8.70% तक की दर पर होम लोन दे रहा है।

  • बैंक ऑफ बड़ौदा में होम लोन की शुरुआत 7.20% से होती है, जो लोन राशि के अनुसार बढ़ सकती है।

  • यूनियन बैंक ऑफ इंडिया 7.15% की शुरुआती दर पर होम लोन उपलब्ध करा रहा है।

  • पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में होम लोन की ब्याज दर 7.20% से शुरू होती है।

  • बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, यूको बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र जैसे बैंक भी 7.10% से 7.25% के बीच शुरुआती दरों पर लोन ऑफर कर रहे हैं।

इसके अलावा इंडियन ओवरसीज बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन बैंक सभी लोन अमाउंट पर 7.10% से 7.15% के आसपास की न्यूनतम दरें दे रहे हैं।

निजी बैंकों की होम लोन ब्याज दरें

प्राइवेट सेक्टर बैंकों में ब्याज दरें आमतौर पर क्रेडिट स्कोर और प्रोफाइल पर निर्भर करती हैं।

  • ICICI बैंक और HSBC में होम लोन की शुरुआत करीब 7.45% से होती है।

  • कोटक महिंद्रा बैंक 7.70% से लोन ऑफर कर रहा है।

  • HDFC बैंक में होम लोन की शुरुआती दर 7.90% है।

  • एक्सिस बैंक में यह दर 8.00% से शुरू होकर लोन राशि के अनुसार बढ़ सकती है।

  • फेडरल बैंक, साउथ इंडियन बैंक, कर्नाटक बैंक और करूर वैश्य बैंक में ब्याज दरें 7.30% से 11% के दायरे में हैं।

हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFCs) के ऑफर

बैंकों के अलावा कई हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां भी आकर्षक दरों पर होम लोन दे रही हैं।

  • LIC हाउसिंग फाइनेंस और बजाज हाउसिंग फाइनेंस में होम लोन 7.15% से शुरू हो रहा है।

  • टाटा कैपिटल और PNB हाउसिंग फाइनेंस 7.50% की शुरुआती दर पर लोन उपलब्ध करा रहे हैं।

  • आदित्य बिड़ला कैपिटल, ICICI होम फाइनेंस और गोदरेज हाउसिंग फाइनेंस भी 7.50% से 7.75% के बीच शुरुआती दरें दे रहे हैं।

लोन लेने से पहले ध्यान रखें

होम लोन की ब्याज दरें आपकी क्रेडिट स्कोर, आय, नौकरी की स्थिरता और लोन अवधि पर निर्भर करती हैं। इसलिए लोन लेने से पहले अलग-अलग बैंकों और HFCs के ऑफर्स की तुलना करना फायदेमंद हो सकता है।

First Published - February 7, 2026 | 11:28 AM IST

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