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कागज रहित होगा भारत-यूरोप व्यापार! नौवहन मंत्री ने बताया कैसे ‘मैत्री’ प्लेटफॉर्म बदलेगा लॉजिस्टिक

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नौवहन मंत्री सर्वानंद सोनोवाल द्वारा साझेदार देशों के साथ निर्बाध माल परिवहन सुनिश्चित करने हेतु वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर पर जोर दिया गया है

Last Updated- February 07, 2026 | 12:42 PM IST
Sarbananda Sonowal
नौवहन मंत्री सर्वानंद सोनोवाल | फाइल फोटो

अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ व्यापार समझौता होने के बाद सरकार अब अपने साझेदार देशों के साथ निर्बाध माल परिवहन (लॉजिस्टिक) तंत्र स्थापित करने और वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर के जरिये डिजिटल बाधाएं कम करने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही है। 

नौवहन मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से साक्षात्कार में बताया,‘भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर चल रही बातचीत के साथ डिजिटल व्यापार, सीमा शुल्क सहयोग और व्यापार मंचों के अंतर-परिचालन पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।’

वर्चुअल  ट्रेड कॉरिडोर और वर्चुअल ट्रेड एग्रीमेंट (वीटीए) फ्रेमवर्क को गति मिल रही है। पहला समझौता 2024 में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ हुआ था। सोनोवाल ने कहा,‘ईयू के वार्ता दल के साथ चर्चा में दोनों पक्षों ने पहले ही शुल्क उदारीकरण से आगे बढ़कर डिजिटल और कागज रहित व्यापार को बढ़ावा देने वाली व्यवस्थाओं को शामिल करने में दिलचस्पी जताई है। यह संयुक्त अरब अमीरात के साथ हुए वीटीए की भावना के अनुरूप है।’

इस पहल का एक महत्त्वपूर्ण पहलू मास्टर ऐ​प्लिकेशन फॉर इंटरनैशनल ट्रेड ऐंड रेग्युलेटरी  इंटरफेस (मैत्री) है जो नौवहन मंत्रालय के साथ राज्य के स्वामित्व वाली इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी फर्म राइट्स  द्वारा विकसित एक मिडलवेयर प्लेटफॉर्म है।

इस प्लेटफॉर्म को वीटीसी फ्रेमवर्क के तहत निर्बाध और सुरक्षित व्यापार डेटा आदान-प्रदान को सक्षम करने के लिए तैयार किया गया है और इसे भारत पश्चिम एशिया यूरोप कॉरिडोर (आईएमईसी) के लिए एक सॉफ्टवेयर बिल्डिंग ब्लॉक के रूप में विकसित किया गया है।

उन्होंने कहा,‘संयुक्त अरब अमीरात वीटीए की सफलता ने एक ढांचा प्रदान किया है कि कैसे डिजिटल सुविधा बाधाएं कम कर सकती है, अनुपालन बढ़ा सकती है और माल के ठहरने के समय को काफी कम कर सकती है।’ भारत की वर्तमान चर्चाओं में ईयू और आसियान के साथ सीमा शुल्क सहयोग ढांचा शामिल हैं जिसमें पूर्व-आगमन जोखिम प्रबंधन, अग्रिम निर्णय और सिंगल-विंडो एकीकरण शामिल हैं।

एकीकरण का उद्देश्य सहज लॉजिस्टिक में क्षेत्र-विशिष्ट डेटा साझेदारी संधि है जो प्रमाणीकरण, स्वच्छता और पादप स्वच्छता मंजूरी और मानकों के बीच तालमेल का समर्थन करते हैं।

पिछले महीने विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा था कि वीटीसी का प्रायोगिक परीक्षण यूएई के साथ द्विपक्षीय स्तर पर किया गया है और बाद में इसे बड़े स्तर पर दोहराने के लिए इस्तेमाल किया सकता है।

सोनोवाल ने कहा कि वीटीसी और वीटीए जैसे डिजिटल व्यापार संवर्द्धन तंत्र का लाभ उठाना भारत की विकसित हो रही व्यापार नीति का एक प्रमुख स्तंभ है। उन्होंने कहा,‘2024 में यूएई के साथ हमने जिस ढांचे पर हस्ताक्षर किए वह महज शुरुआत है। इसमें कागज रहित व्यापार, पूर्व मंजूरी और वास्तविक समय के डेटा एक्सचेंज को सक्षम करने वाला वर्चुअल व्यापार गलियारा शामिल है।’

मैत्री को सितंबर 2024 में अबू धाबी के शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा के दौरान शुरू किया गया था। यह मौजूदा व्यापार पोर्टल को एकीकृत करता है जिसमें नैशनल लॉजिस्टिक्स पोर्टल-मरीन, भारतीय कस्टम्स इलेक्ट्रॉनिक गेटवे और यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म शामिल हैं जो यूएई की तरफ से समान पोर्टलों के साथ निर्बाध और कागज रहित संपर्क प्रदान करते हैं।

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार भारत और ईयू के बीच द्विपक्षीय वस्तु व्यापार में निरंतर वृद्धि हुई है जिसका मूल्य 2024-25 में 11.5 लाख करोड़ रुपये था। इनमें भारत ने ईयू को लगभग 6.4 लाख करोड़ रुपये मूल्य की वस्तुओं का निर्यात किया था। ईयू के साथ एफटीए की घोषणा 27 जनवरी को की गई थी। आईएमईसी पहल 2023 में नई दिल्ली में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान शुरू की गई थी।

इसका मकसद भारत, पश्चिम एशिया और यूरोप के माध्यम से व्यापार के लिए एक निर्बाध व्यापार मार्ग प्रदान करना पर है। यह गलियारा भारतीय बंदरगाहों जैसे जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी, मुंद्रा (गुजरात) और कांडला (गुजरात) को पश्चिम एशियाई बंदरगाहों जैसे फुजैराह, जेबेल अली और यूएई में अबू धाबी, दम्मम, रास अल खैयर और सऊदी अरब के बंदरगाहों से जोड़ेगा। इस क कॉरिडोर का पश्चिमी हिस्सा संपर्क यूरोप तक बढ़ा देगा।

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First Published - February 7, 2026 | 12:42 PM IST

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