facebookmetapixel
Advertisement
अटकी चंद्रशेखरन के वारिस की तलाश, उत्तरा​धिकारी चुनने वाली चयन समिति गठित करने में लगेगा वक्त; AGM पर भी संशयभारत के एयर मोबिलिटी बाजार में उतरने की तैयारी, 2029 से ईवीटीओएल उड़ाने की स्काईड्राइव की योजनाMMDR विधेयक पर कुछ राज्यों को एतराज, खनन मंत्री बोले- प्रमुख खनिजों तक सीमित रहेंगे प्रावधानएयरटेल के ग्राहकों को महंगे प्लान में शिफ्ट करने से Vi को मिल सकता है मौका, बढ़ेगी कमाईस्मॉलकैप-मिडकैप फंड्स में फिर बढ़ी निवेशकों की दिलचस्पी, हर 3 इक्विटी फोलियो में 1 इनकाआरबीआई के नए नियमों से कर्ज दरों में बदलाव होगा तेज, बैंकों के स्प्रेड पर भी पड़ेगा असरQ1 Results: ABREL का घाटा बढ़ा, IGL का मुनाफा 44% घटा; LG Electronics का लाभ 27% बढ़ाभारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की तैयारी, नीति आयोग ने औद्योगिक पार्क और क्लस्टर का दिया सुझावTata Motors PV का Q1 मुनाफा 80% घटा, JLR की कमजोर बिक्री से प्रदर्शन पर पड़ा असरसौर ऊर्जा में भारत की रफ्तार तेज, पहली छमाही में 34 गीगावॉट क्षमता का इजाफा

डिजिटल धोखाधड़ी पर RBI का ऐतिहासिक फैसला: अब पीड़ितों को मिलेगा ₹25,000 तक का मुआवजा

Advertisement

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि प्रस्तावित मुआवजा एक बार की राहत होगी

Last Updated- February 06, 2026 | 11:15 PM IST
Digital Fraud
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय रिजर्व बैंक ने डिजिटल धोखाधड़ी के ​शिकार लोगों के लिए एक नई पहल करते हुए उन्हें मुआवजा दिए जाने की घोषणा की है। रिजर्व बैंक ने आज कहा कि छोटे मूल्य की डिजिटल धोखाधड़ी के शिकार बैंक ग्राहकों को केवल पहली बार 25,000 रुपये तक का मुआवजा  दिया जाएगा।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि प्रस्तावित मुआवजा एक बार की राहत होगी। इसके तहत नुकसान वाली रकम का 85 फीसदी अथवा 25,000 रुपये में से जो भी कम हो मुआवजा दिया जाएगा।  मल्होत्रा ने कहा, ‘​अगर (ग्राहक) खुद की गलती से अथवा किसी अन्य की गलती से भी धोखाधड़ी का शिकार होंगे तो बगैर कोई सवाल पूछे हम उन्हें मुआवजा देंगे बशर्ते वह अनजाने में हुई हो।’ 

मुआवजे के एक बड़े हिस्से का वहन नियामक खुद करेगा जिसमें बैंक का 15 फीसदी योगदान करेंगे और ग्राहक को भी 15 फीसदी का नुकसान उठाना पड़ेगा। ग्राहकों के मुआवजे के लिए नियामक जल्द ही एक ढांचा तैयार करेगा। 

यह पहल ऐसे समय में की गई है जब डिजिटल धोखाधड़ी के शिकार ग्राहकों की तादाद लगातार बढ़ रही है और उन्हें अपनी मेहनत की कमाई से हाथ धोना पड़ रहा है।

आरबीआई के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे ने कहा, ‘हमारे पास डिपॉजिट एजुकेशन ऐंड अवेयरनेस (डीईए) फंड है जहां समय के साथ पर्याप्त अधिशेष जमा हो गया है। हम इस फंड का उपयोग (मुआवजे के लिए) कर सकते हैं।’ उन्होंने कहा कि दो तिहाई से अधिक धोखाधड़ी बेहद कम मूल्य वाली हैं, मगर मूल्य के लिहाज से कुल धोखाधड़ी में उनकी हिस्सेदारी 15 फीसदी है।

धोखाधड़ी पर आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 के दौरान कुल मामलों में कार्ड/इंटरनेट धोखाधड़ी की हिस्सेदारी संख्या के लिहाज से 66.8 फीसदी थी। साल 2024-25 में कार्ड/इंटरनेट धोखाधड़ी के लगभग 13,500 मामले सामने आए जो कुल मिलाकर करीब 520 करोड़ रुपये के थे। साल 2023-24 में धोखाधड़ी के 29,000 से अधिक मामले सामने आए थे जो कुल मिलाकर करीब 1,457 करोड़ रुपये के थे। साल 2022-23 में करीब 277 करोड़ रुपये ऐसे 6,700 मामले सामने आए थे।

आरबीआई ने वित्तीय योजनाओं एवं सेवाओं के विज्ञापन, विपणन एवं बिक्री के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी करने का भी प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य विनियमित संस्थाओं द्वारा वित्तीय योजनाओं की गलत बिक्री पर अंकुश लगाना है।

आरबीआई ने कहा, ‘किसी भी विनियमित संस्था द्वारा वित्तीय योजनाओं एवं सेवाओं की गलत बिक्री के परिणाम ग्राहकों के साथ-साथ संस्था के लिए भी गंभीर होते हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी हो गया है कि बैंक के जरिये बेचे जा रहे तीसरे पक्ष के उत्पाद और सेवाएं ग्राहक की जरूरतों के अनुरूप हों। साथ ही वे व्यक्तिगत तौर पर ग्राहक की जोखिम लेने की क्षमता के लिहाज से भी उपयुक्त हों।’

आरबीआई के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने बताया कि किसी भी वित्तीय योजना की उपयुक्तता और ग्राहक की सहमति पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में आरबीआई जल्द ही विस्तृत दिशानिर्देश जारी करेगा। 

मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि प्रणाली में गलत तरीके से बिक्री अभी अनियंत्रित नहीं है। उन्होंने कहा, ‘प्रणाली के स्तर पर गलत तरीके से बिक्री के उदाहरण अधिक नहीं हैं। मगर हमारे लिए एक भी उदाहरण काफी मायने रखता है। इसलिए हमने सब कुछ ध्यान में रखा है और जल्द दिशानिर्देश जारी करेंगे ताकि ऐसे मामलों पर अंकुश लगाया जा सके।’ 

बैंक अब बीमा पॉलिसी, म्युचुअल फंड आदि तमाम वित्तीय उत्पादों के वितरण में शामिल हैं। हाल में बीमा पॉलिसियों के गलत तरीके से बेचे जाने के कई मामले सामने आए हैं। इससे पता चलता है कि ग्राहकों को कुछ ऐसी योजनाएं बेची जाती हैं जो उनके लिए उपयुक्त नहीं हैं।

इंडियन बैंक के एमडी एवं सीईओ विनोद कुमार ने कहा, ‘धोखाधड़ी पर नकेल कसने के लिए प्रस्तावित ढांचा बैंकिंग प्रणाली में ग्राहक एवं शिकायत निवारण में सुधार पर केंद्रित है। इससे ग्राहकों का विश्वास बढ़ेगा और सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी।’

आरबीआई ने कहा कि वह ऋणों वसूली एजेंटों की नियुक्ति एवं अन्य पहलुओं पर सभी मौजूदा दिशानिर्देशों की समीक्षा करेगा और उनमें सामंजस्य स्थापित किया जाएगा। इस संबंध में आम लोगों से परामर्श के लिए जल्द ही मसौदा निर्देश जारी किए जाएंगे।

फिलहाल वसूली एजेंटों की नियुक्ति और आचार संहिता संबंधी पहलुओं के संबंध में विनियमित संस्थाओं की विभिन्न श्रेणियों पर अलग-अलग निर्देश लागू होते हैं।

Advertisement
First Published - February 6, 2026 | 10:59 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement