बजट 2026 में सरकार ने ऐसे कई सुधार किए हैं, जिनका सीधा असर मिडिल क्लास परिवारों की जेब, प्लानिंग और रोजमर्रा के खर्चों पर पड़ सकता है। यह बजट मिडिल क्लास के लिए किसी बड़े धमाके जैसा तो नहीं है, लेकिन हल्की राहत देने वाला जरूर है जिसका इंतजार लंबे समय से था। विदेश से लौटते वक्त एयरपोर्ट पर होने वाली बहस हो, बच्चों की विदेशी पढ़ाई का खर्च, अचानक आया मेडिकल बिल या सालों बाद भारत शिफ्ट होने की तैयारी, बजट 2026 इन सब हालातों को ध्यान में रखकर बनाया गया दिखता है।
सरकार ने इस बार बड़ी-बड़ी घोषणाओं से ज्यादा उन छोटी लेकिन अहम परेशानियों को छूने की कोशिश की है, जो मिडिल क्लास की रोजमर्रा की प्लानिंग बिगाड़ देती हैं। टैक्स, ट्रैवल और ट्रीटमेंट से जुड़े बदलाव सीधे उसी जेब तक पहुंचते हैं, जहां हर महीने का हिसाब बड़ी सावधानी से लगाया जाता है। टैक्स और फाइनेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये सुधार भले ही क्रांतिकारी न हों, लेकिन व्यवहारिक और समय की जरूरत के मुताबिक हैं।
ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर मनोज मिश्रा का कहना है कि नए बैगेज नियम मिडिल क्लास यात्रियों के लिए सच में काम की राहत लेकर आए हैं। अब विदेश से लौटने वाले भारतीय यात्रियों को पहले की तरह 50 हजार नहीं, बल्कि 75 हजार रुपये तक का सामान बिना ड्यूटी लाने की छूट मिलेगी। इसका सीधा फायदा यह होगा कि परिवारों को कस्टम ड्यूटी में अपनी जेब से कम पैसे खर्च करने पड़ेंगे।
इसके साथ ही अब हर वयस्क यात्री एक लैपटॉप बिना ड्यूटी के ला सकता है, जो आज के काम, पढ़ाई और डिजिटल लाइफस्टाइल को देखते हुए एक जरूरी कदम है। ज्वेलरी को लेकर जो दिक्कतें सालों से चली आ रही थीं, उन पर भी काबू पाने की कोशिश की गई है। कीमत के आधार पर तय की जाने वाली सीमा हटाकर अब वजन के हिसाब से छूट दी जाएगी, जिससे एयरपोर्ट पर बहस और झंझट कम होंगे।
वहीं आनंद राठी वेल्थ के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मनीष श्रीवास्तव कहते हैं कि बढ़ा हुआ ड्यूटी-फ्री अलाउंस मिडिल क्लास के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है। अब निजी सामान पर कस्टम ड्यूटी 20% से घटकर 10% हो गई है। यानी 1 लाख रुपये का सामान लाने पर करीब 10,000 रुपये की सीधी बचत होगी। सैलरी पर चलने वाले परिवारों के लिए यह छोटी नहीं, बल्कि काम की राहत है और विदेश से सामान लाना अब सस्ता व आसान होगा।
जबकि BankBazaar के CEO अधिल शेट्टी का भी कहना है कि यह राहत भले ही बहुत बड़ी न हो, लेकिन रोजमर्रा में काम आने वाली है। खासकर सैलरी पाने वाले लोग और विदेश से लौट रहे NRI परिवार इस बदलाव से राहत महसूस करेंगे। इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू सामान पर ड्यूटी कम होने से सफर या भारत शिफ्ट होते वक्त खर्च का बोझ थोड़ा कम हो जाता है, जो पहले से EMI, बच्चों की पढ़ाई और इंश्योरेंस के खर्च संभाल रहे परिवारों के लिए काफी मायने रखता है।
बजट 2026 में लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत TCS घटाने को मिडिल क्लास के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। ग्रांट थॉर्नटन भारत की पार्टनर रिचा साहनी के मुताबिक, TCS भले ही बाद में टैक्स में एडजस्ट हो जाता है, लेकिन पैसे भेजते वक्त यह परिवारों के कैश फ्लो पर सीधा दबाव डालता है।
शिक्षा और इलाज पर TCS को 5% से घटाकर 2% करने से उन परिवारों को राहत मिलेगी, जो बच्चों की पढ़ाई या मेडिकल खर्च संभाल रहे हैं, क्योंकि इससे उनकी पैसों की तंगी कुछ हद तक कम होगी। वहीं, ओवरसीज टूर पैकेज पर कम TCS से विदेश घूमना भी थोड़ा आसान हो जाएगा।
अधिल शेट्टी बताते हैं कि पहले 5% TCS की वजह से बड़ी रकम कुछ समय के लिए फंस जाती थी। अब TCS कम होने से विदेश पढ़ाई, इलाज या यात्रा के लिए भुगतान करते वक्त परिवारों के हाथ में ज्यादा पैसा रहेगा। खासकर जो लोग एजुकेशन लोन लेने के बजाय अपनी बचत से खर्च करते हैं, उनके लिए इससे फाइनेंशियल प्लानिंग ज्यादा साफ और भरोसेमंद हो जाएगी।
मनीष कहते हैं कि इस बदलाव से परिवारों का कैश फ्लो बेहतर होगा। पहले TCS के कारण बड़ी रकम पहले ही देनी पड़ती थी। अब विदेश पढ़ाई के लिए 10 लाख रुपये भेजने पर 50,000 रुपये की जगह सिर्फ 20,000 रुपये TCS देना होगा। इसी तरह, 15 लाख रुपये के विदेशी टूर पर TCS 3 लाख रुपये से घटकर करीब 30,000 रुपये रह गया है। भले ही यह टैक्स बाद में एडजस्ट हो जाता हो, लेकिन पहले पैसे जुटाने की परेशानी अब काफी कम हो जाएगी।
विदेश में काम करने के बाद भारत लौटने वाले परिवारों के लिए बजट 2026 ने राहत दी है। मनोज मिश्रा के मुताबिक, नए बैगेज नियमों से घरेलू और निजी सामान भारत लाना अब पहले से कहीं आसान हो गया है।
अब जो लोग दो साल या उससे ज़्यादा समय बाद भारत लौटते हैं, वे 7.5 लाख रुपये तक का सामान बिना ड्यूटी ला सकते हैं, जबकि पहले यह सीमा 5 लाख रुपये थी। वहीं, एक साल या उससे ज्यादा विदेश रहने वालों के लिए यह छूट 3 लाख रुपये और तीन से बारह महीने रहने वालों के लिए 1.5 लाख रुपये तय की गई है।
वहीं मनीष का कहना है कि विदेश से भारत शिफ्ट करने वालों के लिए बैगेज नियम को व्यवहारिक बनाना एक बेहतर फैसला है, इससे कागजी झंझट घटा है और ज्यादातर प्रक्रिया ऑनलाइन हो जाएगी। कई निजी सामान अब रजिस्ट्रेशन के तुरंत बाद क्लियर हो सकेंगे, जिससे भारत लौटने वाले परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।
इन साफ-सुथरी सीमाओं और आसान नियमों से कस्टम पर होने वाली बहस कम होगी, खर्च घटेगा और भारत लौट रहे परिवारों के लिए पूरी प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद बन जाएगी।
अधिल शेट्टी के मुताबिक, इन बदलावों से सिर्फ खर्च ही नहीं घटेगा, बल्कि अनिश्चितता भी कम होगी। परिवारों को पहले से अंदाजा रहेगा कि उन्हें कितनी ड्यूटी देनी पड़ सकती है, जिससे भारत लौटने की तैयारी और पूरी शिफ्टिंग प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
बजट 2026 में कैंसर और रेयर डिजीज के इलाज को लेकर भी राहत भरे फैसले किए गए हैं। मनोज मिश्रा के अनुसार, 17 कैंसर दवाओं को ड्यूटी से छूट देने और इस सुविधा को कुछ रेयर बीमारियों तक बढ़ाने से इलाज का कुल खर्च सीधे तौर पर कम होगा।
मनीष कहते हैं कि यह बदलाव गंभीर बीमारी से जूझ रहे परिवारों के लिए बड़ी राहत है। 17 कैंसर दवाओं पर कस्टम ड्यूटी हटाई गई है और रेयर डिजीज की सूची 58 बीमारियों तक बढ़ा दी गई है। कई दवाएं महीने की 20,000 से 1.5 लाख रुपये तक की होती हैं, ऐसे में सालाना 10 लाख के इलाज पर सिर्फ ड्यूटी हटने से करीब 1 लाख रुपये की बचत हो सकती है। इससे इलाज का आर्थिक बोझ कुछ हद तक कम होगा।
अक्सर इलाज का 60% से ज्यादा खर्च दवाओं पर ही होता है, खासकर जब दवाएं विदेश से मंगाई जाती हैं। ऐसे में ड्यूटी हटने से इन दवाओं की कीमत घटेगी और मरीजों को तुरंत राहत मिलेगी। हालांकि कुछ पेटेंटेड और एडवांस इलाज अभी भी महंगे रह सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक चलने वाले इलाज में यह राहत परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ काफी हद तक कम कर देगी।
अधिल शेट्टी का भी कहना है कि लंबे इलाज के दौरान ड्यूटी में थोड़ी सी कटौती भी समय के साथ बड़ी बचत में बदल जाती है, जिससे मेडिकल इमरजेंसी में कर्ज लेने या संपत्ति बेचने की मजबूरी कम हो सकती है।
छोटे टैक्सपेयर्स के लिए बजट 2026 की वन-टाइम फॉरेन एसेट डिस्क्लोज़र स्कीम को एक्सपर्ट्स ने सुरक्षित और भरोसेमंद रास्ता बताया है। ग्रांट थॉर्नटन भारत की पार्टनर रिचा साहनी के मुताबिक, यह स्कीम उन लोगों के लिए लाई गई है जिन्होंने अनजाने में विदेशी इनकम या एसेट्स की सही जानकारी नहीं दी थी।
यह पहल पेनल्टी का दबाव कम करती है और ब्लैक मनी एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई से राहत देती है, जिससे छोटे टैक्सपेयर्स बिना डर के अपनी गलती सुधार सकते हैं।
अधिल शेट्टी का कहना है कि ESOPs, विदेशी बैंक अकाउंट या पुराने विदेशी निवेश रखने वाले छोटे टैक्सपेयर्स के लिए यह एक साफ और कम जोखिम वाला विकल्प है। इससे आगे चलकर विवाद और अनिश्चितता घटेगी और टैक्स नियमों का पालन करना आसान हो जाएगा।
सभी एक्सपर्ट इस बात पर सहमत है कि कुल मिलाकर, बजट 2026 में किए गए ये बदलाव मिडिल क्लास परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतों को ध्यान में रखकर किए गए हैं, चाहे बात विदेश यात्रा की हो, बच्चों की पढ़ाई की, इलाज के खर्च की या भारत लौटने की तैयारी की। तीनों एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह बजट बड़े-बड़े वादों से ज्यादा छोटी लेकिन काम की राहत पर फोकस करता है, जो समय के साथ मिडिल क्लास की फाइनेंशियल प्लानिंग को आसान बना सकती है।