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लिस्टेड कंपनियों ने अनलिस्टेड को कॉरपोरेट टैक्स में पछाड़ा

ग्रांट थॉर्नटन भारत की पार्टनर रिचा साहनी का कहना है कि लिस्टेड कंपनियों को पूंजी जुटाने के बेहतर साधन मिलते हैं।

Last Updated- February 06, 2026 | 4:06 PM IST
Tax

भारत में अब स्टॉक मार्केट में लिस्टेड कंपनियां टैक्स कलेक्शन में अनलिस्टेड कंपनियों को पीछे छोड़ रही हैं। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की Market Pulse रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में अनलिस्टेड कंपनियों का कुल कॉर्पोरेट टैक्स में हिस्सा घटकर 47% रह गया। यह हिस्सा FY19 में 55.6% था।

महामारी ने बढ़ाया अंतर

एनएसई के आंकड़ों के मुताबिक, कोविड-19 महामारी के समय लिस्टेड और अनलिस्टेड कंपनियों के बीच कर भुगतान में बड़ा अंतर आया। FY21 में लिस्टेड कंपनियों ने टैक्स भुगतान में 22% की बढ़ोतरी की, जबकि अनलिस्टेड कंपनियों का टैक्स कलेक्शन 45% घट गया। इस कारण लिस्टेड कंपनियों का कुल कॉर्पोरेट टैक्स में हिस्सा 60.6% तक पहुंच गया – यह 18 साल का हाई था।

अनलिस्टेड कंपनियां फिर से मजबूत

जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था खुली, अनलिस्टेड कंपनियों ने तेजी से वापसी की। FY25 में उनका योगदान बढ़कर 47% हो गया, हालांकि यह महामारी से पहले FY19 के स्तर 55.6% से अभी भी कम है।

लिस्टेड कंपनियों को पूंजी का फायदा

ग्रांट थॉर्नटन भारत की पार्टनर रिचा साहनी का कहना है कि लिस्टेड कंपनियों को पूंजी जुटाने के बेहतर साधन मिलते हैं। अनलिस्टेड कंपनियां आमतौर पर छोटी होती हैं और अधिकतर बैंक लोन पर निर्भर रहती हैं। वहीं, लिस्टेड कंपनियों के पास बॉन्ड और इक्विटी मार्केट तक पहुंच होती है, जिससे वे निवेश बढ़ा सकती हैं, तकनीक में सुधार कर सकती हैं और लागत नियंत्रण कर सकती हैं।

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सरकार के पास बेहतर डेटा, टैक्स संग्रह में मदद

साहनी ने यह भी बताया कि अब सरकार के पास कई स्रोतों से कंपनियों की जानकारी आती है। इसमें Statement of Financial Transaction, विभागों और देशों के बीच सूचना आदान-प्रदान और GST डेटा शामिल हैं। इससे कॉर्पोरेट टैक्स संग्रह की प्रक्रिया और भी मजबूत होती है।

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First Published - February 6, 2026 | 4:06 PM IST

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