facebookmetapixel
Advertisement
तेल, रुपये और यील्ड का दबाव: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी अस्थिरता, लंबी अनिश्चितता के संकेतवैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमानआध्यात्मिक पर्यटन में भारत सबसे आगे, एशिया में भारतीय यात्रियों की रुचि सबसे अधिकबांग्लादेश: चुनौतियों के बीच आजादी का जश्न, अर्थव्यवस्था और महंगाई बनी बड़ी चुनौतीपश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सतर्क, रणनीतिक तेल भंडार विस्तार प्रक्रिया तेजGST कटौती से बढ़ी मांग, ऑटो और ट्रैक्टर बिक्री में उछाल: सीतारमणसरकार का बड़ा फैसला: पीएनजी नेटवर्क वाले इलाकों में नहीं मिलेगा एलपीजी सिलिंडर

चांदी के भाव में ऐतिहासिक गिरावट: 1980 और 2011 जैसे क्रैश की आहट, क्या और गिरेंगे दाम?

Advertisement

यदि कीमतें लगातार 70 डॉलर प्रति औंस से नीचे टिकती हैं, तो 54.50 डॉलर प्रति औंस तक और दबाव बन सकता है। भाव 94.80 डॉलर के ऊपर जाने पर ही तेज वापसी की उम्मीद

Last Updated- February 06, 2026 | 3:47 PM IST
Silver Price Crash
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

इस साल चांदी कीमतों में भारी उथल पुथल देखने को मिल रहा है। सबसे पहले इस जनवरी के अंत में इसके भाव तेजी से बढ़कर सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए ऑल टाइम हाई पर पहुंच गए थे। इस स्तर को छूने के दूसरे दिन से चांदी के भाव तेजी से गिरने लगे और अब इसके भाव क्रैश कर गए हैं। चांदी की कीमतों में यह गिरावट 1980 और 2011 में जैसी नजर आ रही है। लेकिन है।

ऑल टाइम हाई से चांदी के भाव धड़ाम

अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स पर चांदी के वायदा भाव 29 जनवरी को 121.79 डॉलर के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गए थे। लेकिन इसके अगले दिन से भाव गिरने लगे और आज इसके भाव ने 63.90 डॉलर के भाव पर दिन का निचला स्तर छू लिया। इस तरह चांदी के भाव ऑल टाइम हाई से 47.53 फीसदी गिर चुके हैं। हालांकि खबर लिखे जाने के समय चांदी सुधरकर 73.63 डॉलर प्रति औंस के भाव पर कारोबार कर रही थी।

घरेलू बाजार एमसीएक्स पर चांदी के वायदा भाव ने 29 जनवरी को 4,20,048 रुपये के भाव पर सर्वोच्च स्तर छुआ था। आज इसके भाव 2,29,187 रुपये के निचले स्तर तक चले गए। हालांकि 2 फरवरी को इसके भाव 2,25,805 रुपये किलो तक लुढ़क गए थे।

Also Read: Gold, Silver Price Today: सोना हुआ सस्ता, चांदी की चमक भी पड़ी फीकी

चांदी में 1980 व 2011 जैसी गिरावट

चांदी की कीमतों में आ रही गिरावट दशकों पहले की ऐतिहासिक गिरावट की ओर इशारा कर रही है। केडिया एडवाइजरी की रिपोर्ट में कहा कि चांदी की कीमतों में यह गिरावट चांदी के ऐतिहासिक पतनों 1980 (-65%) और 2011 (-35%) के साथ तुलना का कारण बन रही है। हालांकि गिरावट पहले जैसी ही दिखती है, लेकिन इसके पीछे की असली वजह अलग है।

1980 से तुलना मुख्यतः गिरावट के पैमाने को लेकर है। उस समय बाजार में अत्यधिक लीवरेज और सीमित खिलाड़ियों की भारी पोजिशनिंग थी, जिसका अंत नियामकीय हस्तक्षेप के साथ हुआ। इसके विपरीत 2026 की गिरावट व्यापक रही, जिसमें हेज फंड, ETF, रिटेल निवेशक और सिस्टमैटिक रणनीतियां सभी शामिल थे और किसी एक बड़े खिलाड़ी या नीतिगत सख्ती की भूमिका नहीं रही।

2011 का क्रैश मैकेनिकल तौर पर ज्यादा समान दिखता है, जहां मौद्रिक नीति की उम्मीदों में बदलाव, लगातार मार्जिन बढ़ोतरी और तेज लिक्विडेशन ने गिरावट को बढ़ाया था। हालांकि आज का सबसे बड़ा अंतर मांग की संरचना में है। 2011 में चांदी मुख्यतः निवेश-आधारित ट्रेड थी, जबकि 2026 में औद्योगिक उपयोग मांग की रीढ़ बन चुका है। जो पिछले चक्रों में मौजूद नहीं था।

कीमतों में गिरावट के पीछे क्या था ट्रिगर?

केडिया एडवाइजरी के मुताबिक मुख्य रूप से यूएस मौद्रिक नीति में बदलाव ने इस गिरावट को प्रेरित किया। चांदी कीमतों में मोड़ तब आया जब अमेरिकी मौद्रिक नीति की उम्मीदों का अचानक री-प्राइसिंग हुआ। हॉकिश रुख के कारण वास्तविक यील्ड लगभग 40–50 बेसिस प्वाइंट बढ़ी और डॉलर इंडेक्स (DXY) सिर्फ 7 दिनों में 2.5% से अधिक मजबूत हो गया, जिससे जनवरी का जोखिम लेने वाला माहौल पलट गया।

वास्तविक यील्ड के प्रति ऐतिहासिक रूप से 2.5–3 गुना संवेदनशील रहने वाली चांदी में तेज गिरावट देखने को मिली। कीमतें प्रमुख तकनीकी स्तरों से नीचे टूटते ही एक्सचेंजों ने मार्जिन आवश्यकताओं को 20 से 25% बढ़ा दिया, जिससे मजबूरन पोजीशन काटने (फोर्स्ड लिक्विडेशन) शुरू हो गए। लंबी अवधि की मूविंग एवरेज टूटने पर एल्गोरिदम बिकवाली तेज हो गई और ETF रिडेम्पशन से ‘पेपर सप्लाई’ बढ़ गई। एक हफ्ते के भीतर फ्यूचर्स ओपन इंटरेस्ट 35 से 40% घट गया, जो क्लासिक डी लीवरेजिंग कैस्केड की पुष्टि करता है।

Also Read: ‘सोना-चांदी-बिटकॉइन की गिरती कीमतें एक बड़ा मौका’, रॉबर्ट कियोसाकी ने निवेशकों से ऐसा क्यों कहा?

अब कीमतों की दिशा मूल कारकों की ओर लौटी

महत्वपूर्ण बात यह भी है कि 2026 की यह गिरावट भौतिक मांग में कमी या खनन आपूर्ति में तेज बढ़ोतरी के कारण नहीं हुई है। इसके बजाय यह ऊंची ब्याज दरों के माहौल में लीवरेज के दोबारा मूल्यांकन (री-प्राइसिंग) का परिणाम है। इस दौरान वोलैटिलिटी तेजी से रीसेट हुई, सट्टेबाजी की अति साफ हो गई और कीमतों की दिशा फिर से मूलभूत कारकों की ओर लौटने लगी।

बेकाबू हुई चांदी के पीछे की कहानी

केडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 में चांदी की शुरुआत लगभग 72.40 डॉलर प्रति औंस के आसपास होने के बाद यह जनवरी के अंत तक महीने के भीतर करीब 68 फीसदी उछलकर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई। इस तेजी को भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम, मजबूत औद्योगिक मांग की उम्मीदों और फ्यूचर्स व ईटीएफ में आक्रामक पोजिशनिंग ने बढ़ावा दिया। कुल खपत का लगभग 55–60% हिस्सा औद्योगिक मांग से आता है, जो सोलर इंस्टॉलेशन (सालाना 40–45% वृद्धि), इलेक्ट्रिफिकेशन और इलेक्ट्रॉनिक्स के कारण मजबूत बना रहा।

साथ ही निवेशकों ने वैश्विक स्तर पर आसान मौद्रिक नीति की उम्मीदों और बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों ने सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) के रूप में चांदी में दिलचस्पी बढ़ाई। हालांकि, कम वोलैटिलिटी और तेजी से बढ़ते लीवरेज के बीच यह रैली धीरे-धीरे पूरी तरह मोमेंटम-आधारित होती चली गई। फ्यूचर्स ओपन इंटरेस्ट तेजी से बढ़ा, जनवरी में ETF में 3 अरब डॉलर से अधिक का निवेश आया और रिटेल भागीदारी भी उछल गई।

जनवरी के अंत तक चांदी एक ‘क्राउडेड मोमेंटम ट्रेड’ ( जब बहुत ज्यादा लोग सिर्फ कीमत तेजी से बढ़ रही है इसलिए उसी चीज को खरीदने लगते हैं) बन चुकी थी, जिससे बाजार ब्याज दरों, डॉलर और मार्जिन शर्तों में बदलाव के प्रति बेहद संवेदनशील हो गया।

चांदी की कीमतों में अब क्या रहने वाला है स्तर?

केडिया एडवाइजरी की रिपोर्ट के अनुसार तकनीकी दृष्टि से चांदी तब तक कमजोर बनी रह सकती है, जब तक यह प्रमुख रेजिस्टेंस के नीचे कारोबार कर रही है। यदि कीमतें लगातार 70 डॉलर प्रति औंस से नीचे टिकती हैं, तो 54.50 डॉलर प्रति औंस तक और दबाव बन सकता है। यह स्तर लंबी अवधि के रिट्रेसमेंट और पुराने कंसोलिडेशन का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। चांदी की कीमतों में मुख्य रेजिस्टेंस: 94.80 डॉलर प्रति औंस पर एक अहम सप्लाई जोन है।

जब तक कीमतें इस स्तर के नीचे रहती हैं, तब तक व्यापक तकनीकी नजरिया कमजोर से न्यूट्रल रहेगा और तेजी आने पर भी बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है। केवल 94.80 डॉलर के ऊपर मजबूत ब्रेकआउट ही तेजी की वापसी का स्पष्ट संकेत देगा। कुल मिलाकर 2026 की चांदी गिरावट पैमाने में 1980 और मैकेनिक्स में 2011 जैसी दिखती है, लेकिन संरचनात्मक रूप से अलग है। यह तेज, गहरी और वित्तीय कारणों से हुई आधुनिक लीवरेज-आधारित गिरावट है। जब तक कीमतें 94.80 डॉलर से नीचे हैं, रुख सतर्क रहेगा और 70 डॉलर के टूटने पर गिरावट का जोखिम बना रहेगा।

Advertisement
First Published - February 6, 2026 | 3:47 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement