facebookmetapixel
Advertisement
बाजार में उतार-चढ़ाव से बदला फंडरेजिंग ट्रेंड, राइट्स इश्यू रिकॉर्ड स्तर पर, QIP में भारी गिरावटपश्चिम एशिया संकट: MSME को कर्ज भुगतान में राहत पर विचार, RBI से मॉरेटोरियम की मांग तेजRCB की बिक्री से शेयरहोल्डर्स की बल्ले-बल्ले! USL दे सकती है ₹196 तक का स्पेशल डिविडेंडतेल में बढ़त से शेयर और बॉन्ड में गिरावट; ईरान का अमेरिका के साथ बातचीत से इनकारगोल्डमैन सैक्स ने देसी शेयरों को किया डाउनग्रेड, निफ्टी का टारगेट भी घटायाकिधर जाएगा निफ्टीः 19,900 या 27,500; तेल और भू-राजनीति तनाव से तय होगा रुखसंघर्ष बढ़ने के भय से कच्चे तेल में 4% की उछाल, कीमतें एक बार फिर 100 डॉलर के पारGold Rate: तेल महंगा होने से सोना 2% फिसला, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोरEditorial: दिवालिया समाधान से CSR और ऑडिट सुधार तक बड़े बदलावसरकारी बैंकों में प्रमोशन के पीछे की कहानी और सुधार की बढ़ती जरूरत

सोना खरीदने का सही समय! ग्लोबल ब्रोकरेज बोले- 6,200 डॉलर प्रति औंस तक जाएगा भाव

Advertisement

तेज गिरावट और भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद UBS का दावा, सोने की चमक अभी बाकी है, चांदी पर सतर्क रहने की सलाह

Last Updated- February 05, 2026 | 12:05 PM IST
Gold Price Outlook

Gold Price Outlook: जिस वक्त बाजार यह सोचने लगा था कि सोने की रैली शायद खत्म हो चुकी है, उसी वक्त UBS ने बड़ा दावा कर दिया है। ग्लोबल ब्रोकरेज के मुताबिक, सोने का बुल-मार्केट अभी जिंदा है और यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती। UBS का कहना है कि 2026 के मध्य तक सोने की कीमतें 6,200 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं, जो मौजूदा स्तर से करीब 25 प्रतिशत ज्यादा है।

UBS मानता है कि फिलहाल बाजार में थोड़ी घबराहट और उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। आने वाले कुछ दिनों में सोना 4,500 से 4,800 डॉलर प्रति औंस के दायरे में अटक सकता है। वजह है मार्जिन कॉल्स और जबरदस्त वोलैटिलिटी। लेकिन बैंक का साफ कहना है कि यह सिर्फ एक ठहराव है, मंजिल नहीं। इसके बाद सोने में फिर तेजी लौटने की पूरी संभावना है।

चांदी में मची अफरातफरी

जहां सोना संभलने की कोशिश कर रहा है, वहीं चांदी पूरी तरह झटके में है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी के दाम एक ही दिन में 7 प्रतिशत से ज्यादा टूटकर 77 डॉलर प्रति औंस पर आ गए। भारत में MCX पर हालात और भी डराने वाले रहे, जहां चांदी करीब 2.44 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई और सिर्फ एक हफ्ते में 21 प्रतिशत से ज्यादा गिर गई।

UBS ने निवेशकों को साफ चेतावनी दी है। बैंक का कहना है कि अभी चांदी में लंबी अवधि के निवेश की बात करना जल्दबाजी होगी। हालिया तेज उतार-चढ़ाव ने जोखिम काफी बढ़ा दिया है। UBS के मुताबिक, चांदी में और गिरावट के बाद ही जोखिम और रिटर्न का संतुलन बेहतर होगा।

रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद अचानक धड़ाम

30 जनवरी को सोने ने निवेशकों को चौंका दिया। एक दिन पहले जहां दाम रिकॉर्ड स्तर पर थे, वहीं अगले ही दिन सोना करीब 12 प्रतिशत तक टूट गया। बाद में थोड़ी रिकवरी जरूर आई, लेकिन दिन का अंत 8.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ हुआ। UBS के मुताबिक, यह 13 साल में सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट थी।

UBS के अनुसार यह गिरावट किसी एक वजह से नहीं आई। हालिया तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू किया। फ्यूचर्स मार्केट में लिक्विडिटी कम हुई। इसके साथ ही ब्याज दरों और अमेरिकी डॉलर की मजबूती को लेकर बढ़ती चिंताओं ने आग में घी डालने का काम किया।

बाजार की बेचैनी तब और बढ़ गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने केविन वार्श को फेड चेयर के लिए नामित किया। वार्श को सख्त मौद्रिक नीति का समर्थक माना जाता है। इस खबर के बाद सोना और बिटकॉइन दबाव में आ गए, जबकि डॉलर में हल्की मजबूती देखने को मिली।

गिरावट भरोसे की नहीं, मजबूरी की कहानी

deVere Group के सीईओ नाइजेल ग्रीन का कहना है कि सोने में आई गिरावट भरोसे के टूटने की वजह से नहीं थी। असली वजह वे निवेशक थे जिन्होंने ज्यादा उधार लेकर पोजिशन बनाई थी और अब मजबूरी में बेचने पड़े। उनके मुताबिक, जब ऐसे मजबूर विक्रेता बाजार से बाहर हो जाते हैं, तो दबाव खुद ही कम हो जाता है और बाजार सांस लेने लगता है।

गोल्ड बुल मार्केट अभी जिंदा है

UBS का कहना है कि सोने का बुल-मार्केट सिर्फ डर कम होने या दाम ज्यादा होने से खत्म नहीं होता। यह तब खत्म होता है जब सेंट्रल बैंक अपनी विश्वसनीयता पूरी तरह बहाल कर लेते हैं और मौद्रिक नीति में बड़ा मोड़ आता है। UBS के मुताबिक, केविन वार्श अभी वैसी विश्वसनीयता नहीं दिखाते, जैसी कभी पॉल वोल्कर के दौर में देखी गई थी। इसलिए सोने की तेजी को खत्म मानना जल्दबाजी होगी।

अब भी अधूरी है कहानी

UBS का अनुमान है कि सोना फिलहाल अपने बुल-मार्केट के मध्य से अंतिम दौर में है। इस दौर में नए रिकॉर्ड बनते हैं, लेकिन रास्ते में 5 से 8 प्रतिशत की गिरावट भी आती रहती है। UBS साफ कहता है कि वे हालात अभी बने ही नहीं हैं जो आमतौर पर सोने की तेजी के अंत की घोषणा करते हैं।

Advertisement
First Published - February 5, 2026 | 12:05 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement