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बाजार में उतार-चढ़ाव से बदला फंडरेजिंग ट्रेंड, राइट्स इश्यू रिकॉर्ड स्तर पर, QIP में भारी गिरावट

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इस साल राइट्स इश्यू या निर्गम की संख्या दोगुनी से भी ज्यादा बढ़कर 51 हो गई, जो वित्त वर्ष 1997 के बाद सबसे अधिक है

Last Updated- March 26, 2026 | 10:50 PM IST
Right Issues

वित्त वर्ष 2025-26 में शेयर बाजार में आई उथल-पुथल के कारण कंपनियों के पूंजी जुटाने के रुझान में बड़ा बदलाव आया है। मौजूदा हालात में राइट्स निर्गम की संख्या कई दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई वहीं पात्र संस्थागत नियोजन (क्यूआईपी) में भारी गिरावट देखने को मिली है।

इस साल राइट्स इश्यू या निर्गम की संख्या दोगुनी से भी ज्यादा बढ़कर 51 हो गई, जो वित्त वर्ष 1997 के बाद सबसे अधिक है। कंपनियों ने ऐसे निर्गम से लगभग 44,290 करोड़ रुपये जुटाए हैं। प्राइम डेटाबेस द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार जुटाई गई पूंजी के मामले में यह वित्त वर्ष 2021 के बाद सबसे अच्छा साल रहा।

वित्त वर्ष 2026 में सबसे बड़ा राइट्स इश्यू अदाणी समूह की प्रमुख कंपनी अदाणी एंटरप्राइजेज का था जिसने लगभग 24,930 करोड़ रुपये जुटाये। इसके बाद महिंद्रा ऐंड महिंद्रा फाइनैंशियल सर्विसेज का स्थान रहा जिसने करीब 3,000 करोड़ रुपये जुटाये।

इसके उलट क्यूआईपी निर्गम आधे से भी कम रह गई। वित्त वर्ष 2026 में 29 फर्मों ने क्यूआईपी के माध्यम से 62,954 करोड़ जुटाये जबकि इसके पिछले साल 85 फर्मों ने 1.31 लाख करोड़ रुपये जुटाए थे। क्यूआईपी के इस आंकड़े मे जुलाई में भारतीय स्टेट बैंक द्वारा जुटाए गए 25,000 करोड़ रुपये के निर्गम का बड़ा योगदान रहा।

कंपनियों की कमाई में नरमी, अमेरिकी शुल्क को लेकर चिंता और हाल में अमेरिका-इजरायल के ईरान से युद्ध के कारण निवेशकों की बाजार में दिलचस्पी कम हो गई जिससे शेयर बाजार में भारी गिरावट आई है। तेल की बढ़ी हुई कीमतों ने महंगाई और वैश्विक आर्थिक तनाव के डर को और बढ़ा दिया है।

निवेश बैंकरों ने कहा कि बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण क्यूआईपी को पूरा करना मुश्किल हो जाता है, खास तौर पर इसलिए क्योंकि ज्यादातर निर्गम स्मॉलकैप और और मिडकैप सेगमेंट में होते हैं और इनमें सबसे ज्यादा गिरावट आई है।

इक्विरस कैपिटल के प्रबंध निदेशक और इन्वेस्टमेंट बैंकिंग के प्रमुख भावेश ए शाह ने कहा, ‘क्यूआईपी में बाहरी निवेशकों से पूंजी जुटाई जाती है जो शायद पहले से निवेशक न हों, इस वजह से वे बाजार के हालात के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं।’

शाह ने कहा, ‘दूसरी ओर राइट्स निर्गम में मौजूदा शेयरधारकों से पूंजी जुटाई जाती है जो पहले से ही कंपनी के निवेशक होते हैं। उठापटक वाले बाजार में यह बात राइट्स निर्गम को ज्यादा व्यावहारिक बनाती है।’

नियामकीय बदलावों ने भी राइट्स निर्गम का आकर्षण बढ़ाया है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने राइट्स निर्गम की प्रक्रिया को आसान बनाया है। इसके तहत बोर्ड की मंजूरी के बाद निर्गम लाने समयसीमा को घटाकर 23 कार्यदिवस कर दिया गया है और निर्गम का मसौदा पत्र जमा कराने की जरूर खत्म कर दी गई है।

इसके साथ मर्चेंट बैंकर नियुक्त करने की आवश्यकता को भी समाप्त कर दिया गया है। संशोधित व्यवस्था के तहत प्रवर्तकों को यह अनुमति मिलती है कि वे अपनी हिस्सेदारी को कुछ खास निवेशकों के लिए छोड़ दें, बशर्ते इसकी जानकारी पहले से दी गई हो।

राइट्स निर्गम सूचीबद्ध कंपनियों को अपने मौजूदा शेयरधारकों को शेयर बेचकर पूंजी जुटाने में सक्षम बनाते हैं और आम तौर पर ये शेयर रियायती दर पर दिए जाते हैं जिससे शेयरधारकों को फायदा होता है।

बैंकरों ने बताया कि कंपनियां आम तौर पर क्यूआईपी को ज्यादा पसंद करती हैं क्योंकि इनसे नए निवेशक लाने में मदद मिलती है। हालांकि इन दोनों तरीकों का भविष्य बाजार की स्थिरता पर निर्भर करता है।

एसबीआई कैप्स में कार्यकारी उपाध्यक्ष और समूह प्रमुख (ईसीएम) अमरेंद्र कुमार सिंह ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि लार्ज कैप की अगुआई में 2027 में चुनिंदा क्षेत्रों में फिर से तेजी आएगी। नियमन में ढील और प्रवर्तकों की पसंद के चलते राइट्स निर्गम को अच्छी प्रतिक्रिया मिलती रहेगी।’

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First Published - March 26, 2026 | 10:38 PM IST

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