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आम यूजर्स के लिए UPI लेनदेन पूरी तरह रहेगा फ्री, MDR चार्जेस की खबरों को सरकार ने किया खारिज

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सरकार ने कहा कि भविष्य में अगर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया भी जाता है, तो यह आम जनता पर नहीं बल्कि केवल कुछ बड़े व्यापारियों पर ही लागू होगा

Last Updated- August 09, 2026 | 9:05 AM IST
Unified Payments Interface (UPI)
प्रतीकात्मक तस्वीर | फोटो क्रेडिट: AdobeStock

डिजिटल पेमेंट करने वाले करोड़ों भारतीयों के लिए राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि आम लोगों के लिए यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) से लेनदेन पूरी तरह फ्री रहेगा। सरकार ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को भी खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि किसी बाहरी दबाव की वजह से UPI से जुड़ी नीतियों में बदलाव किए जा रहे हैं।

वित्त मंत्रालय ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि UPI के जरिए पेमेंट करने वाले आम ग्राहकों से कोई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लिया जाएगा। वहीं, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने वाले ट्रांजैक्शन यानी P2P पेमेंट भी पहले की तरह पूरी तरह फ्री रहेंगे।

मर्चेंट डिस्काउंट रेट पर सरकार का प्लान

भविष्य में अगर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होता है, तो इसका असर आम लोगों पर नहीं पड़ेगा। यह सिर्फ कुछ बड़े कारोबारियों के चुनिंदा ट्रांजैक्शन पर ही लगाया जाएगा। वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि MDR एक तय सीमा से ज्यादा वाले कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर ही लागू होगा। इसकी दर क्रेडिट और डेबिट कार्ड पर लगने वाले MDR के मुकाबले काफी कम और मामूली रखी जाएगी।

भविष्य में MDR कब और कितना लगाया जाए, इसका फैसला नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की ‘UPI एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी’ करेगी। हालांकि, इसके लिए पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10A में बदलाव करना जरूरी होगा।

सरकार के मुताबिक, इस कानूनी बदलाव का मकसद UPI की तकनीक को और बेहतर बनाना, पेमेंट सिस्टम को मजबूत करना और भविष्य में सामने आने वाले जोखिमों से निपटने के लिए इसे तैयार करना है।

Also Read: RBI के नए ड्राफ्ट नियमों से NBFC पर बढ़ा दबाव, बजाज फाइनैंस समेत कई कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट

बाहरी दबाव की खबरें पूरी तरह गलत

UPI से जुड़ी नीतियों में किसी बाहरी दबाव के असर की खबरों पर सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई है। वित्त मंत्रालय ने इन दावों को पूरी तरह झूठा और भ्रामक बताया है।

मंत्रालय ने कहा कि अगर सरकार पर किसी तरह का बाहरी दबाव होता, तो 2016 में UPI की शुरुआत नहीं की जाती। इसके अलावा, जनवरी 2020 से UPI को व्यापारियों और आम नागरिकों के लिए मुफ्त भी नहीं किया जाता।

सरकार के मुताबिक, इसी नीति के चलते UPI आज दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बन पाया है।

बड़े व्यापारियों पर ही पड़ सकता है असर

डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री का मानना है कि सरकार ने जिस ‘थ्रेशोल्ड’ यानी तय सीमा की बात की है, उसका मतलब है कि भविष्य में MDR सिर्फ ज्यादा टर्नओवर वाले बड़े व्यापारियों पर ही लगाया जा सकता है।

पिछले साल पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने भी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को पत्र लिखकर बड़े व्यापारियों के लिए 0.3 फीसदी की मामूली MDR दर लागू करने का सुझाव दिया था। PCI के मुताबिक, देश में करीब 6 करोड़ व्यापारी ई-पेमेंट इस्तेमाल करते हैं। इनमें लगभग 90 फीसदी छोटे व्यापारी हैं, जिनका सालाना टर्नओवर 20 लाख रुपये से कम है।

PCI के अनुसार, बाकी करीब 50 लाख व्यापारी तय सीमा से ऊपर आते हैं। इनमें ऐसे बड़े कारोबारी शामिल हैं, जिनके पास PoS मशीनें या ई-कॉमर्स वेबसाइट्स हैं और जो कार्ड से पेमेंट लेते हैं। ये बड़े व्यापारी पहले से ही अलग-अलग कार्ड पेमेंट पर MDR देते हैं, जिसकी दर करीब 0.9 फीसदी से 2 फीसदी तक होती है।

हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी UPI पर MDR को लेकर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि UPI पर MDR लगाने की चर्चा अभी समय से पहले है। उनके मुताबिक, रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम को और मजबूत बनाने के लिए लगातार निवेश की जरूरत है।

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First Published - August 9, 2026 | 8:52 AM IST

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