facebookmetapixel
Advertisement
अमेरिका में जन्म से नागरिकता पाना होगा मुश्किल, ट्रंप ने जारी किए दो नए आदेशडीपफेक और AI कंटेंट पर सरकार ने बढ़ाई सख्ती, मेटा से मांगी सुधार की रिपोर्टFCRA संशोधन विधेयक पर अगले सप्ताह संसद में घमासान के आसार, सरकार ने आलोचना की खारिजRBI के नए ड्राफ्ट नियमों से NBFC पर बढ़ा दबाव, बजाज फाइनैंस समेत कई कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावटEditorial: डिजिटल पेमेंट को टिकाऊ बनाना है तो जीरो MDR पर नए सिरे से सोचना जरूरीशेयर बाजार में Authorized Persons के नियम होंगे कड़े, Brokers की Compliance जिम्मेदारी भी बढ़ेगीचार महीने की बिकवाली के बाद FPI की वापसी, भारतीय बाजार में Consumer और IT शेयरों पर फोकसSBI Q1 results: मुनाफा 10.23% बढ़कर ₹21,121 करोड़ पहुंचा, लोन ग्रोथ के चलते शानदार प्रदर्शननए Closing Auction System के बाद बाजार हुआ स्थिर, आखिरी मिनटों की उठा-पटक में कमीPM Surya Ghar Yojana के अगले चरण की तैयारी, रूफटॉप सोलर में बैटरी स्टोरेज जोड़ने पर विचार

RBI के नए ड्राफ्ट नियमों से NBFC पर बढ़ा दबाव, बजाज फाइनैंस समेत कई कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट

Advertisement

आरबीआई के प्रस्तावित नियमों से एनबीएफसी की रिवॉल्विंग क्रेडिट सुविधा प्रभावित हो सकती है। इससे बजाज फाइनैंस समेत कई कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट आई

Last Updated- August 07, 2026 | 10:48 PM IST
NBFC
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के शेयरों में आज भारी गिरावट आई और बजाज फाइनैंस का शेयर सबसे ज्यादा लुढ़का। यह गिरावट भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के उन प्रस्तावित नियमों के कारण आई, जिनसे एनबीएफसी के लिए रिवॉल्विंग क्रेडिट सुविधा देना मुश्किल हो जाएगा। इससे एनबीएफसी के ज्यादा मुनाफा देने वाले कारोबार पर खतरा मंडरा सकता है। 

इस तरह की ऋण की सुविधा देने में बजाज फाइनैंस सबसे आगे है। यही वजह है कि आरबीआई के प्रस्ताव से इसके शेयर में आज सबसे ज्यादा 6 फीसदी की गिरावट आई। इसी तरह टाटा कैपिटल में और एलऐंडटी फाइनैंस में करीब 3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों ने वृद्धि और मुनाफे पर पड़ने वाले संभावित असर का आकलन करने के बाद इन शेयरों की बिकवाली की।

आरबीआई ने गुरुवार को प्रस्ताव किया था कि एनबीएफसी को केवल ऐसे टर्म लोन देने चाहिए जिनके भुगतान की समय सीमा पहले से तय हो और एक बार कर्ज चुकाने के बाद मंजूर की गई लिमिट को दोबारा इस्तेमाल न किया जा सके। असल में इस प्रस्ताव से ऐसे लचीले ऋण उत्पाद पर रोक लग जाएगी जिनमें उधार लेने वाले एक ही क्रेडिट लाइन से बार-बार पैसे निकाल सकते हैं और उसका भुगतान कर सकते हैं। केंद्रीय बैंक ने 28 अगस्त तक इस पर राय मांगी है।

इस कदम का मकसद हमेशा बने रहने वाले जोखिम को रोकना है। इसमें उधार लेने वाले असली नकदी प्रवाह के बजाय नए कर्ज लेकर पुराना कर्ज चुकाते हैं। बैंकों के उलट एनबीएफसी के पास आम तौर पर उधार लेने वालों के नकदी प्रवाह की जानकारी नहीं होती, जिससे ऐसी गतिविधियों का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि बजाज फाइनैंस पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।

आईआईएफएल कैपिटल का अनुमान है कि लचीले ऋण उत्पाद इसके प्रबंधन के अधीन संप​त्ति के लगभग 15 फीसदी और लोन बुक के लगभग 20 फीसदी है। टाटा कैपिटल के मामले में यह एक अंक या निचले दो अंक तक रहने का अनुमान है। चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट ऐंड फाइनैंस में ऐसे ऋण का हिस्सा 1 फीसदी से कम और एलऐंडटी फाइनैंस और पूनावाला फिनकॉर्प के मामले में यह न के बराबर है।

आईआईएफएल कैपिटल के विरल शाह ने कहा कि इन प्रस्तावित नियमों का असर एनबीएफसी के नए ग्राहक बनाने और वृद्धि पर पड़ सकता है, खास कर जिनका ऐसे उत्पादों में काफी ज्यादा निवेश है। जिन ऋणदाताओं का इस क्षेत्र में कम ​दखल है उनकी फीस या रिटर्न पर भी असर पड़ सकता है क्योंकि दूसरे आसान उत्पादों के मुकाबले इसमें ज्यादा शुल्क मिलता है।

मैक्वेरी कैपिटल में फाइनैंशियल सर्विसेज शोध के प्रबंध निदेशक और प्रमुख सुरेश गणपति के अनुसार बाजार इस बात पर ध्यान देगा कि क्या बजाज फाइनैंस अपने लचीले पोर्टफोलियो को कम करने के दबाव में वित्त वर्ष 2027 के लिए 22-24 फीसदी ऋण वृद्धि के अनुमान में कोई बदलाव करता है या नहीं। उन्होंने कहा कि अभी भी इस बात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है कि आपूर्ति श्रृंखला के लिए कर्ज इस तरह के नियमों के दायरे में आएंगे या नहीं।

Advertisement
First Published - August 7, 2026 | 10:27 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement