हर साल भारत से लाखों छात्र पढ़ाई के लिए विदेश जाते हैं। लेकिन विदेश में पढ़ाई करना सस्ता नहीं होता। कॉलेज की फीस, रहने का खर्च और रोजमर्रा के बढ़ते खर्चों की वजह से कुल लागत काफी बढ़ जाती है। ऐसे में ज्यादातर परिवार एजुकेशन लोन का सहारा लेते हैं।
हालांकि, एजुकेशन लोन सिर्फ पढ़ाई का खर्च उठाने का जरिया नहीं है। अगर इसकी सही तरीके से प्लानिंग की जाए, तो यह इनकम टैक्स बचाने में भी मदद कर सकता है। भारत में इनकम टैक्स कानून में एजुकेशन लोन पर टैक्स में छूट के नियम हैं। इसका सही फायदा उठाकर आप लोन की कुल लागत को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
विदेश में पढ़ाई के लिए लिया गया एजुकेशन लोन टैक्स बचाने में भी मदद कर सकता है। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80E के तहत ऐसे लोन पर चुकाए गए ब्याज पर टैक्स में छूट का फायदा मिलता है। यह राहत उन छात्रों के लिए है, जिन्होंने 12वीं या उसके समकक्ष परीक्षा पास करने के बाद विदेश के किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय में अकादमिक, टेक्निकल, वोकेशनल या प्रोफेशनल कोर्स में एडमिशन लिया हो।
यानी अगर आप विदेश में उच्च शिक्षा के लिए एजुकेशन लोन लेते हैं, तो लोन के ब्याज पर मिलने वाली टैक्स में छूट से उसकी कुल लागत को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
टैक्सस्पैनर के CEO सुधीर कौशिक कहते हैं, “सेक्शन 80E की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें टैक्स में छूट की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं की गई है। यानी एक वित्त वर्ष में एजुकेशन लोन पर जितना भी ब्याज चुकाया जाएगा, उस पूरे पैसे को टैक्सेबल इनकम से घटाई जा सकती है। हालांकि, टैक्स में छूट सिर्फ एजुकेशन लोन पर चुकाए गए ब्याज पर मिलती है। लोन के मूलधन (Principal) की अदायगी पर किसी तरह की टैक्स में छूट नहीं मिलती।”
कौशिक के मुताबिक, इस टैक्स में छूट का फायदा उस वित्त वर्ष से मिलना शुरू होता है, जिसमें आप एजुकेशन लोन का ब्याज चुकाना शुरू करते हैं। यह छूट अधिकतम 8 साल तक या फिर पूरा ब्याज चुकाने तक, जो भी पहले हो, उपलब्ध रहती है।
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एजुकेशन लोन पर टैक्स में छूट को लेकर कई परिवारों में यह सवाल रहता है कि इसका दावा आखिर कौन कर सकता है। नियम साफ है कि सेक्शन 80E का फायदा सिर्फ वही व्यक्ति ले सकता है, जिसके नाम पर एजुकेशन लोन लिया गया हो और जो अपनी आय से उसका ब्याज चुका रहा हो। यह लोन खुद की पढ़ाई, जीवनसाथी, बच्चों या फिर ऐसे छात्र की पढ़ाई के लिए लिया जा सकता है, जिसका टैक्सपेयर कानूनी अभिभावक हो।
KC GlobEd और GCC स्कूल के फाउंडर और CEO डॉ. कमल छाबड़ा कहते हैं, “अगर माता-पिता ने बच्चे की पढ़ाई के लिए एजुकेशन लोन लिया है और वे अपनी टैक्सेबल इनकम से उसकी EMI का ब्याज चुका रहे हैं, तो ITR में सेक्शन 80E के तहत इस छूट का दावा कर सकते हैं।”
छाबड़ा के मुताबिक, वहीं अगर छात्र ने अपने नाम पर लोन लिया है और पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी लगने पर खुद उसका ब्याज चुका रहा है, तो वह इस टैक्स में छूट का फायदा ले सकता है। ध्यान रहे कि एक ही एजुकेशन लोन के ब्याज पर माता-पिता और छात्र दोनों एक साथ टैक्स में छूट का दावा नहीं कर सकते। सेक्शन 80E का फायदा उसी व्यक्ति को मिलेगा, जो अपने नाम पर लिए गए लोन का ब्याज अपनी आय से चुका रहा है।
वहीं SK पटोदिया एंड एसोसिएट्स LLP में डायरेक्ट टैक्स के एसोसिएट डायरेक्टर मिहिर तन्ना के मुताबिक, एजुकेशन लोन लेते समय एक बात का खास ध्यान रखना चाहिए। अगर लोन सिर्फ छात्र के नाम पर है और पढ़ाई पूरी करने के बाद वह विदेश में नौकरी करने लगता है, जहां उसकी भारत में कोई टैक्सेबल इनकम नहीं है, जबकि लोन का ब्याज भारत में रह रहे माता-पिता चुका रहे हैं, तो ऐसी स्थिति में दोनों में से कोई भी सेक्शन 80E के तहत टैक्स में छूट का दावा नहीं कर पाएगा।
इस परेशानी से बचने के लिए बेहतर है कि लोन लेते समय ही माता-पिता को सह-उधारकर्ता (Co-borrower) बनाया जाए। इससे वे 80E के तहत टैक्स में छूट का फायदा ले सकेंगे।
विदेश में पढ़ाई के लिए एजुकेशन लोन लेने वालों के लिए सही टैक्स रीजीम चुनना भी बेहद जरूरी है। इसकी वजह यह है कि न्यू टैक्स रीजीम में सेक्श 80E के तहत मिलने वाली टैक्स में छूट नहीं मिलती। यानी अगर आपने नया टैक्स रीजीम चुना है, तो एजुकेशन लोन के ब्याज पर किसी तरह की टैक्स राहत नहीं मिलेगी।
टैक्सस्पैनर के CEO सुधीर कौशिक के मुताबिक, अगर आप एजुकेशन लोन पर हर साल अच्छी-खासा ब्याज का पैसा चुका रहे हैं, तो इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने से पहले पुराने और नए, दोनों टैक्स रीजीम की तुलना जरूर करें।
उनका कहना है कि जिन परिवारों पर एजुकेशन लोन का ब्याज ज्यादा है, उनके लिए कई मामलों में ओल्ड टैक्स रीजीम अधिक फायदेमंद साबित हो सकता है। इसकी वजह यह है कि सेक्शन 80E के तहत मिलने वाली कटौती उनकी टैक्स देनदारी को काफी कम कर सकती है। इसलिए सिर्फ कम टैक्स दर देखकर न्यू टैक्स रीजीम चुनने के बजाय, दोनों विकल्पों का हिसाब लगाकर फैसला करना बेहतर रहेगा।
विदेश में पढ़ाई के लिए जब बैंक या किसी वित्तीय संस्थान के जरिए पैसा भेजा जाता है, तो उस पर लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) और TCS (टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स) के नियम लागू होते हैं। मिहिर तन्ना के मुताबिक, अगर विदेश में पढ़ाई के लिए किसी मान्यता प्राप्त बैंक या वित्तीय संस्थान से लिए गए एजुकेशन लोन के जरिए पैसा भेजा जाता है, तो उस पर सिर्फ 0.5% की दर से TCS लगता है।
इस रियायती दर का फायदा लेने के लिए छात्रों को अपने अधिकृत बैंक के पास एजुकेशन लोन से जुड़े जरूरी डॉक्यूमेंट जमा कराने होते हैं।
वहीं, अगर कोई अभिभावक अपने नाबालिग बच्चे के नाम पर LRS के तहत विदेश पैसा भेजता है, तो वह उस TCS का क्रेडिट भी ले सकता है। हालांकि, इसके लिए यह जरूरी है कि बच्चे की आय, इनकम टैक्स नियमों के तहत, माता-पिता की आय के साथ जोड़ी जा रही हो।