गोल्डमैन सैक्स ने लगातार ऊंची बनी हुई ऊर्जा कीमतों के कारण बिगड़ते आर्थिक परिदृश्य का हवाला देते हुए भारतीय इक्विटीज़ पर अपने दृष्टिकोण को ओवरवेट से घटाकर मार्केटवेट कर दिया है। गुरुवार को जारी एक रिसर्च नोट में इसके रणनीतिकार ने चेतावनी दी कि होर्मुज़ स्ट्रेट से तेल और गैस के परिवहन में लंबे समय तक रुकावट घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर रही है। यह डाउनग्रेड ऊर्जा संकट के प्रति भारत की बढ़ी हुई संवेदनशीलता को दर्शाता है। गोल्डमैन ने अपने 12 महीने के लिए निफ्टी 50 इंडेक्स लक्ष्य घटाकर 25,900 कर दिया है, जो पहले 29,300 था।
यह नया लक्ष्य संशोधित आय वृद्धि और 19.5 गुना पीई गुणक के आधार पर, करीब 13 फीसदी की बढ़त का संकेत देता है। आउटलुक में आया यह बदलाव निवेशकों के नरम पड़ते मूड को भी दिखाता है। गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्रियों ने देश के लिए 2026 के जीडीपी वृद्धि के अपने अनुमान को 1.1 फीसदी घटाकर 5.9 फीसदी कर दिया है।
इसके साथ ही उन्होंने अपने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई के अनुमान को 70 आधार अंक बढ़ा दिया है क्योंकि उन्हें जीडीपी के 2 फीसदी तक चालू खाता घाटा बढ़ने और भारतीय रुपये के कमजोर होने की आशंका है। रिपोर्ट में महंगाई के इन दबावों से निपटने के लिए 2026 के दौरान ब्याज दरों में 50 आधार अंकों की अतिरिक्त बढ़ोतरी को भी शामिल किया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है, लंबे समय तक ऊंची बनी रहने वाली ऊर्जा कीमतें भारत के लिए आर्थिक हालात को खराब करती हैं और इसमें मौजूदा भू-राजनीतिक तनावों की ओर इशारा किया गया है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर डाल रहे हैं। इस चुनौतीपूर्ण आर्थिक माहौल का असर कंपनियों के मुनाफे पर पड़ने की आशंका है। गोल्डमैन सैक्स ने अगले दो वर्षों के लिए भारतीय कंपनियों की कमाई में वृद्धि के अपने अनुमान को 9 फीसदी तक काफी कम कर दिया है।
अब वे कैलेंडर वर्ष 26 के लिए कमाई में 8 फीसदी और कैलेंडर वर्ष 27 के लिए 13 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहे हैं, जो उनके पिछले अनुमानों (क्रमशः 16 फीसदी और 14 फीसदी) से कम है। विश्लेषकों ने कहा, एआई के संभावित बुरे असर को लेकर निवेशकों की मौजूदा चिंताओं के साथ-साथ कमाई में होने वाली आगामी कटौती, लगातार शुद्ध बिकवाली के बाद विदेशी निवेशकों की दोबारा खरीदारी में रुकावट डाल सकती है। सितंबर 2024 से विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाज़ारों से रिकॉर्ड 42 अरब डॉलर निकाले हैं।
बैंक गुणवत्ता, कमाई में स्थिरता और संरचनात्मक विषयों पर ध्यान केंद्रित करने की वकालत करता है और उन कंपनियों को खास तौर पर उभारता है, जिनकी कमाई स्थिर है और बैलेंस शीट मजबूत है। उनका मानना है कि फाइनैंस और रोज़मर्रा की जरूरत के सामान (स्टेपल्स) जैसे सेक्टर (जो तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति कम संवेदनशील हैं और ऐतिहासिक रूप से कम मूल्यांकन पर ट्रेड कर रहे हैं) मौजूदा माहौल में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।