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रिजर्व बैंक ने क्यों ​स्थिर रखीं ब्याज दरें, आम लोगों पर क्या असर होगा?

आरबीआई ने रीपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा है। FY27 की Q1 और Q2 में CPI महंगाई 4% और 4.2% रहने का अनुमान जताया है।

Last Updated- February 06, 2026 | 4:27 PM IST
Reserve Bank of India (RBI)
Representational Image

रिजर्व बैंक गवर्नर संजय मल्होत्रा (RBI Governor Sanjay Malhotra) ने शुक्रवार को साल 2026 की पहली और चालू वित्त वर्ष के लिए अंतिम द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा पेश कर दी। पॉलिसी का ऐलान करते हुए गवर्नर ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया और पॉलिसी स्टॉन्स भी ‘न्यूट्रल’ पर बनाए रखा है। खास बात यह रही कि मौद्रिक समीक्षा समिति (MPC) के सभी सदस्य यथा​स्थिति बनाए रखने के पक्ष में थे। अब सवाल यह है कि महंगाई के काबू में रहने और बेहतर ग्रोथ के बावजूद ब्याज दरों को क्यों ​स्थिर रखा गया?

इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म इनक्रेड मनी के मुताबिक, मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रीपो रेट 5.25% पर अपरिवर्तित रखा है और नीति रुख भी न्यूट्रल बनाए रखा गया है। दरअसल, यह य​था​स्थिति दरों में कटौती से ज्यादा एक तरह का कंसोलिडेशन है, ताकि अब तक ब्याज दरों में कटौती का असर सिस्टम में ठीक से दिख सके, जबकि ग्रोथ की स्थिति अब भी बेहतर है।

इनक्रेड मनी के मुताबिक, ग्रोथ के मोर्चे पर RBI कॉ​​न्फिडेंट है। FY26 में GDP ग्रोथ 7.4% रहने का अनुमान है, जो मुख्य रूप से घरेलू फैक्टर्स जैसेकि प्राइवेट कंजम्प्शन, फिक्स्ड इन्वेस्टमेंट और सर्विसेज में दमदार तेजी पर आधारित है। हालांकि, बाहरी तस्वीर अभी भी मिली-जुली है। नेट एक्सपोर्ट को लेकर अब भी दबाव है। इसके बावजूद, हालिया ट्रेड एग्रीमेंट खासकर EU, US, न्यूजीलैंड और ओमान के साथ, मीडियम टर्म में बाजारों और निर्यात के डायवर्सिफिकेशन में मदद कर सकते हैं। RBI जियो-पॉलिटिकल तनाव और कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर सतर्क है, जिससे नकारात्मक जोखिम बने हुए हैं। महंगाई के मोर्चे पर आंकड़े राहत देने वाले हैं। खाने-पीने के वस्तुओं की कीमतें सीधे तौर पर डिफ्लेशन में हैं और कोर महंगाई (खाद्य और ईंधन को छोड़कर) स्थिर बनी हुई है।

केयरऐज रेटिंग्स की चीफ इकॉनमिस्ट रजनी सिन्हा का कहना है, गवर्नर ने कहा कि RBI जरूरत पड़ने पर समय पर कदम उठाकर बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त पैसा (लिक्विडिटी) बनाए रखेगा। हमारा मानना है कि RBI आगे भी लिक्विडिटी डालने के उपाय जारी रखेगा, खासकर मार्च के दूसरे हिस्से में, जब आमतौर पर टैक्स भुगतान के कारण सिस्टम से ज्यादा पैसा बाहर निकलता है। पहले जो ब्याज दरों में कटौती हुई है, उसका फायदा अर्थव्यवस्था तक सही तरीके से पहुंचे, इसके लिए सिस्टम में लिक्विडिटी का बेहतर ​स्थिति में रहना जरूरी है।

बड़ा सवाल: दरें स्थिर क्यों?

इनक्रेड मनी के मुताबिक, RBI इस समय एक ‘संतुलन वाली राह’ पर चल रहा है। घरेलू मोर्चे पर बात करें तो ग्रोथ, महंगाई और लिक्विडिटी काफी बेहतर हालात में है। लेकिन बाहर की चुनौतियां, जैसेकि वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता, टैरिफ से रुकावट, विदेशी निवेश का उतार-चढ़ाव और सोना-चांदी जैसी कीमती धातुओं में कीमतों में तेजी, बढ़ गई हैं। ऐसे माहौल में RBI ब्याज दरें स्थिर रखकर अपने पास आगे के लिए विकल्प बचाए रखना चाहता है और जल्दी कोई संकेत नहीं देना चाहता।

एमके ग्लोबल फाइनैंशयल सर्विसेज की चीफ इकॉनमिस्ट माधवी अरोड़ा कहती हैं, आगे MPC की नीति में बहुत बड़ा बदलाव होने की गुंजाइश कम है। यानी, ब्याज दरें अब कुछ समय तक स्थिर रह सकती हैं और नई कटौती की संभावना कम है (जब तक कोई बड़ा बाहरी झटका न आए)। ऐसे में RBI का फोकस पहले की गई कटौती का असर बैंकिंग सिस्टम और बाजार तक पहुंचाने पर रहेगा।

हालांकि इस साइकल में दरों में अच्छी-खासी कटौती हो चुकी है, लेकिन इस बार बॉन्ड यील्ड में इसका असर 10% से भी कम दिख रहा है। इसके मुकाबले 2019 में 8 महीनों के भीतर 88% तक असर दिख गया था। पिछले 4 कटौती साइकिल में औसतन करीब 83% ट्रांसमिशन रहा है। सरकारी बॉन्ड यील्ड कर्व का बेयर-फ्लैट होना, कॉरपोरेट बॉन्ड पर स्प्रेड बढ़ना, और मनी-मार्केट व बड़े डिपॉजिट रेट्स का ऊपर जाना- ये सब बताते हैं कि दर कटौती का फायदा अभी पूरी तरह नीचे तक नहीं पहुंच पाया है।

आम लोगों पर क्या असर होगा?

रिजर्व बैंक गवर्नर की ओर से पॉलिसी दरों और पॉलिसी रुख पर रिजर्व बैंक की यथा​स्थिति का व्यावहारिक पहलू भी समझना जरूरी है। इनक्रेड मनी ने इस पहलू को तीन स्टेकहोल्डर्स (बचत करने वाले, कर्ज लेने वाले और निवेशकों एंव बाजार) के नरिए बताया है।

बचत करने वालों पर असर

महंगाई के अनुमान कम हुए हैं, लेकिन ब्याज दरों में नई कटौती नहीं हुई। इसलिए अगले कुछ समय में FD की ब्याज दरें और अच्छे बॉन्ड की यील्ड बहुत ज्यादा गिरने की संभावना कम है। यह समय फिक्स्ड इनकम में जरूरत के हिसाब से अच्छी यील्ड लॉक करने का हो सकता है।

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कर्ज लेने वालों पर असर

ब्याज दर न घटने से कर्ज की EMI में तुरंत नई राहत नहीं मिलेगी। लेकिन पहले जो कटौती हुई है, उसका फायदा धीरे-धीरे मिलता रहेगा। अच्छे क्रेडिट वाले लोगों के लिए लोन री-फाइनेंस या बेहतर दर पाने के मौके अब भी बने रहेंगे।

निवेशकों और बाजार पर

RBI का रुख न्यूट्रल है, लेकिन ग्रोथ को सपोर्ट करता है। बाजार में घरेलू डिमांड थीम जैसेकि कंजम्प्शन रिकवरी, GST आधारित ग्रोथ, और सरकारी कैपेक्स, पर फोकस बना रहेगा। हालांकि, निर्यात और विदेशी बाजार से जुड़े सेक्टरों पर नजर रखनी होगी, क्योंकि ग्लोबल ट्रेड में उतार-चढ़ाव अभी भी जारी है। ऐसे समय में अलग-अलग एसेट क्लास में धीरे-धीरे और संतुलित निवेश करना बेहतर रहेगा।

RBI MPC: अहम ऐलान

  • रीपो रेट 5.25% पर बरकरार। बेंचमार्क लेंडिंग रेट में कोई बदलाव नहीं।
  • मौद्रिक नीति का रुख (स्टांस) न्यूट्रल बना रहा
  • FY27 की Q1 और Q2 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 6.9% और 7% किया गया।
  • चालू वित्त वर्ष में रिटेल महंगाई 2.1% रहने का अनुमान।
  • FY27 की Q1 और Q2 में CPI महंगाई 4% और 4.2% रहने का अनुमान।
  • डिजिटल फ्रॉड में नुकसान होने पर ग्राहकों को ₹25,000 तक मुआवजा देने के लिए जल्द नया फ्रेमवर्क
  • वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल फ्रॉड से बचाने के लिए RBI ने नए उपाय सुझाए।
  • MSME के लिए बिना गारंटी लोन की सीमा दोगुनी होकर ₹20 लाख की जाएगी।
  • बैंकों को REITs को लोन देने की अनुमति मिलेगी।
  • कुछ NBFC के लिए नई ब्रांच खोलने के नियम आसान किए जाएंगे।
  • RBI की अगली MPC बैठक 6-8 अप्रैल 2026 को होगी।

First Published - February 6, 2026 | 4:27 PM IST

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