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सरकारी बैंकों का मुनाफा बढ़ा, मजबूत ट्रेजरी यील्ड ने नेट इंटरेस्ट इनकम की कमी पूरी की

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बैंकों ने आईपीओ में भागीदारी, करेंसी स्वैप की खरीद/बिक्री में कमीशन और ओपन मार्केट ऑपरेशंस में बोलियां खरीदने के अलावा अन्य से यह लाभ दर्ज किया

Last Updated- February 05, 2026 | 10:41 PM IST
Banks

सरकारी बैंकों की लाभप्रदता को मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में मजबूत कोषागार आय से समर्थन मिला है। इससे शुद्ध ब्याज आय की वृद्धि की सुस्ती की भरपाई करने में मदद मिली है। सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़ने के बावजूद बैंक कोषागार लाभ दर्ज करने में सक्षम थे। बैंकों ने आईपीओ में भागीदारी, करेंसी स्वैप की खरीद/बिक्री में कमीशन और ओपन मार्केट ऑपरेशंस में बोलियां खरीदने के अलावा अन्य से यह लाभ दर्ज किया।

इस तिमाही में ऋण वृद्धि का विस्तार हुआ, लेकिन जमा में धीमी वृद्धि ने एनआईआई वृद्धि को सीमित कर दिया। नीतिगत रीपो दर में 125 आधार अंक की संचयी कटौती के बावजूद शुद्ध ब्याज मार्जिन दबाव में रहा था।

इक्रा के सेक्टर हेड-फाइनैंशियल सेक्टर रेटिंग्स वाइस प्रेसिडेंट सचिन सचदेवा ने कहा, ‘वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही – वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में बॉन्ड यील्ड में वृद्धि को देखते हुए सीमित ट्रेडिंग अवसर या मार्क-टू-मार्केट लाभ देखने को मिले। कुछ सरकारी बैंकों में विभिन्न कारणों से ट्रेडिंग लाभ देखने को मिला। जैसे केनरा बैंक को केनरा रोबेको और केनरा एचएसबीसी लाइफ इंश्योरेंस के आईपीओ के दौरान हिस्सेदारी की बिक्री के कारण उच्च ट्रेडिंग आय हुई।’

केनरा बैंक की कोषागार आय में सालाना आधार पर लगभग 150 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 3,056 करोड़ रुपये हो गई। इसके तहत निवेश की बिक्री पर लाभ 174 प्रतिशत बढ़कर 2,590 करोड़ रुपये हो गया।

उन्होंने कहा, ‘कुछ बैंकों ने आरबीआई के ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) खरीद नीलामी के तहत अपने हेल्ड-टू-मैच्योरिटी (एचटीएम) पोर्टफोलियो में रखी प्रतिभूतियों को बेचकर मामूली लाभ भी दर्ज किया।’

भारतीय रिजर्व बैंक के नीतिगत दरों में 25 आधार अंक की कटौती और नकदी को आसान बनाने के उद्देश्य से बड़े ओपन मार्केट ऑपरेशंस (ओएमओ) की घोषणा के बावजूद दिसंबर में सरकारी बॉन्ड की यील्ड में मजबूती आई। इस तिमाही में 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की बेंचमार्क यील्ड मामूली रूप से 2 आधार अंक बढ़ गई थी।

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First Published - February 5, 2026 | 10:37 PM IST

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