RBI MPC Meet: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने शुक्रवार (6 फरवरी) को रेपो रेट पर अपने फैसले का एलान कर दिया। समिति ने मौजूदा परिस्थितियों पर गौर करते हुए प्रमुख नीतिगत दर रीपो रेट (Repo Rate) को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया। यह समिति की चालू वित्त वर्ष की अंतिम द्विमासिक द्विमासिक मॉनेटरी पॉलिसी है।
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने 4 से 6 फरवरी के बीच हुई अपनी पॉलिसी मीटिंग में ‘न्यूट्रल’ रुख बरकरार रखा। मौद्रिक नीति का रुख (पॉलिसी स्टांस) ‘न्यूट्रल’ पर बरकरार रखा गया है। इसका संकेत है कि ब्याज दरें कुछ समय तक कम स्तर पर बनी रह सकती हैं। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पॉलिसी बैठक के बाद इस निर्णय की घोषणा की।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि महंगाई दर हमारे अनुमान के दायरे में है। हाई ग्रोथ और लो महंगाई का अच्छा समय है। भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन बेहतर है। वैश्विक अनिश्चितता के बीच इकॉनमी का प्रदर्शन शानदार रहा है।
बिज़नेस स्टैंडर्ड की तरफ से 12 अर्थशास्त्रियों के बीच कराए गए सर्वे में ज्यादातर लोगों ने ऐसी राय जाहिर की। उन्होंने कहा कि दर में और कटौती तभी हो सकती है जब वृद्धि में बड़ी गिरावट का जोखिम हो। यह सर्वे अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए शुल्क को घटाकर 18 फीसदी करने की घोषणा से पहले किया गया था।
सर्वे में शामिल प्रतिभागियों ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में भी वृद्धि दर की गति बनी रहने की उम्मीद है और महंगाई धीरे-धीरे 4 फीसदी के करीब जा सकती है। ऐसे में मौद्रिक नीति समिति आगामी बैठक में दर को अपरिवर्तित रखने का निर्णय कर सकती है।
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान 7.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत कर दिया है। वहीं, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान 6.7 फीसदी से बढ़ाकर 6.9 फीसदी और दूसरी तिमाही के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान 6.8 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी किया। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि नई जीडीपी सीरीज आएगी, इसके चलते पूरे साल का जीडीपी का अनुमान नहीं जारी किया गया।
भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई का अनुमान 2.1 प्रतिशत रखा है। वहीं अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिए महंगाई दर के 4 प्रतिशत और दूसरी तिमाही के लिए 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान दिया है।
बता दें कि फरवरी 2025 से अब तक ब्याज दरों में 125 बेसिस पॉइंट की कटौती की जा चुकी है। दिसंबर की मीटिंग में एमपीसी ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की थी। इससे रेपो रेट 5.50 प्रतिशत से घटकर 5.25 प्रतिशत हो गया था। यह फैसला दो मीटिंगों तक दरें स्थिर रखने के बाद लिया गया था। इससे पहले फरवरी से जून के बीच आरबीआई ने लगातार तीन बार दरें घटाकर रेपो रेट को 6.5 प्रतिशत से 5.5 फीसदी कर दिया था।
रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) कमर्शियल बैंकों को कर्ज देता है। इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है। जब रेपो रेट बढ़ती है, तो बैंक भी आमतौर पर अपने लोन की ब्याज दरें बढ़ा देते हैं। ऐसे में होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI महंगी हो जाती है।
वहीं, जब रेपो रेट घटती है, तो लोन सस्ते हो सकते हैं और EMI का बोझ कम हो सकता है। हालांकि, इसका दूसरा असर यह होता है कि सेविंग्स अकाउंट और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिलने वाला ब्याज भी घट सकता है।
दिसंबर में ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की थी। जून में आरबीआई ने रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट की कटौती की गई थी। इससे पहले फरवरी और अप्रैल में भी 25-25 बेसिस पॉइंट की कटौती की गई थी। इसके पहले लगातार 11 बैठकों तक रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया था।