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Budget 2026 में स्टूडेंट्स को बड़ा फायदा मिला है? एक्सपर्ट्स ने बताया इसमें छात्रों के लिए कहां-कहां है मौका

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बजट 2026 में TCS दरों को कम करके और कस्टम ड्यूटी घटाकर सरकार ने विदेश में पढ़ने का सपना देख रहे छात्रों को थोड़ी राहत देने की कोशिश की है

Last Updated- February 03, 2026 | 8:28 PM IST
Budget 2026
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

क्या सरकार ने बजट 2026 में स्टूडेंट्स का कुछ ख्याल रखा है? ये प्रश्न अभी देश के अधिकतर युवा वर्ग में है। लेकिन एक्सपर्ट का मानना है कि बजट 2026 में सरकार ने विदेश में पढ़ाई, इलाज और यात्रा से जुड़े खर्चों को लेकर ऐसे फैसले लिए गए हैं, जिनका सीधा फायदा छात्रों और उनके परिवारों को मिलेगा। खास तौर पर मध्यम और निम्न आय वर्ग के लिए यह बजट राहत लेकर आया है, क्योंकि इसमें न तो सिर्फ टैक्स सिस्टम को देखा गया है और न ही केवल बड़े निवेशकों को ध्यान में रखा गया है, बल्कि उन परिवारों की वास्तविक जरूरतों पर फोकस किया गया है जो बच्चों को विदेश भेजने की तैयारी कर रहे हैं।

बजट में कस्टम ड्यूटी में कटौती, TCS दरों में कमी और विदेशी संपत्तियों के खुलासे के लिए नई योजना जैसे कदम उठाए गए हैं, जो मिलकर विदेश में पढ़ाई से जुड़ी फाइनेंशियल प्लानिंग को आसान बनाते हैं।

कस्टम ड्यूटी घटने से छात्रों का खर्चा कमेगा 

जयपुरिया ग्रुप ऑफ एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के CFO बिक्रम अग्रवाल के अनुसार, बजट 2026 ने विदेश में पढ़ाई की तैयारी से जुड़े छोटे लेकिन जरूरी खर्चों को कम करने की दिशा में अहम कदम उठाया है।

वो कहते हैं, “विदेश से लाए जाने वाले पर्सनल सामान, जैसे लैपटॉप, टैबलेट, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्टडी से जुड़ा अन्य जरूरी सामान, पहले करीब 20% कस्टम ड्यूटी के दायरे में आता था। अब इसे घटाकर 10% कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि अगर कोई छात्र विदेश से 1 लाख रुपये का स्टडी इक्विपमेंट लाता है, तो पहले उसे करीब 20,000 रुपये ड्यूटी देनी पड़ती थी, जो अब घटकर 10,000 रुपये रह जाएगी। यह सीधी बचत छात्रों और परिवारों की जेब पर असर डालती है।”

अग्रवाल के मुताबिक, यह कटौती उन परिवारों के लिए खास राहत है जो पहले ही ट्यूशन फीस, वीजा, रहने और ट्रैवल जैसे बड़े खर्चों का सामना कर रहे होते हैं।

विदेश में पढ़ाई के लिए पैसा भेजने पर अब कम बोझ 

बजट 2026 का सबसे अहम फैसला माना जा रहा है TCS दर में कटौती। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत विदेश में पढ़ाई और मेडिकल खर्च के लिए भेजी जाने वाली रकम पर TCS को 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है। यह दर 10 लाख रुपये से अधिक की राशि पर लागू होगी।

बिक्रम अग्रवाल बताते हैं, “TCS भले ही बाद में टैक्स में एडजस्ट हो जाता हो, लेकिन जब पैसा भेजा जाता है, उस समय यह रकम ब्लॉक हो जाती थी। कई परिवारों को महीनों तक इस पैसे के वापस मिलने का इंतजार करना पड़ता था। अब TCS कम होने से परिवारों की कैश फ्लो स्थिति बेहतर होगी और विदेश में पढ़ाई का खर्च मैनेज करना आसान होगा।”

TCS में कटौती से लोन और EMI का घटेगा दबाव

जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, जयपुर के डायरेक्टर डॉ. प्रभात पंकज का कहना है कि TCS घटने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि परिवारों पर वर्किंग कैपिटल का दबाव कम होगा।

उन्होंने बताया कि पहले कई बार ऐसा होता था कि परिवारों को TCS की रकम कवर करने के लिए शॉर्ट-टर्म लोन लेना पड़ता था या फिर एजुकेशन लोन की राशि बढ़ानी पड़ती थी। कुछ मामलों में बैंक TCS हिस्से को भी फाइनेंस करते थे।

डॉ. पंकज उदाहरण देते हुए बताते हैं, “अगर कोई परिवार विदेश में पढ़ाई के लिए 50 लाख रुपये भेजता है, तो पहले उसे 2.5 लाख रुपये TCS देना पड़ता था। अब यह घटकर 1 लाख रुपये रह जाएगा। यानी 1.5 लाख रुपये की सीधी राहत, जो लोन की जरूरत को उतना ही कम कर देती है।”

पंकज कहते हैं कि इसका असर EMI पर भी पड़ेगा और कुल मिलाकर एजुकेशन लोन का बोझ थोड़ा हल्का होगा।

FAST-DS स्कीम से मिलेगा भरोसा और कानूनी सुकून

बजट 2026 में पेश की गई फॉरेन एसेट्स ऑफ स्मॉल टैक्सपेयर्स- डिस्क्लोजर स्कीम (FAST-DS) को एक्सपर्ट्स ने एक बड़ा और जरूरी सुधार बताया है। बिक्रम अग्रवाल के मुताबिक, यह स्कीम छात्रों और छोटे टैक्सपेयर्स को एक बार का मौका देती है, जिसमें वे अपनी छोटी विदेशी संपत्तियों या आय का खुलासा कर सकते हैं, बिना किसी सख्त पेनल्टी या मुकदमे के डर के।

वो कहते हैं, “यह स्कीम उन मामलों में खास तौर पर मददगार है, जहां विदेश में पढ़ाई के दौरान बैंक अकाउंट खुला हो, स्कॉलरशिप मिली हो या छोटी सेविंग्स रह गई हों, जिन्हें अनजाने में टैक्स रिटर्न में शामिल नहीं किया गया।”

Also Read: Budget 2026 में सरकार ने सीनियर सिटीजन्स के लिए कुछ किया भी या नहीं? जानें एक्सपर्ट इसपर क्या सोचते हैं

छात्रों और युवाओं के लिए क्यों अहम है FAST-DS

डॉ. प्रभात पंकज का कहना है कि FAST-DS स्कीम छात्रों और युवा प्रोफेशनल्स के लिए बहुत उपयोगी है। उन्होंने बताया कि कई बार छात्र विदेश में स्कॉलरशिप की रकम या बैंक ब्याज को घोषित करना भूल जाते हैं। अब वे इसे बिना डर के नियमित कर सकते हैं।

पंकज कहते हैं, “इस स्कीम का मकसद सिर्फ टैक्स वसूलना नहीं है। इसका फायदा यह है कि लंबे समय तक कानूनी झंझट से बचा जा सके, चीजें साफ-सुथरी रहें और टैक्स नियमों का पालन करने की आदत बने। इससे भविष्य में वीजा, एजुकेशन लोन या फंडिंग लेने में भी आसानी होगी, क्योंकि सभी फाइनेंशियल रिकॉर्ड सही और स्पष्ट होंगे।”

छोटे परिवारों के लिए बजट ने कैसे बदला गेम

टैक्स एक्सपर्ट और सुदित के. पारेख एंड कंपनी LLP की पार्टनर अनिता बसरुर के अनुसार, बजट 2026 ने छोटे परिवारों की जमीनी समस्याओं को समझते हुए राहत दी है।

उन्होंने कहा, “भले ही टैक्स स्लैब में बदलाव नहीं हुआ हो, लेकिन कस्टम ड्यूटी और TCS जैसी चीजें वही होती हैं, जो पढ़ाई की प्लानिंग के वक्त सबसे ज्यादा असर डालती हैं।” बस्रुर के मुताबिक, TCS कम होने से परिवारों को अपनी बचत से कम पैसा निकालना पड़ेगा और उन्हें हाई-इंटरेस्ट लोन पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

विदेश में पढ़ाई अब ज्यादा साफ-सुथरी प्लानिंग के साथ

तीनों एक्सपर्ट्स का मानना है कि बजट 2026 सीधे तौर पर ट्यूशन फीस तो कम नहीं करता, लेकिन पैसे की अनिश्चितता जरूर घटाता है। कम TCS, कम कस्टम ड्यूटी और आसान डिस्क्लोजर नियम मिलकर उन परिवारों के लिए रास्ता बनाते हैं, जो पहले शुरुआती खर्च ज्यादा होने की वजह से विदेश में पढ़ाई टाल देते थे।

कुल मिलाकर छात्रों के लिए क्या बदला?

  • विदेश में पढ़ाई के लिए पैसे भेजना अब आसान
  • TCS घटने से परिवार की जेब पर दबाव कम
  • एजुकेशन लोन और EMI का बोझ हल्का
  • विदेशी अकाउंट्स और संपत्तियों को लेकर कानूनी डर नहीं
  • मध्यम और कम आय वाले परिवारों के लिए विदेश पढ़ाई अब ज्यादा मुमकिन

एक्सपर्ट्स का मानना है कि कुल मिलाकर, बजट 2026–27 को विदेश में पढ़ाई का सपना देख रहे छात्रों और उनके परिवारों के लिए थोड़ी राहत और भरोसे का बजट कहा जा सकता है।

First Published - February 3, 2026 | 7:26 PM IST

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