भारत-अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते से रत्न एवं आभूषण उद्योग में खुशी की लहर दौड़ गई है। रत्न एवं आभूषण कारोबारियों को उम्मीद है कि इस समझौते से व्यापार बढ़ेगा, विश्वास फिर से बनेगा और पूरे क्षेत्र को एक मजबूत बढ़ावा मिलेगा। भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमति बनी है जिसके तहत अमेरिका भारतीय सामान पर जवाबी शुल्क को घटाकर 18 फीसदी कर देगा।
भारत-अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते की सबसे ज्यादा खुशी मुंबई के बीकेसी में स्थिति एशिया के सबसे बड़े डायमंड मार्केट भारत डायमंड ब्रुश में देखने को मिल रही है। अमेरिकी टैरिफ की चलते पिछले करीब पांच महीनों से भारतीय हीरा उद्योग में ग्रहण लग गया था। हीरा कारोबारियों की कहना है कि ब्रुश के अंदर काम बुरी तरह प्रभावित हुआ था, सबसे बड़े बाजार अमेरिका से व्यापार प्रभावित होने के कारण हीरे के कई कारखाने बंद करने पड़े थे, कारोबारियों को मजबूरी में कम कीमत पर माल बेचना पड़ रहा था, लेकिन इस समझौते से अमेरिकी बाजार खुल जाएंगे जिससे एक बार फिर से भारतीय हीरे की चमक वैश्विक बाजार को गुलजार करेगी।
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रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (GJEPC) के अध्यक्ष किरिट भंसाली ने कहा कि शुल्क को घटाकर 18 फीसदी करने से अमेरिकी आयातकों के लिए लागत कम होगी, हीरे के आभूषण निर्माताओं को बहुत राहत मिलेगी, भारतीय हीरे के आभूषणों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी, मांग फिर से बढ़ेगी और परिचालन स्थिर होगा। उन्होंने कहा कि GJEPC को उम्मीद है कि भारत द्वारा व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद, देश से बिना तराशे हीरे और रंगीन रत्नों को अमेरिका में शून्य शुल्क आयात का लाभ मिलेगा, जो अमेरिकी जवाबी शुल्क सूची का हिस्सा है, जो हीरे के निर्यात के लिए बहुत जरूरी समर्थन प्रदान करेगा।
GJEPC के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में, जवाबी अमेरिकी शुल्क ने अमेरिका को होने वाले व्यापार को बुरी तरह प्रभावित किया क्योंकि पॉलिश किए गए हीरे और रंगीन रत्नों पर शुल्क अप्रैल में शून्य फीसदी से बढ़कर 10 फीसदी हो गया, फिर अगस्त तक 50 फीसदी हो गया, जो इन कच्चे माल के लिए गैर-लाभप्रद था, जिससे कार्यशील पूंजी, नकदी की स्थति और मार्जिन प्रभावित हुआ। आभूषणों पर शुल्क 5-7 फीसदी से बढ़कर 55-57 फीसदी हो गया।
ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल (जीजेसी) के अध्यक्ष राजेश रोकड़े ने कहा कि अमेरिकी शुल्क में कमी भारत के रत्न और आभूषण क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है। जीजेसी के उपाध्यक्ष, अविनाश गुप्ता ने कहा कि अमेरिकी शुल्क में कटौती एक बड़ी उपलब्धि है जिससे छोटे और मझोले उद्यमों को सीधा फायदा होगा, जो भारत के आभूषण उद्योग की रीढ़ हैं ।
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कामा ज्वेलरी के प्रबंध निदेशक, कॉलिन शाह ने कहा कि शुल्क को घटाकर 18 फीसदी करना भारतीय रत्न और आभूषण क्षेत्र के लिए बड़ी राहत है और इसका स्वागत है। उन्होंने कहा कि अमेरिका, भारतीय रत्न और आभूषणों का एक प्रमुख उपभोक्ता बाजार रहा है, और शुल्क के असर से कारोबार प्रभावित हो रहा था। यह आंशिक छूट भारतीय आभूषण निर्माताओं और निर्यातकों के साथ-साथ अमेरिकी बाजार में खरीदारों में भी विश्वास बहाल करेगी।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता इस मायने में महत्वपूर्ण है क्योंकि कपड़ा, परिधान, चमड़ा और समुद्री उत्पाद जैसे कई श्रम-प्रधान क्षेत्र 50 फीसदी शुल्क के कारण अमेरिका को सामान निर्यात करने में चुनौतियों का सामना कर रहे थे।