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ट्रेड डील से नहीं बदलेगी बाजार की किस्मत, तेजी के लिए चाहिए और स्पष्टता: शंकर शर्मा

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शंकर शर्मा द्वारा भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के गणित और बाजार की भविष्य की चाल पर अभी संदेह जताया गया है

Last Updated- February 03, 2026 | 11:05 PM IST
Shankar Sharma
जीक्वांट इन्वेस्टेक के संस्थापक शंकर शर्मा | फाइल फोटो

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की वजह से मंगलवार को दिन के कारोबार में सेंसेक्स 4,200 अंक से ज्यादा चढ़ गया था। जीक्वांट इन्वेस्टेक के संस्थापक शंकर शर्मा ने पुनीत वाधवा को टेलीफोन इंटरव्यू में बताया कि उन्हें नहीं लगता कि सेंसेक्स और निफ्टी से अगले 12 महीनों में फिक्स्ड डिपॉजिट से ज्यादा रिटर्न मिलेगा। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के अंश:

क्या इस समझौते से भारतीय शेयर बाजारों का गतिरोध दूर हो गया है?

मैंने इस समझौते पर केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के ट्वीट देखे हैं। अधिक जानकारी अभी सामने आनी बाकी हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मूल रूप से भारतीय निर्यात पर 18 प्रतिशत शुल्क लगेगा, जो अपेक्षाकृत बहुत अच्छा है। लेकिन हमें 500 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान का आयात करना होगा। अगर यह हर साल करना है तो हमारा कुल व्यापार भी अभी इसके आसपास नहीं है।

दूसरा, अगर इसे पांच वर्षों या हर साल 100 अरब डॉलर में भी बांट दें तो प्रति वर्ष 80 अरब डॉलर का निर्यात करने के लिए हमें हर साल 100 अरब डॉलर का आयात करना होगा। अगर गणित यह है, तो मुझे समझ में नहीं आता कि यह इतनी अच्छी बात कैसे है।

भारतीय बाजारों को मौजूदा स्तरों पर टिके रहने के लिए क्या करना होगा?

यहां से आगे बढ़ने के लिए बाजारों को समझौते की रूपरेखा पर अधिक स्पष्टता की आवश्यकता है। हमें और अधिक स्पष्टता की जरूरत है। अब तक जो विवरण मिले हैं, वे इतनी सतही हैं कि कोई भी समझदार या गंभीर विश्लेषक उनसे ज्यादा कुछ समझ नहीं पाएगा।

तो, क्या शेयर बाजारों ने ज्यादा प्रतिक्रिया दी है?

बाजार तेजी की कोई वजह ढूंढ रहे थे और अब उन्हें भारत-अमेरिका ट्रेड डील के रूप में एक वजह मिल गई है। जब विश्लेषक और निवेशक शांत हो जाएंगे, तो वे (डील के बारे में) और सवाल पूछेंगे। फिर भी, (डील पर) शुरुआती रिएक्शन हमेशा थोड़ा ज्यादा ही होने वाला था। कुछ दिनों में और ज्यादा गहरे सवाल सामने आएंगे।

मौजूदा तेजी को बनाए रखने के लिए कॉरपोरेट आय में वृद्धि कितनी महत्त्वपूर्ण है?

हां, बाजारों को ऊपर की ओर बढ़ने के लिए अब आय वृद्धि पर निर्भर रहना होगा। किसी को यह समझने की जरूरत है कि व्यापार समझौता बाजारों के इतने समय से मंदी में रहने का कारण नहीं था। व्यापार समझौता पूरी तरह से भटकाने वाला था। व्यापार समस्या केवल पिछले साल शुरू हुई थी, खासकर 2025 की दूसरी छमाही में। लेकिन बाजार में मंदी 2024 में शुरू हो गई थी। बाजार आय वृद्धि की कमी और जीडीपी वृद्धि में कमी के कारण इतने समय से मंदी में रहे हैं, न कि व्यापार से जुड़ी समस्या के कारण।

लेकिन क्या इस समझौते से मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों को फायदा नहीं होगा?

मुझे यकीन नहीं है। देखिए वे कंपनियां रत्न और आभूषण, चमड़ा, हस्तशिल्प आदि क्षेत्रों का हिस्सा हैं। कोई जानता भी है कि स्मॉलकैप, मिडकैप, लार्जकैप स्पेस में ऐसी कितनी कंपनियां हैं? मैं नहीं जानता। लेकिन भले ही वे कंपनियां मौजूद हों या न हों, इससे इंडेक्स स्तर पर भारतीय इक्विटी बाजार में ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है।

बजट में एसटीटी बढ़ोतरी के बाद क्या व्पापार समझौता बाजारों और निवेशकों की चिंताओं को दूर करेगा?

एसटीटी से जुड़ी धारणा कुछ ज्यादा ही बढ़ा-चढ़ाकर बताई जा रही है। एसटीटी सिर्फ डेरिवेटिव सेगमेंट पर असर डाल रहा है। उसकी वजह से मुख्य शेयर बाजार क्यों गिरेगा? डेरिवेटिव पर एसटीटी का देश की कमाई में बढ़ोतरी, राजस्व वृद्धि, जीडीपी वृद्धि और राजकोषीय घाटे से क्या लेना-देना है? कुछ भी नहीं! हम सिर्फ डेरिवेटिव सेगमेंट में एसटीटी बढ़ोतरी की वजह से बाजार में गिरावट को दोष नहीं दे सकते, या बाजार में गिरावट का कारण नहीं बता सकते, या यह भी नहीं कह सकते कि बाजार मंदी में जाएगा। ऐसा लॉजिक समझ में नहीं आता। मुझे लगता है कि बाजार की धारणा/गिरावट के मामले में इन्हें ‘लॉजिक’ भी कहा जाए।

मौजूदा हालात में कहां निवेश करें?

भारत में कुछ क्षेत्रों में दिलचस्पी बनी रहेगी। छोटी कंपनियां आकर्षक हो गई हैं, जबकि बड़ी कंपनियां अभी भी आकर्षक नहीं हैं। अगर निवेशक काफी मेहनत करें, तो उन्हें हमेशा निवेश करने लायक शेयर मिल जाएंगे। फिर भी, मंदी के बाजार में निवेश करना हमेशा अधिक मुश्किल होगा और तेजी के बाजार में आसान। लेकिन हां, आप अभी भी अच्छी कंपनियां ढूंढ सकते हैं और किसी भी स्मार्ट इन्वेस्टर को अभी यही करना चाहिए।

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First Published - February 3, 2026 | 11:05 PM IST

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