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अमेरिकी ड्यूटी में कटौती से झींगा इंडस्ट्री को बड़ी राहत, कॉ​म्पिटिटर्स के मुकाबले स्थिति बेहतर

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US टैरिफ घटने से भारतीय झींगा निर्यात को नई उम्मीद, मगर देर से आए फैसले पर उद्योग की चिंता

Last Updated- February 03, 2026 | 2:40 PM IST
Avanti Feeds share price on India US Trade Tariffs
अमेरिकी टैरिफ कटौती से झींगा उद्योग को नई राहत - Representational Image

India US Trade Tariffs: पिछले तीन महीनों में अमेरिका को झींगा निर्यात में 60 प्रतिशत तक की गिरावट और पिछले छह महीनों से कीमतों को लेकर अनिश्चितता झेल रहे भारतीय झींगा उद्योग को मंगलवार को अमेरिकी टैरिफ में कटौती से बड़ी राहत मिली। हालांकि, इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि यह फैसला कम से कम एक महीना देर से आया है, क्योंकि अमेरिका के बड़े आयातकों ने 2026 के लिए अग्रिम ऑर्डर दिसंबर के अंत या जनवरी की शुरुआत में ही दे दिए थे।

1 अरब डॉलर के नुकसान से मिली राहत

यह राहत ऐसे समय आई है, जब उद्योग को अमेरिकी टैरिफ के कारण सालाना 1 अरब डॉलर के निर्यात नुकसान का सामना करना पड़ सकता था। अगस्त पिछले साल से 50% अतिरिक्त शुल्क, काउंटरवेलिंग ड्यूटी (CVD), और एंटी-डंपिंग ड्यूटी के कारण अमेरिकी बाजार में भारतीय झींगा पर कुल टैक्स 58 प्रतिशत तक पहुंच गया था। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की ओर से घोषित 18 प्रतिशत टैरिफ के बाद, झींगा पर कुल टैक्स घटकर करीब 26 प्रतिशत रहने की संभावना है।

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प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले स्थिति बेहतर

सीफूड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय समिति सदस्य जगदीश थोता ने कहा कि हमारे मुख्य प्रतिस्पर्धी इक्वाडोर पर कुल टैक्स अभी भी 18.78 प्रतिशत है, जिसमें CVD शामिल है। वहीं इंडोनेशिया पर 24 प्रतिशत और वियतनाम पर 49 प्रतिशत टैक्स लगता है। पहले के 58 प्रतिशत टैक्स के मुकाबले यह हमारे लिए बड़ी राहत है।

हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि पिछले तीन महीनों में कुछ उत्पादकों को 60 प्रतिशत तक ऑर्डर का नुकसान हुआ है और 2026 के लिए अग्रिम ऑर्डर पहले ही दिए जा चुके हैं।

आंध्र प्रदेश में झींगा उद्योग को लेकर चिंता बढ़ गई है। सभी कैटेगरी में झींगा की कीमतें 10–15 प्रतिशत गिर चुकी हैं, जिससे किसानों और निर्यातकों में घबराहट है।

निर्यात उद्योग के लिए बड़ा मोड़

कंपाउंड लाइवस्टॉक फीड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (CLFMA) के चेयरमैन दिव्य कुमार गुलाटी ने कहा कि यह भारत के पशुपालन, सीफूड और झींगा निर्यात तंत्र के लिए एक बड़ा मोड़ है। यूरोपीय यूनियन के साथ ट्रेड समझौते के बाद आया यह फैसला भारत के वैश्विक व्यापार में मजबूत कंसॉलिडेशन का संकेत देता है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका, जो भारत के झींगा निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है, वहां टैरिफ घटने से वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले कीमतों में सुधार होगा।

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गुलाटी ने कहा कि वनामी (Vannamei) झींगा पर हाई टैरिफ के कारण निर्यात दबाव में था। नए टैरिफ ढांचे से मांग में सुधार, वॉल्यूम स्थिरता, और मुनाफे की बेहतर स्थिति बनने की उम्मीद है।

फीड लागत में भी राहत

अमेरिका से आयात होने वाले हाई-प्रोटीन फीड एडिटिव्स और सोया आधारित और फिश मील विकल्प पर टैरिफ घटने से झींगा किसानों की उत्पादन लागत कम होगी। बजट में झींगा फीड सामग्री, फिश हाइड्रोलिसेट, सुरिमी पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 30% से घटाकर 5% कर दी गई है।

गुलाटी ने कहा कि यह समझौता पशु और पशु उत्पादों के निर्यात के लिए भी अहम है, जो पहले अमेरिका में ऊंची लागत के कारण पिछड़ रहे थे। कम टैरिफ से बाजार में प्रवेश आसान होगा। कीमत तय करने में लचीलापन मिलेगा और भारतीय निर्यातक धीरे-धीरे मार्केट शेयर वापस पा सकेंगे।

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First Published - February 3, 2026 | 2:40 PM IST

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