facebookmetapixel
Advertisement
Bharat PET IPO: ₹760 करोड़ जुटाने की तैयारी, सेबी में DRHP फाइल; जुटाई रकम का क्या करेगी कंपनीतेल, रुपये और यील्ड का दबाव: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी अस्थिरता, लंबी अनिश्चितता के संकेतवैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमानआध्यात्मिक पर्यटन में भारत सबसे आगे, एशिया में भारतीय यात्रियों की रुचि सबसे अधिकबांग्लादेश: चुनौतियों के बीच आजादी का जश्न, अर्थव्यवस्था और महंगाई बनी बड़ी चुनौतीपश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सतर्क, रणनीतिक तेल भंडार विस्तार प्रक्रिया तेजGST कटौती से बढ़ी मांग, ऑटो और ट्रैक्टर बिक्री में उछाल: सीतारमण

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से दिग्गज ब्रोकरेज फर्म्स गदगद, दावा: बाजार में बढ़ेगा निवेश

Advertisement

India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चली आ रही व्यापार वार्ता आखिरकार सफल हो गई है

Last Updated- February 03, 2026 | 11:01 PM IST
Stock Market
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत और विदेश की ज्यादातर ब्रोकरेज फर्मों ने सोमवार को घोषित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर खुशी जाहिर की है। हालांकि वे अभी भी इसकी बारीकियों का इंतजार कर रहे हैं। बाजारों ने भी इस पर मुहर लगाई है। लिहाजा, सेंसेक्स में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई। सेंसेक्स  दिन के कारोबार में 4,200 अंक तक बढ़कर 85,871.73 की ऊंचाई पर पहुंच गया था। यहां बताया जा रहा है कि प्रमुख ब्रोकर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर क्या कह रहे हैं।

गोल्डमैन सैक्स

भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर टैरिफ कम होने के बाद चालू खाते का घाटा कैलेंडर वर्ष 2026 में जीडीपी के लगभग 0.25 प्रतिशत से घटकर 0.8 प्रतिशत तक रह जाने की संभावना है। अगर भारत-अमेरिका करार पूरा होने पर कैलेंडर वर्ष 2026 में पूंजी की आवक सुधरती है, तो इससे रुपये पर भी कुछ हद तक दबाव कम होगा और हमारे डॉलर/रुपया 12-महीने के पूर्वानुमान 94 को कम करना पड़ सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) दरें घटाने के चक्र के आखिर में है और कैलेंडर वर्ष 2026 में नीतिगत रीपो दर को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखेगा।

मॉर्गन स्टैनली

यह व्यापार समझौता भारत को निर्यात प्रतिस्पर्धा के दृष्टिकोण से एशिया की दूसरी उभरती अर्थव्यवस्थाओं से थोड़ा बेहतर स्थिति में रखता है। यह वृद्धि के अनुमान से जुड़ी अनिश्चितता के एक प्रमुख असर को दूर करता है। यह विकास के रुझान का समर्थन करने के लिहाज से बाहरी मांग के लिए अच्छा संकेत है। इससे कारोबारी धारणा बेहतर होने से पूंजीगत व्यय को बढ़ावा मिलने की संभावना है। हम व्यापक आधार वाली मजबूती के साथ वित्त वर्ष 2026 में 7.6 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2027 में 6.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं।

बर्नस्टीन

हम इसे भारत पर ट्रेडिंग की बाय कॉल के लिए सही समय मानते हैं। सुस्त आय और फीके बजट से कमजोर हुए बाजारों के बाद अब बेहतर होती धारणा (आय नहीं) इस बदलाव को गति देगी। निफ्टी के 26,500 पर वापस आने और मजबूती के साथ वहीं जमे रहने की संभावना है क्योंकि ध्यान फिर से कमाई पर आ जाएगा। हमारा साल के अंत का लक्ष्य 28,100 और हमारी ‘न्यूट्रल’ रेटिंग पूरे वर्ष के लिए अपरिवर्तित है। सेक्टर के लिहाज से फाइनैंशियल, आईटी और टेलीकॉम बाजार की तेजी में चढ़ने को तैयार हैं, क्योंकि हमें समझौते की बारीकियों में ऐसा कुछ भी नहीं दिख रहा जो इन क्षेत्रों को प्रभावित करे।

नोमूरा

हम उम्मीद करते हैं कि एफपीआई निवेश और भारत में एफडीआई प्रतिबद्धताएं धीरे-धीरे बदल जाएंगी। एक कमजोर वित्त वर्ष 2026 के बाद हम वित्त वर्ष 2027 में लगभग 7 अरब डॉलर के भुगतान संतुलन अधिशेष का अनुमान लगा रहे हैं।

टैरिफ में 18 प्रतिशत की कमी एक बड़ा बदलाव है जो श्रम-बहुल निर्यात सेगमेंट पर मार्जिन का दबाव कम करेगा। इस समझौते के साथ भारतीय निर्यातक अब दक्षिण पूर्व एशिया में प्रतिस्पर्धी देशों के करीब बराबर हो गए हैं और खिलौनों तथा फर्नीचर जैसे सामान का व्यापार, जो पहले वियतनाम जैसे देशों की तरफ चला गया था, अब फिर भारत आना चाहिए।

बोफा सिक्योरिटीज

भारत के बाजारों को अधिक अमेरिकी उत्पादों के लिए खोलने से ज्यादा टेक्नॉलजी आयात संभव होगा और समय के साथ अमेरिका से अधिक एफडीआई को बढ़ावा मिल सकता है, खासकर भारत की पैक्स सिलिका जैसी विभिन्न अमेरिकी पहलों में भागीदारी के कारण।

यहां तक कि कुछ हद तक रुपये की कमजोरी को नजरअंदाज कर दें तो भी 18 प्रतिशत टैरिफ का असर कम हो जाएगा। लेकिन हमारे अनुमानों के अनुसार, इस्पात, एल्यूमीनियम और ऑटोमोबाइल जैसे सभी उत्पादों पर सेक्शन 232 के तहत टैरिफ को शामिल भी कर लें तो भारत पर प्रभावी टैरिफ दर लगभग 12-13 प्रतिशत हो सकती है, जो पहले लगभग 30-35 प्रतिशत थी।

मोतीलाल ओसवाल

बाजार अब कॉरपोरेट आय वृद्धि की बेहतर होती राह को महत्त्व देना शुरू करगा। लगातार तिमाहियों में आय में सुधार का रुझान दर्ज किया गया है। हम वित्त वर्ष 2025-27 में निफ्टी के लिए लगभग 12 प्रतिशत आय वृद्धि की उम्मीद करते हैं। निफ्टी का 20.4 गुना पर मूल्यांकन अभी भी आकर्षक बना हुआ है और ताजा घटनाओं को देखते हुए इसमें काफी विस्तार की संभावना  है।

व्यापार समझौते की प्रमुख लाभार्थियों में ऑटो एंसिलरीज, रक्षा, कंज्यूमर, टेक्सटाइल्स, ईएमएस, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, आईटी सर्विसेज, फाइनैंशियल और यूटिलिटी की कंपनियां शामिल हैं।

ऐंटीक स्टॉक ब्रोकिंग

यह घटनाक्रम भारतीय शेयरों के लिए सकारात्मक है क्योंकि एफपीआई का इक्विटी निवेश पलट सकता है, जो पिछले 15 महीनों से बाजारों के लिए प्रमुख बाधा रहा है। जीडीपी वृद्धि को 50-80 आधार अंक तक का समर्थन मिल सकता है और रुपये की चाल मजबूत हो सकती है। हमारे प्रमुख ओवरवेट सेक्टर फाइनैंशियल, पूंजीगत वस्तु, रक्षा और कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी हैं।

Advertisement
First Published - February 3, 2026 | 11:01 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement