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निफ्टी बैंक ने रचा नया इतिहास: 61,764 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा सूचकांक, बैंकिंग शेयरों में सुनामी

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निफ्टी बैंक सूचकांक दिन के कारोबार में एनएसई पर 5.4 प्रतिशत चढ़कर 61,764.85 के सर्वाधिक ऊंचे स्तर पर पहुंच गया

Last Updated- February 03, 2026 | 10:51 PM IST
Market Outlook
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता होने के बाद मंगलवार को दिन के कारोबार में नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर बैंकिंग (निजी और साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र) शेयरों की मांग बनी रही और उनमें 8 प्रतिशत तक की तेजी आई। निफ्टी बैंक सूचकांक दिन के कारोबार में एनएसई पर 5.4 प्रतिशत चढ़कर 61,764.85 के सर्वाधिक ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। सूचकांक ने 5 जनवरी, 2026 को छुए अपने पिछले ऊंचे स्तर 60,437.35 को पार कर लिया। निफ्टी बैंक सूचकांक मंगलवार को 2.4 प्रतिशत चढ़कर 60,041.30 पर बंद हुआ। 5 जनवरी, 2026 को यह 60,044.20 पर बंद हुआ था।

ऐक्सिस बैंक और केनरा बैंक में दिन के कारोबार में 8 फीसदी तक की तेजी आई। एचडीएफसी बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया 7 फीसदी चढ़ गए। बैंक ऑफ बड़ौदा, फेडरल बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, पंजाब नैशनल बैंक और एयू स्मॉल फाइनैंस बैंक में भी 6-6 फीसदी की तेजी रही। एसबीआई (6 फीसदी चढ़कर 1,089.80 रुपये), ऐक्सिस बैंक(8 फीसदी चढ़कर 1,418.30 रुपये) और फेडरल बैंक (6 प्रतिशत) ने आज दिन के कारोबार में नए ऑल-टाइम हाई बनाए।

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सोमवार को भारत के साथ अपने देश की बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील की घोषणा की। इसमें भारतीय सामान पर टैरिफ को 25 फीसदी से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया और भारत-रूस तेल व्यापार से संबंधित 25 प्रतिशत के दंडात्मक टैरिफ को पूरी तरह से हटा लिया गया। इससे लागू टैरिफ में 32 प्रतिशत की कमी आई। इसके बाद भारतीय निर्यात न केवल अमेरिकी बाजारों में ज्यादा प्रतिस्पर्धी होगा, बल्कि सकारात्मक बदलावों की एक चेन रिएक्शन भी शुरू होगी जिससे भारतीय बाजारों का प्रदर्शन बेहतर हो सकता है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के विश्लेषकों के अनुसार यह एक बड़ा बदलाव है और इसका भारतीय अर्थव्यवस्था, मौजूदा बाजार धारणा और अमेरिका को निर्यात करने वाले क्षेत्रों पर कई तरह से सकारात्मक असर पड़ेगा, क्योंकि उन्हें बेहतर प्रतिस्पर्धा से फायदा होगा।

अब अनिश्चितता के बादल छंट गए हैं। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि कई सकारात्मक नतीजे सामने आएंगे, जैसे एफआईआई का निवेश बढ़ना, रुपये अपना खोया आधार वापस पाना, भारतीय शेयरों के प्रति आम धारणा में सुधार, एफडीआई के लिए भरोसा बढ़ना और उभरते बाजारों के मुकाबले भारत के खराब प्रदर्शन में सुधार आदि शामिल है।

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First Published - February 3, 2026 | 10:51 PM IST

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