कई महीनों की सुस्ती के बाद अब सीमेंट सेक्टर में हलचल तेज हो गई है। नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट बताती है कि जनवरी 2026 में मांग ने जोरदार वापसी की, और इसकी वजह बना इंफ्रास्ट्रक्चर और हाउसिंग प्रोजेक्ट्स का दोबारा तेज होना। रिपोर्ट के मुताबिक यह रफ्तार Q4FY26 तक जारी रहने की पूरी उम्मीद है। यानी आने वाले महीनों में सीमेंट कंपनियों के लिए माहौल और मजबूत हो सकता है।
जनवरी 2026 में देश के कई हिस्सों में सीमेंट की कीमतें ₹10 से ₹15 प्रति बोरी तक बढ़ गईं। फरवरी में भी राहत नहीं मिली। दक्षिण और मध्य भारत में कीमतें ₹5 से ₹10 प्रति बोरी और बढ़ गईं। हालांकि, पश्चिम बंगाल में कमजोर मांग की वजह से हल्की गिरावट संभव है। वहीं उत्तर भारत में मांग बनी रही तो ₹5 प्रति बोरी की और बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
नुवामा का मानना है कि FY27 के बजट में बढ़े कैपेक्स खर्च ने सीमेंट सेक्टर को मजबूत आधार दिया है। आगे शेयरों की चाल इस बात पर टिकी होगी कि कितनी बिक्री होती है और कीमतें कहां तक टिकती हैं। ब्रोकरेज ने साफ कहा है कि जेके सीमेंट उनकी पहली पसंद बना हुआ है और उन्होंने BUY की सलाह दी है।
पूर्वी भारत में बिहार ने वापसी की है। जनवरी में मांग बढ़ी और ट्रेड सेगमेंट में ₹20 प्रति बोरी की बढ़ोतरी हुई। दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल अब भी सुस्त है और फरवरी में कीमतें थोड़ी गिर सकती हैं। दक्षिण भारत में हाउसिंग सेक्टर की गर्मी ने मांग को हवा दी। जनवरी और दिसंबर में हुई लगातार बढ़ोतरी के बाद फरवरी में भी ₹10 प्रति बोरी का इजाफा हुआ। मांग मजबूत रही तो ये कीमतें टिक सकती हैं।
उत्तर भारत में नवंबर और दिसंबर की ठंड के बाद जनवरी में निर्माण गतिविधियां तेज हुईं। नॉन ट्रेड सेगमेंट में ₹10 प्रति बोरी की बढ़ोतरी दर्ज हुई और फरवरी में और इजाफा संभव है। मध्य भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने रफ्तार पकड़ी। जनवरी में ₹10 प्रति बोरी और फरवरी में करीब ₹5 प्रति बोरी की बढ़ोतरी हुई। पश्चिम भारत में मांग तो बढ़ी, लेकिन सप्लाई में दिक्कतें आईं। इसके बावजूद जनवरी में ₹15 प्रति बोरी की बढ़ोतरी हुई और फरवरी में कीमतें स्थिर रह सकती हैं।
रिपोर्ट का साफ संदेश है। दिसंबर और जनवरी की तेजी कोई संयोग नहीं है। पिछले दो महीनों में हुई कीमत बढ़ोतरी से दबाव कम हुआ है और कंपनियों के लागत घटाने के कदम अब असर दिखाने लगे हैं। कुल मिलाकर, सीमेंट सेक्टर एक बार फिर मजबूती की ओर बढ़ता दिख रहा है और आने वाली तिमाही निर्णायक साबित हो सकती है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।