Avanti Feeds Share price: बुधवार को शेयर बाजार में अवंती फीड्स ने ऐसा उछाल दिखाया कि निवेशक चौंक गए। जानवरों के चारे और झींगा कारोबार से जुड़ी इस कंपनी का शेयर दिन के कारोबार में 15 प्रतिशत से ज्यादा उछलकर ₹1,140.80 तक पहुंच गया और आठ साल पुराना रिकॉर्ड टूट गया। पिछले सिर्फ दो कारोबारी दिनों में शेयर 35 प्रतिशत की छलांग लगा चुका है। इसकी बड़ी वजह भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील को माना जा रहा है, जिसने झींगा उद्योग की तस्वीर बदल दी है।
अवंती फीड्स का शेयर 13 नवंबर 2017 के हाई ₹999.99 को पार कर गया। सुबह 10:54 बजे शेयर ₹1,098.90 पर ट्रेड कर रहा था, जबकि उसी समय सेंसेक्स हल्की गिरावट में था। जब पूरा बाजार सुस्त दिख रहा था, तब अवंती फीड्स ने मजबूती दिखाई।
सोमवार को भारत और अमेरिका के बीच बड़ी ट्रेड डील का ऐलान हुआ। इसके तहत भारतीय सामानों पर अमेरिका का टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया, जो पहले 50 प्रतिशत तक था। भारत के कुल झींगा निर्यात का करीब 48 प्रतिशत अमेरिका जाता है। भारी टैरिफ की वजह से पिछले कुछ महीनों से निर्यात पर दबाव था। अब टैरिफ कम होने से कारोबार में फिर से रफ्तार आने की उम्मीद है।
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अवंती फीड्स झींगा फीड बनाती है और प्रोसेस्ड झींगा का निर्यात भी करती है। कंपनी की सालाना उत्पादन क्षमता 7.75 लाख टन है। इसमें से 60 हजार टन गुजरात में और बाकी क्षमता आंध्र प्रदेश में है। कंपनी की दुनिया की बड़ी सी फूड कंपनी थाई यूनियन के साथ लंबे समय से साझेदारी है, जो इसके कारोबार को मजबूती देती है।
कंपनी का कहना है कि घरेलू और वैश्विक बाजारों में झींगा की मांग आगे भी बनी रहेगी। झींगा एक सस्ता और पौष्टिक प्रोटीन है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और फूड सर्विस सेक्टर का विस्तार भी मांग को सहारा दे रहा है। सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से एक्वाकल्चर सेक्टर को मजबूती मिल रही है। अनुमान है कि FY26 तक भारत का सी फूड उत्पादन 2.2 करोड़ टन तक पहुंच सकता है।
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ब्रोकरेज फर्म एक्सिस सिक्योरिटीज का मानना है कि भारत अमेरिका ट्रेड डील से निर्यात पर निर्भर सेक्टरों को लंबी राहत मिलेगी। इससे ऑर्डर बढ़ सकते हैं, उत्पादन बेहतर हो सकता है और कमाई में सुधार आ सकता है। कुल मिलाकर, अवंती फीड्स ने आठ साल बाद यह दिखा दिया है कि सही मौके पर शेयर बाजार में जोरदार वापसी कैसे की जाती है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।