बजट 2026 में उदार प्रेषण योजना (एलआरएस) के तहत शिक्षा या चिकित्सा के लिए विदेश भेजे जाने वाले धन पर थोड़ी राहत दी गई है। इसके लिए स्रोत पर कर संग्रह (टीसीएस) को कम करने का प्रस्ताव किया गया है। साथ ही विदेश घूमने के यात्रा पैकेज के टीसीएस में भी कटौती की घोषणा की गई है।
शिक्षा अथवा चिकित्सा के लिए भेजी जाने वाली रकम पर टीसीएस को 2 फीसदी तक कम किया जाएगा। अभी अगर शिक्षा या चिकित्सा के लिए रकम भेजी जा रही हो तो 10 लाख रुपये से अधिक पर टीसीएस 5 फीसदी है जबकि अन्य उद्देश्यों के लिए भेजी जाने वाली रकम पर टीसीएस 20 फीसदी है। अन्य उद्देश्यों के लिए टीसीएस दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है। जानकारों का कहना है कि टीसीएस दर कम किए जाने से मध्य वर्ग के परिवारों और व्यक्तियों के लिए धन भेजना आसान हो जाएगा।
वेद जैन ऐंड एसोसिएट्स के पार्टनर अंकित जैन ने कहा, ‘जो लोग अपनी निजी बचत के जरिये विदेश में ट्यूशन फीस और रहने के खर्च का भुगतान कर रहे हैं, उन्हें इसका फायदा मिलेगा। अगर कोई छात्र अपनी पढ़ाई के लिए किसी मान्यता प्राप्त वित्तीय संस्थान से ऋण लेता है तो उसे 0.5 फीसदी टीसीएस दर का लाभ पहले से ही मिल रहा है।’
वित्त मंत्री ने 1 अप्रैल, 2026 से विदेश घूमने के लिए यात्रा पैकेज की बिक्री पर टीसीएस 5 फीसदी से घटाकर 2 फीसदी करने का प्रस्ताव किया है। वर्तमान में 10 लाख रुपये तक की कुल राशि पर टीसीएस 5 फीसदी है। अगर कुल राशि 10 लाख रुपये से अधिक है तो टीसीएस 20 फीसदी लगता है। प्रस्तावित बदलाव के तहत 10 लाख रुपये की सीमा लागू नहीं होगी।
एक्वीलॉ के कार्यकारी निदेशक (कर) राजर्षि दासगुप्ता ने कहा, ‘एकमुश्त नकदी की निकासी कम हो जाएगी। सीमा के कारण होने वाला भ्रम भी खत्म हो जाएगा।’ मुंबई के चार्टर्ड अकाउंटेंट सुरेश सुराणा ने कहा, ‘विशेष रूप से 10 लाख रुपये से
अधिक खर्च वाले यात्रियों और परिवारों को फायदा होगा।’
अगर कोई निवासी व्यक्ति अथवा हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) के सदस्य किसी अनिवासी भारतीय (एनआरआई) से संपत्ति खरीदता है तो 1 अक्टूबर, 2026 से कर कटौती एवं संग्रह खाता संख्या (टैन) लेने की आवश्यकता नहीं होगी। उन्हें स्थायी खाता संख्या (पैन) का उपयोग करके कर (टीडीएस) काटने की अनुमति दी जाएगी।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (सेबी) में पंजीकृत निवेश सलाहकार और सहजमनी डॉट कॉम के संस्थापक अभिषेक कुमार ने कहा, ‘एक बारगी टैन पंजीकरण और उसके बाद तिमाही आधार पर फाइलिंग की आवश्यकता को खत्म किए जाने से अनुपालन बोझ कम होगा। अक्सर एक ही लेनदेन के लिए ऐसा किया जाता रहा है।’