Stock Market Crash/ Why Stock Market Fall Today: भारतीय शेयर बाजारों में रविवार (1 फरवरी) को आयोजित स्पेशल सेशन में भारी गिरावट दर्ज की गई। 16 प्रमुख सेक्टरों में से 12 लाल निशान में बंद हुए और निवेशकों के 9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा डूब गए। हालांकि, बाजार की शुरुआत पॉजिटिव नोट पर हुई और बजट भाषण शुरू होने से पहले बाजार ठीक-ठाक बढ़त के साथ कारोबार करता रहा। भाषण शुरू होने के बाद भी सब ठीक ठाक चल रहा था। निवेशक बजट में बाजार के लिए किसी बड़े कदम की उम्मीद कम ही लगा रहे थे।
हालांकि, चिंता के काले बादल तब मंडराने लगे जब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) का जिक्र किया है। बस फिर क्या था। एसटीटी का जिक्र करते ही बाजार गहरी चिंता में डूब गया। आखिर निर्मला सीतारमण ने भाषण में ऐसा क्या कहा कि बाजार औंधे मुंह लुढ़क गया। आइये जानते हैं;
दरअसल वित्त मंत्री ने बजट में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में इजाफे का प्रस्ताव रखा है। एसटीटी एक डायरेक्ट टैक्स है। यह टैक्स स्टॉक एक्सचेंज पर होने वाली शेयर और डेरिवेटिव्स की खरीद-बिक्री पर लगाया जाता है। वित्त मंत्री ने बजट पेश करते हुए फ्यूचर्स में एसटीटी को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% करने का प्रस्ताव रखा है। यानी 50 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी की गई है। वहीं, ऑप्शंस फ्यूचर्स पर एसटीटी को पहले के 0.01 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने का भी एलान किया है।
अब सुनने में यह प्रतिशत भले ही छोटा लगे लेकिन इसका असर बड़ा है। एसटीटी में इजाफा डेरिवेटिव्स में ट्रेड करने वाले निवेशकों का खर्च बढ़ा देता है। ट्रेडिंग में प्रॉफिट हो या लॉस निवेशकों को हर ट्रेड पर एसटीटी देना होता है। पहले यह फ्यूचर्स में 0.02% था। अब इसे बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है।
चॉइस ब्रोकिंग के रिसर्च एनालिस्ट आकाश शाह के मुताबिक, फ्यूचर्स पर STT को 0.02% से 0.05% और ऑप्शंस प्रीमियम व एक्सरसाइज पर 0.15% करना डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स के लिए खर्च को काफी बढ़ा देता है। यह कोई मामूली बदलाव नहीं, बल्कि बड़ा इजाफा है। इसका सीधा असर F&O ट्रेडिंग वॉल्यूम पर पड़ सकता है। खासकर हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स, प्रॉप ट्रेडिंग डेस्क और कम लागत वाली रणनीतियों पर इसका ज्यादा असर दिखेगा।
चलिए उदाहरण से समझतें हैं। एफ एंड ओ ट्रेडिंग में पहले एक ट्रेड में प्रति लॉट 325 रुपये का खर्च आता था। इसे जब पॉइंट्स में बदलते थे, तो ब्रेकईवन कॉस्ट करीब 5 पॉइंट होती थी (₹325 ÷ 65 = 5 पॉइंट)। अब एसटीटी बढ़कर 0.05% हो जाने के बाद उसी ट्रेड का खर्च बढ़कर करीब 812 रुपये हो गया है। इसका मतलब है कि अब ब्रेकईवन कॉस्ट करीब 12 पॉइंट हो गई है (₹812 ÷ 65 = 12 पॉइंट)। यानी अब मुनाफा कमाने के लिए पहले से ज्यादा मूव चाहिए।
ऑप्शंस ट्रेड का उदाहरण। ऑप्शंस प्रीमियम पर भी एसटीटी बढ़ा दिया गया है। पहले एसटीटी 0.10% था। अब इसे बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है। मान लीजिए आपने निफ्टी कॉल ऑप्शन 100 रुपये प्रीमियम पर खरीदा। एक लॉट की वैल्यू होती है 6,500 रुपये। अब पहले एसटीटी लगता था 6.5 रुपये (₹6,500 × 0.10%)। लेकिन अब एसटीटी लगेगा 9.75 रुपये। (₹6,500 × 0.15%)।
आकाश शाह का कहना है कि जो एफपीआई इंडेक्स और स्टॉक डेरिवेटिव्स में सक्रिय हैं, उनके लिए ज्यादा एसटीटी का मतलब कम नेट रिटर्न है। इससे भारत तुलनात्मक रूप से महंगा बाजार बन जाता है। लॉन्ग-टर्म एफपीआई पर भले ही इसका असर सीमित रह सकता है। लेकिन शॉर्ट-टर्म और डेरिवेटिव्स-फोकस्ड विदेशी निवेश में कमी आ सकती है। कुछ वैश्विक फंड अपनी गतिविधियां कम लागत वाले एशियाई बाजारों की ओर भी मोड़ सकते हैं।
बाजार का साफ मानना है कि इंडेक्स फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर एसटीटी बढ़ने से ट्रेडिंग महंगी होगी। जब लागत बढ़ती है, तो ट्रेडिंग वॉल्यूम पर सीधा दबाव पड़ता है। इसी वजह से निवेशकों ने सबसे पहले एक्सचेंज और ब्रोकिंग कंपनियों के शेयरों से दूरी बनाई।
केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने सिर्फ फ्यूचर्स और ऑप्शंस सेगमेंट को ही छुआ है। अन्य किसी जगह लेनदेन की लागत नहीं बढ़ाई गई है। उन्होंने कहा कि सट्टेबाजी, जिसे हिंदी में ‘सट्टा’ कहा जाता है, बहुत जोखिम भरी होती है। कम पूंजी वाले कई लोग इसमें भारी नुकसान उठा लेते हैं।
वित्त मंत्री ने बजट के प्रेस कांफेरेंस में कहा कि एसटीटी में की गई मामूली बढ़ोतरी का मकसद सिर्फ जरूरत से ज्यादा सट्टेबाजी को रोकना है। उन्होंने कहा कि सरकार बाजार गतिविधियों का सम्मान करती है। लेकिन छोटे निवेशकों को होने वाले नुकसान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि यह टैक्स नीति को समर्थन देने का सिर्फ एक हिस्सा है। बाजार के बाकी पहलुओं को कैसे रेगुलेट किया जाए, यह मार्केट रेगुलेटर पर निर्भर करता है।