वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज अपना नौवां बजट पेश किया। युवा भारत के सपनों को उड़ान देने वाला यह बजट सिर्फ आर्थिक आंकड़ों का दस्तावेज नहीं बल्कि जेनरेशन Z के लिए भी एक रोडमैप है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इसे ‘युवा शक्ति’ की सोच और विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग की इनपुट्स के आधार पर बनाया गया है। बजट ने रोजगार, स्किल ट्रेनिंग और स्टॉर्टअप पर जोर देते हुए पारंपरिक सेक्टरों से हटकर डिजिटल कंटेंट, गेमिंग, डिजाइन, टूरिज्म और हेल्थकेयर जैसी सेक्टर को नई दिशा दी है।
वित्त मंत्री ने कहा कि बजट को तीन ‘कर्तव्य’ या जिम्मेदारियों के इर्द-गिर्द बुना गया है, जिसमें लोगों की उम्मीदों को पूरा करना और उनकी काबिलियत बढ़ाना सबसे अहम है। ये सीधे युवा वर्कफोर्स को टारगेट करता है। सरकार का मानना है कि आईडिया बेस्ड इंडस्ट्रीज भविष्य में नौकरियों का बड़ा इंजन बनेंगी।
इस बजट में एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC) में 1.4 लाख करोड़ रुपये का निवेश, 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में कंटेंट क्रिएटर लैब्स, नए डिजाइन संस्थान, खेलो इंडिया मिशन और हेल्थकेयर स्किलिंग जैसे कदम युवा प्रतिभाओं को क्रिएटर्स, इनोवेटर्स और सर्विस सेक्टर के भविष्य के लीडर्स बनाने का संदेश देते हैं। यह बजट जेन Z को केवल नौकरी पाने वाला नहीं, बल्कि देश की नई सोच और सृजन शक्ति का हिस्सा बनने वाला बनाता है।
सबसे बड़ी घोषणाओं में से एक है एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC) सेक्टर को सपोर्ट। इसके लिए 1.4 लाख करोड़ रुपये रखे गए हैं, ताकि भारत का डिजिटल क्रिएटर इकोसिस्टम मजबूत हो। सरकार 15,000 सेकेंडरी स्कूलों और 500 कॉलेजों में AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब्स लगाएगी। मुंबई के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज से इनको मदद मिलेगी। ये कदम एनिमेटर्स, डिजाइनर्स, गेमर्स और स्टोरीटेलर्स के लिए स्ट्रक्चर्ड करियर रास्ते बनाने का है, क्योंकि इन फील्ड्स में स्किल्ड प्रोफेशनल्स की डिमांड तेजी से बढ़ रही है।
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कल्चर, मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्रीज को भी मजबूती मिली है, जिन्हें ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ कहा जाता है। पूर्वी भारत में एक नया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन बनाने का प्लान है, ताकि ट्रेंड डिजाइनर्स की कमी दूर हो और क्रिएटिव एजुकेशन फैले।
टूरिज्म को रोजगार बढ़ाने वाला बड़ा सेक्टर माना गया है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी बनेगा, कल्चरल और हेरिटेज साइट्स को मैप करने के लिए डिजिटल नॉलेज ग्रिड आएगा। साथ ही, 10,000 टूरिस्ट गाइड्स को ट्रेनिंग देने के पायलट प्रोग्राम शुरू होंगे। कई राज्यों में इको-फ्रेंडली ट्रेकिंग, कछुए और पक्षी देखने के ट्रेल्स बनेंगे, जो रिसर्चर्स, हिस्टोरियंस, कंटेंट क्रिएटर्स और सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए लोकल जॉब्स पैदा करेंगे।
स्पोर्ट्स में भी बड़ा निवेश है। खेलो इंडिया मिशन से लॉन्ग-टर्म इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा, टैलेंट डेवलपमेंट के रास्ते तैयार होंगे और कोचिंग सिस्टम मजबूत होगा। ये सिर्फ एथलीट्स के लिए नहीं, बल्कि स्पोर्ट्स साइंस, एनालिटिक्स, ट्रेनिंग और इवेंट मैनेजमेंट जैसे करियर्स के लिए भी है।
टेक्नोलॉजी और स्किल्स पर बात करें तो, एक हाई-पावर ‘एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट एंड एंटरप्राइज’ स्टैंडिंग कमिटी बनेगी, जो जॉब ट्रेंड्स और AI जैसी नई टेक्नोलॉजीज के असर को देखेगी। एलाइड हेल्थ इंस्टीट्यूशंस बढ़ेंगे, 1.5 लाख केयरगिवर्स को ट्रेनिंग मिलेगी और मेडिकल वैल्यू टूरिज्म हब्स बनेंगे। ये हेल्थकेयर, वेलनेस और सपोर्ट सर्विसेज में नए मौके खोलेंगे।
मेंटल हेल्थ पर भी ध्यान है। उत्तर भारत में NIMHANS-2 जैसा इंस्टीट्यूट बनेगा, रीजनल इंस्टीट्यूट्स को अपग्रेड किया जाएगा और इमरजेंसी-ट्रॉमा सेंटर्स बढ़ेंगे। ये कदम केयर इकोनॉमी को मजबूत करेंगे और स्किल्ड जॉब्स देंगे।
कुल मिलाकर, ये बजट जेन Z को सिर्फ नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि क्रिएटर्स, इनोवेटर्स और सर्विस सेक्टर के लीडर्स के तौर पर देखता है। डिजिटल लैब्स, डिजाइन स्कूल्स, टूरिज्म सर्किट्स, स्पोर्ट्स मिशन्स और हेल्थकेयर ट्रेनिंग जैसे कदम इसी दिशा में हैं।