बजट 2026 की आहट के साथ ही देश के वरिष्ठ नागरिकों की उम्मीदें एक बार फिर जोर पकड़ने लगी हैं। यह एक ऐसा वर्ग है जिसकी कमाई का मुख्य जरिया सैलरी नहीं, बल्कि जीवन भर की जमा पूंजी से मिलने वाला ब्याज होता है। ऐसे में बढ़ती महंगाई और चिकित्सा खर्चों के बीच बुजुर्गों की इस बजट से कुछ खास रियायतों की मांग की है।
NPV एंड एसोसिएट्स के पार्टनर और चार्टर्ड अकाउंटेंट विनीत द्विवेदी का कहना है कि इस बजट में सरकार को बुजुर्गों की आर्थिक सुरक्षा और उनकी सेहत से जुड़ी जरूरतों को खास तौर पर ध्यान में रखना चाहिए।
रिटायरमेंट के बाद ज्यादातर लोग अपनी जरूरतों के लिए बैंक एफडी और पोस्ट ऑफिस की योजनाओं पर ही निर्भर रहते हैं। अभी इनकम टैक्स की धारा 80TTB के तहत ब्याज से होने वाली आमदनी पर 50,000 रुपये तक की छूट मिलती है। विनीत का कहना है कि इस सीमा को बढ़ाकर 75,000 रुपये या 1 लाख रुपये किया जाना चाहिए, ताकि ब्याज पर जीने वाले बुजुर्गों को कुछ ज्यादा राहत मिल सके।
इसके साथ ही, TDS (Tax Deducted at Source) की प्रक्रिया वरिष्ठ नागरिकों के लिए सिरदर्द बनी हुई है। अक्सर बैंक ब्याज पर टैक्स काट लेते हैं, जबकि अंत में बुजुर्ग की कुल टैक्स देनदारी जीरो होती है। इससे उनके पास नकदी (Cash Flow) की कमी हो जाती है। एक्सपर्ट का सुझाव है कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज पर लगने वाले TDS को पूरी तरह खत्म कर देना चाहिए ताकि उन्हें अपना ही पैसा वापस पाने के लिए रिफंड का इंतजार न करना पड़े।
बुजुर्गों के लिए सबसे बड़ी आर्थिक चिंता इलाज का खर्च होता है। मेडिकल खर्च आम महंगाई से कहीं तेज़ी से बढ़ रहा है, खासकर पुरानी बीमारियों के इलाज में। फिलहाल इनकम टैक्स के सेक्शन 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर 50 हजार रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है।
मेडिकल महंगाई को देखते हुए मांग है कि इस छूट की सीमा कम से कम दोगुनी करके 1 लाख रुपये कर दी जाए। अगर सरकार हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर मिलने वाली यह राहत बढ़ाती है, तो बुजुर्गों को बेहतर इलाज और बीमा कवर लेने में आसानी होगी और उन पर पड़ने वाला आर्थिक दबाव भी काफी कम हो जाएगा।
कुल मिलाकर सीनियर सिटीजन की यह विश लिस्ट उनकी रोजमर्रा की परेशानियों को कम करने और उन्हें सम्मान के साथ रिटायरमेंट की जिंदगी जीने में मदद करने वाला कदम मानी जा रही है।