facebookmetapixel
Advertisement
पीएम मोदी 28 मार्च को करेंगे जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन; यूपी में पर्यटन, उद्योग और लॉजिस्टिक्स को नई उड़ानBiharOne: बिहार में डिजिटल गवर्नेंस की नई शुरुआत, CIPL के साथ बदलाव की बयारईरानी तेल खरीद का दावा गलत, रिलायंस ने रिपोर्टों को बताया बेबुनियादरनवे से रियल्टी तक: जेवर एयरपोर्ट ने बदली नोएडा की प्रोपर्टी की कहानी, 2027 तक आ सकती है 28% और तेजी‘हेडलाइन्स’ से कहीं आप भी तो नहीं हो रहे गुमराह? SIP पर जारी रखें ये स्ट्रैटेजीAM/NS India में बड़ा बदलाव: दिलीप ओम्मन होंगे रिटायर, अमित हरलका बनेंगे नए सीईओभारत में पेट्रोल, डीजल या LPG की कोई कमी नहीं, 60 दिन का स्टॉक मौजूद: सरकारभारत की तेल जरूरतें क्यों पूरी नहीं कर पा रहा ईरानी क्रूड ऑयल? चीन की ओर मुड़े जहाजलाइन लगाने की जरूरत नहीं, घर पहुंचेगा गैस सिलेंडर: सीएम योगी आदित्यनाथऑल टाइम हाई के करीब Oil Stock पर ब्रोकरेज सुपर बुलिश, कहा- खरीद लें, 65% और चढ़ने का रखता है दम

विदेशों में पढ़ रहे 18 लाख भारतीय छात्र, प्रतिभा पलायन रोकने के लिए बड़े सुधारों की जरूरत: Economic Survey

Advertisement

दूसरी ओर विदेशों से भारत आने वाले छात्रों की संख्या 2000-01 के 7,000 से बढ़कर 2020 तक करीब 49,000 ही पहुंच पाई है

Last Updated- January 29, 2026 | 11:09 PM IST
Students
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं के विदेश जाने से प्रतिभा पलायन संकट से निपटने और देश का धन बाहर जाने से रोकने के लिए उच्च शिक्षा व्यवस्था में ढांचागत सुधारों की आवश्यकता है। वर्ष 2025-26 की आर्थिक समीक्षा में यह बात कही गई है। समीक्षा के मुताबिक भारत अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों के सबसे बड़े स्रोत में से एक के रूप में उभरा है। विदेश से एक छात्र यहां पढ़ने आता है जबकि 28 यहां से दूसरे देश जाते हैं।

समीक्षा में कहा गया, ‘विदेशों में पढ़ने वाले भारतीयों की संख्या 2016 के 6.85 लाख से बढ़कर 2025 में 18 लाख हो गई।’ दूसरी ओर विदेशों से भारत आने वाले छात्रों की संख्या 2000-01 के 7,000 से बढ़कर 2020 तक करीब 49,000 ही पहुंच पाई है। यह तस्वीर उन देशों से काफी अलग है, जहां अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों की संख्या कुल बच्चों का 10 से 40 फीसदी तक होती है।

इसी तरह विदेशों में अध्ययन के मद में सालाना बाहर जाने वाल राशि वित्त वर्ष 24 में बढ़कर 3.4 अरब डॉलर हो गई। ज्यादातर भारतीय छात्र कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में जाते हैं। इन देशों के बेहतर कार्य अधिकार, अच्छे प्रवासन उपाय और मजबूत ब्रांडिंग छात्रों को आकर्षित करती है। समीक्षा में सुझाव दिया गया कि भारत को प्रतिभा पलायन रोकने के लिए उपाय करने चाहिए। इनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के दिशानिर्देशों का उपयोग कर भारत को वैश्विक शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित करना शामिल है। इससे विदेशी विश्वविद्यालयों की शाखाओं की स्थापना, योग्यता को पारस्परिक मान्यता और छात्रों का आदान-प्रदान संभव हो सकेगा।

आर्थिक समीक्षा दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि ‘स्टडी इन इंडिया’ पहल नैशनल असेसमेंट ऐंड एक्रिडिशन काउंसिल (एनएएसी) तथा नैशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) जैसे गुणवत्ता मानकों के साथ-साथ वैश्विक रैंकिंग का भी लाभ उठा सकती है, ताकि अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए आकर्षक प्रस्ताव तैयार किया जा सके और उन्हें भारत आने के लिए लुभाया जा सके।

यह रणनीति भारत की विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित की शिक्षा तथा आयुर्वेद, दर्शन और शास्त्रीय कलाओं जैसी पारंपरिक पद्धतियों को नवाचार के साथ जोड़ने का लक्ष्य रखती है, ताकि विकासशील देशों के लिए आकर्षक और किफायती प्रस्ताव तैयार किया जा सके।

यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अपने यहां आकर्षित करने के लिए जूझ रहा है, जबकि वैश्विक स्तर पर दूसरे देशों में जाने वाले छात्रों की संख्या 2001 में 22 लाख से बढ़कर 2022 में 69 लाख पहुंच गई। समीक्षा में कहा गया कि ब्रिक्स समूह के भीतर भी रूस और चीन में बाहरी छात्रों की हिस्सेदारी 80 फीसदी है, जबकि भारत का हिस्सा अभी भी एकल अंक में सिमटा हुआ है।

इसके बावजूद भारत दक्षिण एशिया में प्रमुख गंतव्य बना हुआ है। नेपाल, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और भूटान से विदेश में पढ़ाई के लिए जाने वाले पांच में से चार छात्र भारत को चुनते हैं, लेकिन समीक्षा के अनुसार 2011 के बाद से यह हिस्सेदारी लगातार कम हो रही है। समीक्षा में चेताया गया है कि अन्य क्षेत्रीय केंद्रों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते भारत को अपने पड़ोसियों के लिए आकर्षक बने रहने की खातिर प्रयास तेज करने होंगे।

इसमें पूर्ण डिग्री से परे समर स्कूल, सेमेस्टर-अब्रॉड मॉड्यूल, विरासत और दर्शन पाठ्यक्रम, योग तथा आयुर्वेद प्रमाणपत्र और नवाचार या ग्रामीण-इमर्शन लैब आदि शामिल हैं। इन कार्यक्रमों को पर्यटन सर्किट के साथ जोड़ा जा सकता है और ब्रिक्स तथा व्यापक विकासशील देशों के साथ साझेदारी कर इन्हें आगे बढ़ाया जा सकता है।

Advertisement
First Published - January 29, 2026 | 11:09 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement