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विदेशी पढ़ाई की राह बदली: भारतीय छात्र अब दुबई को दे रहे हैं तरजीह

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महंगे खर्च, वीजा दिक्कतों और सुरक्षा चिंता के बीच पश्चिम एशिया बना नया एजुकेशन हब

Last Updated- December 16, 2025 | 8:35 AM IST
Study Abroad

विदेश में शिक्षा के लिए अब छात्रों की प्राथमिकताएं बदल रही हैं। पहले जहां हर कोई अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया या यूरोप के अन्य देशों में जाना पसंद करता था, अब अधिकांश भारतीय पश्चिमी एशिया के देशों का रुख कर रहे हैं। अधिकांश छात्र बताते हैं करियर के सपनों की नई मंजिलें अपने देश के करीब ही नहीं, सुरक्षित और किफायती भी हैं।

केरल के त्रिशूर जिले के संजय कृष्णा अन्य छात्रों की तरह इस साल की शुरुआत में ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा के विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा के लिए दाखिला लेने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन पढ़ाई की लागत, वीजा संबंधी दिक्कतें, नौकरी की संभावनाएं और कुछ हद तक सुरक्षा चिंताओं ने उन्हें नई दिशा- दुबई की ओर मोड़ दिया। कृष्णा अब दुबई में मिडलसेक्स यूनिवर्सिटी के ग्लोबल कैम्पस में 10 महीने से आपूर्ति और संचालन प्रबंधन में एमबीए कर रहे हैं।

उन्होंने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘मुझे ब्रिटेन में उसी कोर्स के लिए 18 लाख रुपये फीस देने के लिए कहा गया था, लेकिन यहां मेरा कोर्स 14 लाख रुपये में हो जाएगा। यही नहीं, ब्रिटेन में मेरे दोस्त रिहायश और अन्य जरूरतों पर प्रति माह 1 लाख रुपये से अधिक खर्च कर रहे हैं, जबकि बेहतर सुविधाओं के साथ मेरा काम केवल 70,000 रुपये में चल रहा है। मेरे कैम्पस में भारत के बहुत अधिक छात्र हैं।’

कृष्ण अकेले नहीं हैं, जो पश्चिम एशिया के देशों को पढ़ाई के लिए चुन रहे हैं। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि 2023 से दुबई में रुचि दिखाने वाले छात्रों की संख्या में 40 गुना वृद्धि हुई है। वीजा में दिक्कतें और जांच तथा वर्क वीजा को लेकर घबराहट के कारण छात्र धीरे-धीरे पश्चिम एशिया, मुख्य रूप से दुबई की ओर रुख कर रहे हैं। इसमें प्लस प्वाइंट यह है कि यहां कई नामी संस्थानों के ग्लोबल कैम्पस हैं।

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First Published - December 16, 2025 | 8:35 AM IST

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