अंतरिक्ष क्षेत्र की निजी कंपनी रेड बैलून एरोस्पेस ने ‘मिशन साना’ का प्रक्षेपण किया है। यह देश का पहला स्वदेशी सुपर-प्रेशर प्लेटफॉर्म है, जो सात राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के वाणिज्यिक भार (पेलोड) ले जा रहा है। भारत इस अभियान के साथ अमेरिका, फ्रांस, जापान और चीन के बाद उन देशों में शुमार हो गया है, जिनके पास स्वदेशी स्ट्रेटोस्फेरिक (हाइड्रोजन) बैलून क्षमता है।
वर्ष 2025 में परिचालन शुरू करने वाली रेड बैलून एरोस्पेस ने महज आठ महीनों में परिचालन वाणिज्यिक उड़ान शुरू कर दी है। यह ग्लोबल नियर स्पेस सेक्टर में सबसे तेजी से विकसित होने वाली परियोजनाओं में से एक है। नियर स्पेस पृथ्वी के वायुमंडल का वह ऊपरी क्षेत्र है, जो सामान्य हवाई उड़ानों (20 किलोमीटर के आसपास क्षोभमंडल एवं समताप मंडल) और बाह्य अंतरिक्ष (100 किलोमीटर) के बीच स्थित है।
कंपनी का विस्टा प्लेटफॉर्म (सुपर-प्रेशर प्लेटफॉर्म) विजयवाड़ा के इंदिरा गांधी स्टेडियम से पृथ्वी से लगभग 25 किलोमीटर ऊपर तक पहुंचा। इस प्रक्षेपण में जैविक प्रयोग प्रणालियों, प्रणोदन प्रौद्योगिकी प्रदर्शनों, ऑनबोर्ड कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म, पृथ्वी अवलोकन सेंसर और दिशा सूचक (नेविगेशन) प्रदर्शन सत्यापन प्रणालियों का परीक्षण करने वाले संगठनों ने भी अपनी तकनीक आदि भेजे (पेलोड पार्टनरशिप में) थे।
सभी पेलोड अभियान सफलतापूर्वक पूरे हो गए, जिससे अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक मानकों के समक्ष भारत की तकनीकी क्षमता साबित हुई। ‘मिशन साना’ ने दूरसंचार, आपदा निगरानी, पृथ्वी अवलोकन और निगरानी आदि के लिए एक स्थायी मंच भी तैयार किया। इतनी ऊंचाई पर विस्टा प्लेटफॉर्म आकाश में एक टावर की तरह भी काम करता है, जिससे उन क्षेत्रों में गैर-स्थलीय नेटवर्क (एनटीएन) संपर्क और आपदा प्रबंधन संभव हो पाता है, जहां स्थायी और किफायती कवरेज का अभाव रहा है।
रेड बैलून एरोस्पेस के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) सीवीएस किरण ने कहा, ‘विस्टा अंतरिक्ष के निकट हमारी मुख्य प्लेटफॉर्म तकनीक है। यह तो महज शुरुआत है। आने वाले महीनों में हम कई अभियानों के माध्यम से विस्टा की क्षमताओं का विस्तार करेंगे, हेलिक्स एयरशिप के विकास में तेजी लाएंगे और दूरसंचार एवं आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में वाणिज्यिक साझेदारियों को और मजबूत करेंगे। तेजी से कार्य और अपने मिशनों को अंजाम देना ही हमारी खासियत है। इससे हम स्वदेशी समताप मंडल प्लेटफॉर्म तैयार करने, परीक्षण और तैनात करने में सक्षम होते हैं।’
रेड बैलून एरोस्पेस के सह-संस्थापक और मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) सिरीश पल्लिकोंडा ने कहा, ‘एक विस्टा मिशन एक ही समय में कई ग्राहकों, कई प्रयोगों और कई उद्योगों को सहायता प्रदान कर सकता है। प्रत्येक इस्तेमाल के लिए अलग-अलग प्रणालियां तैयार करने के बजाय एक साझा अधिक ऊंचाई वाला प्लेटफॉर्म एक साथ कई संगठनों को पहुंच प्रदान कर सकता है (राइडशेयर) जिससे लागत में भारी कमी आती है, तैनाती की गति बढ़ती है और निकट-अंतरिक्ष तक पहुंच एक व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खुल जाती है।’
रेड बैलून एरोस्पेस की तकनीक अंतरिक्षीय ढांचे में अहम कमी की भरपाई करती है। जहां विमान 10 किलोमीटर से नीचे और उपग्रह 160 किलोमीटर से ऊपर परिक्रमा करते हैं, वहीं 20 से 50 किलोमीटर के बीच का समताप मंडल रणनीतिक लाभ के बावजूद अधिक इस्तेमाल नहीं किया गया है। समताप मंडलीय प्लेटफॉर्म उपग्रहों की तुलना में अधिक समय तक उच्च-रिजॉल्यूशन इमेजिंग, कक्षीय प्रक्षेपण लागत के बिना लचीली तैनाती और आपदा प्रबंधन और संचार के लिए त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता प्रदान करते हैं।
विस्टा प्लेटफॉर्म सुपर-प्रेशर बैलून तकनीक का उपयोग करता है जो दिन-रात के तापमान चक्रों के दौरान लंबे समय तक ऊंचाई पर स्थिर टिका रहता है। पारंपरिक निकट-अंतरिक्ष प्लेटफॉर्मों के उलट (जो कुछ ही घंटों में उठते और उतरते हैं) विस्टा हफ्तों या महीनों तक परिचालन में रहता है जिससे उपग्रह परिनियोजन लागत के एक अंश पर एक स्थायी निकट-अंतरिक्ष प्लेटफॉर्म बनता है।
इसके इस्तेमाल में ग्रामीण संपर्क के लिए दूरसंचार, कृषि निगरानी, स्थानिक शासन, वास्तविक समय आपदा निगरानी, वायुमंडलीय अनुसंधान, पर्यावरण संवेदन और निगरानी क्षमताएं शामिल हैं। यह सफल प्रक्षेपण रेड बैलून एरोस्पेस के तीन-प्लेटफॉर्म वाणिज्यिक ढांचे की उपयोगिता साबित करता है, जिनमें विस्टा सुपर-प्रेशर बैलून, एल्टिस टेथर्ड एयरोस्टेट्स और दूरसंचार और कार्गो के लिए ऑटोनोमस नेविगेशन के साथ हेलिक्स दीर्घकालिक समताप मंडलीय एयरशिप शामिल हैं। ये तीनों प्लेटफॉर्म प्रमुख तकनीक और मॉड्यूलर ढांचा साझा करते हैं, जिससे लागत कम होती है और साथ ही विशिष्ट बाजार क्षेत्रों की जरूरतें पूरी की जाती है। रेड बैलून एरोस्पेस आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में स्थित एक अत्याधुनिक सुविधा केंद्र से संचालित होता है।