facebookmetapixel
Advertisement
अगर युद्ध एक महीने और जारी रहा तो दुनिया में खाद्य संकट संभव: मैट सिम्पसनहोर्मुज स्ट्रेट खुला लेकिन समुद्री बीमा प्रीमियम महंगा, शिपिंग लागत और जोखिम बढ़ेपश्चिम एशिया युद्ध का भारत पर गहरा असर, रियल्टी और बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव मेंगर्मी का सीजन शुरू: ट्रैवल और होटल कंपनियों के ऑफर की बाढ़, यात्रियों को मिल रही भारी छूटबाजार में उतार-चढ़ाव से बदला फंडरेजिंग ट्रेंड, राइट्स इश्यू रिकॉर्ड स्तर पर, QIP में भारी गिरावटपश्चिम एशिया संकट: MSME को कर्ज भुगतान में राहत पर विचार, RBI से मॉरेटोरियम की मांग तेजRCB की बिक्री से शेयरहोल्डर्स की बल्ले-बल्ले! USL दे सकती है ₹196 तक का स्पेशल डिविडेंडतेल में बढ़त से शेयर और बॉन्ड में गिरावट; ईरान का अमेरिका के साथ बातचीत से इनकारगोल्डमैन सैक्स ने देसी शेयरों को किया डाउनग्रेड, निफ्टी का टारगेट भी घटायाकिधर जाएगा निफ्टीः 19,900 या 27,500; तेल और भू-राजनीति तनाव से तय होगा रुख

UPI के बीच कैश क्यों बना हुआ है बैकअप प्लान? बीते एक साल में ATM से पैसा निकालने में बड़ा बदलाव

Advertisement

डिजिटल भुगतान बढ़ने से एटीएम विजिट घटे हैं, लेकिन लोग अब कम बार में ज्यादा नकद निकाल रहे हैं, CMS रिपोर्ट के मुताबिक

Last Updated- January 29, 2026 | 10:23 AM IST
ATM

देश के एटीएम अब पहले जैसे व्यस्त नहीं रहे। CMS Info Systems की नई रिपोर्ट बताती है कि 2025 में एटीएम से नकद निकासी घटी है। कंपनी देशभर में करीब 73,000 एटीएम संभालती है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में एक एटीएम से औसतन ₹1.21 करोड़ प्रति माह नकद निकाला गया, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा ₹1.30 करोड़ था। साफ है कि नकद अब रोजमर्रा की जरूरत नहीं रहा।

एटीएम पर कदम कम पड़े, लेकिन जब लोग पहुंचे तो खाली हाथ नहीं लौटे। 2025 में एक बार में निकाली जाने वाली औसत रकम बढ़कर ₹5,835 हो गई, जो 2024 में ₹5,586 थी। इसका मतलब है कि लोग अब बार बार नकद निकालने के बजाय सोच समझकर बड़ी रकम निकाल रहे हैं।

रोजमर्रा का खर्च डिजिटल के हवाले

किराना, बस मेट्रो, मोबाइल रिचार्ज और छोटे बिल अब नकद नहीं मांगते। UPI और कार्ड ने रोजमर्रा के खर्च संभाल लिए हैं। CMS का कहना है कि 2024 में मासिक औसत नकद निकासी का पूरा डेटा तुरंत उपलब्ध नहीं था, लेकिन बीते एक साल में डिजिटल भुगतान के आंकड़े हर महीने नए रिकॉर्ड बना रहे हैं।

नकद की कहानी खत्म नहीं हुई है। बड़ी निकासी यह बताती है कि लोग आज भी आपात स्थिति, स्थानीय सेवाओं और उन जगहों के लिए नकद रखना चाहते हैं जहां डिजिटल भुगतान नहीं चलता। नकद अब आदत नहीं रहा, लेकिन भरोसे का सहारा अब भी वही है।

नकद के नक्शे पर राज्यों का फर्क

नकद के इस्तेमाल में राज्यों के बीच बड़ा अंतर दिखता है। कर्नाटक में एटीएम सबसे ज्यादा पैसा उगल रहे हैं, जहां प्रति एटीएम औसतन ₹1.73 करोड़ की निकासी हुई। दूसरी ओर जम्मू कश्मीर में नकद का बहाव सबसे धीमा रहा, जहां यह आंकड़ा ₹83 लाख पर सिमट गया।

महानगरों की चमक के बावजूद नकद की असली जरूरत गांवों और छोटे शहरों में दिखती है। 2025 में सेमी अर्बन और ग्रामीण इलाकों में प्रति एटीएम औसतन ₹1.30 करोड़ नकद निकाला गया। मेट्रो शहरों में यह ₹1.18 करोड़ और अन्य शहरी इलाकों में ₹1.11 करोड़ रहा।

मौसम और त्योहार भी तय करते हैं नकद की चाल

CMS के मुताबिक मानसून, तेज गर्मी, प्रदूषण और त्योहारों का सीधा असर नकद निकासी पर पड़ता है। जब लोगों के लिए बाहर निकलना आसान होता है, तब एटीएम से नकद भी ज्यादा निकलता है।

खर्च की तस्वीर बदल रही है

CMS के खर्च से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि घरों की प्राथमिकताएं बदल रही हैं। 2025 में बीमा दूसरा सबसे बड़ा खर्च बनकर उभरा और कुल खर्च का 25 प्रतिशत हिस्सा इस पर गया। सरकारी सुधारों के बाद इस श्रेणी में 32 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके उलट शिक्षा, होटल और मीडिया मनोरंजन जैसे खर्चों में गिरावट दर्ज की गई।

Advertisement
First Published - January 29, 2026 | 10:23 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement