भारत के छोटे इस्पात निर्यातक यूरोपीय बंदरगाहों पर माल जब्त होने और अनुपालन रिपोर्ट के अभाव में ऑर्डर रद्द होने की समस्या से जूझ रहे हैं। यूरोपीय संघ ने 1 जनवरी से कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) का भुगतान चरण लागू किया है जिसके बाद से भारत के इस्पात क्षेत्र के सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) अब तक की सबसे गंभीर दिकक्त का सामना कर रहे हैं।
भारत 27 जनवरी को यूरोपीय संघ के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में सीबीएएम पर कोई रियायत हासिल नहीं कर पाया। सीबीएएम यूरोपीय संघ का एक ऐसा उपाय है जिसके तहत वहां जाने वाले इस्पात, सीमेंट और एल्युमीनियम जैसे ज्यादा कार्बन खपत वाले सामान में मौजूद कार्बन पर ‘उचित कीमत’ लगाई जाती है। यह हर कैलेंडर वर्ष में 50 टन से ज्यादा आयात के लिए जरूरी है।
छोटे निर्यातकों के लिए लगभग 8,000 सीबीएएम अनुपालन रिपोर्ट तैयार करने वाली क्लीनकार्बन डॉट एआई के संस्थापक नीलेश भट्टड़ के अनुसार इस महीने कम से कम 10 भारतीय खेप कार्बन घोषणाएं न होने या अधूरी होने के कारण यूरोपीय बंदरगाहों पर रोक दी गई हैं। मुंबई की ट्रैक्टर कंपनी की एक शिपमेंट पोलैंड के एक बंदरगाह पर फंसी हुई थी, जिससे उस पर भारी डिटेंशन चार्ज लग रहा था।
ऑर्डर रद्द होने के मामले भी बढ़ने लगे हैं। भट्टड़ ने अपनी कंपनी के एक ग्राहक का उदाहरण देते हुए कहा कि मुंबई के एक निर्यातक को हाल में 7,000 टन इस्पात का ऑर्डर रद्द होने की समस्या से जूझना पड़ा, क्योंकि सीबीएएम की वजह से लागत 5-6 करोड़ तक बढ़ गई, जिससे डील घाटे का सौदा बन गई।
भारत के सालाना इस्पात निर्यात में यूरोपीय संघ का 32-45 फीसदी योगदान है। अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट में रेटिंग एजेंसी इक्रा ने चेताया था कि सीबीएएम से निर्यात और मुनाफे पर प्रभाव पड़ सकता है।
क्लीनकार्बन से मिले नए आंकड़े से इस भारी बाधा की संभावित विशालता के बारे में बताते हैं। कंपनी का अनुमान है कि 25,000 से 30,000 एमएसएमई, जो परोक्ष रूप से यूरोपीय संघ को निर्यात करते हैं, उन पर अब सीबीएएम का जोखिम है, साथ ही 3,000-4,000 प्रत्यक्ष निर्यातकों पर भी इसी तरह का खतरा है।
लुधियाना की फोर्जिंग और एग्री-पार्ट्स बेल्ट में स्थित येरिक इंटरनैशनल जर्मनी और पोलैंड सहित 15 यूरोपीय देशों को ट्रैक्टर और कृषि मशीनरी के कलपुर्जों का निर्यात करती है। कंपनी को 1 जनवरी से लागू अनुपालन जरूरतों की वजह से चुनौती बढ़ने की आशंका सता रही है।